
लगातार तीन दिन से देहरादून मे बरसात हो रही है और इस बरसात मे जब सड़क पर उतरा जाए वो भी सरकार के खिलाफ तो नज़ारा कुछ अलग ही होता है बरसात ना होती तो लगभग 10 हज़ार से ज्यादा लोग आज सड़क पर डबल इज़न की सरकार को कोसते हए सड़क पर मलिन बस्तियों के मालिकाना हक दो सरकार के नारे लगाते। पर फिर भी कांग्रेस ने अछी खासी भीड़ को लेकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया
अपने नेता प्रीतम सिंह के दिशा निर्देश पर कांग्रेसियों ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास कूच किया। आज दो अभी दो मलिन बस्तियों को मालिकाना हक दो की आवाज़ से टीला राम बाजार गुजने लगा था अपने तय कार्यक्रम में बारिश के कारण बदलाव करते हुए कांग्रेसी परेड ग्राउंड की जगह कांग्रेस भवन में इकट्ठा हुए हैं प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रीतम सिंह के नेतृत्व में हजारों की संख्या में कांग्रेस का झंडा लिए कार्यकर्ता कांग्रेस भवन से मुख्यमंत्री आवास के लिए निकले इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री मुर्दाबाद, प्रधानमंत्री मुर्दाबाद, भाजपा मुर्दाबाद के नारे लगाए ओर उन्हें मुख्यमंत्री आवास से पूर्व पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से बैरिकेट लगाकर रोक लिया कांग्रेस के जुलूस को हाथीबड़कला चौक पर रोक दिया।।
इस दौरान कांग्रेसियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प भी देखने को मिली हालांकि बारिश हो जाने के कारण यहा तक पहुचते पहुचते कांग्रेसियों का जोश ठंडा भी पड़ गया और बैरीकेट पर ही कांग्रेस ने अपना ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया दिया।
अगर बरसात ना होती तो प्रीतम सिंह, राजकुमार ,सूर्यकांत धस्माना, दिनेश अग्रवाल,हीरा सिंह बिष्ट कमलेश रमन, दीप बोरा , दूंन के सभी कांगेस के पूर्व ओर वर्तमान पार्षद अपने अरमान पूरे कर लेते क्योंकि तब उम्मीद लगाई जा रही थी कि 12 से 15 हज़ार लोग मुख्यमंत्री आवास कूच करेगे पर बरसात ने पानी फेर दिया लेकिन इसके बाद भी कांगेस के ये सभी नेता ये संदेश देने मे कामयाब रहे कि जब जब वो सरकार के खिलाफ इनकी जन विरोधी नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरेगे तो जनता उनके कार्यकर्ता सड़क पर होंगे अपने नेता के साथ ।
अब बोलता है उत्तराखंड़ की नगर निगम के चुनाव नजदीक है और दूंन मे इन मलिन बस्तियो का जा वोट बैंक है वो किसी भी पार्टी के उम्मीद वार को मेयर बनाने का दम रखता है तो कहियो को पार्षद इसलिए सबसे पहले बीजेपी ने वोट बैंक के लालच मे! फिलहाल मलिन बस्तियों को तीन साल तक के लिए बचा दिया मतलब ये बस्तियां नही टूटगी तीन साल तक तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी अपनी सरकार के दौरान चुनाव में जाने से पहले ही इन बस्तियो वालो को मालिकाना हक़ दिया था जिस को लेकर एक्ट आया था बस इसी बात को लेकर कांग्रेस सड़क पर थी कि तीन साल बस्तियो को बचाने की बात क्या करते हो हमने तो इनको मालिकाना हक पहले से ही दे रखा है कुल मिलाकार अभी अगर नगर निगम के चुनाव नजदीक ना होते तो ना कांग्रेस सड़क पर होती और ना त्रिवेन्द्र की सरकार अद्ययादेश लेकर आती फिलहाल कांग्रेस हो या बीजेपी दोनों की नज़र अभी बस्तियो मे रहने वालो के वोट बैंक पर है इसलिए कोई भी कमी ना बीजेपी छोड़ेगी ना कांग्रेस ! ओर इस पूरे नजारे को अगर कोई देख रहा है तो वो है देहरादून का व्यापारी वर्ग क्योकि उनकी दुकानो पर तो चल रहा है। बुल डोज़र ओर उनकी पैरवी कुछ नेताओ को छोड़ कोई करता नजर नही आ रहा है क्योकि आदेश माननीय कोर्ट का है। ओर इस आने वाले निगम चुनाव मे यही वोट साइलेंट वोट कहलायेगा इसलिए पिक्चर अभी बाकी है




