
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत 45 से अधिक ताबडतोड जनसभाएं राज्य की पाँचो लोकसभा सीट पर कर चुके है और प्रचार समाप्त तक ये उनका जनसभाओं का आकड़ा 70 से अधिक पहुच जाएगा। पर क्या आप जानते है कि कुछ बीजेपी के नेता कही कांग्रेस के प्रत्याशी की जीत की दुवा मागते दिखाई दे रहे है! ओर अब तक का राजनीतिक और सियासी गुणा भाग लगाते हुए भी, सूत्र कहते है को कांग्रेस को ही कुछ जगह विजयी होते बता रहे है बीजेपी वाले !
दरसल मै उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में हालात और समीकरण इस कदर ऐसे बने हैं कि कुछ भाजपाई कांग्रेस की जीत की दुआ कर रहे है की बस जीत कांग्रेस की हो जाये
ओर ये सब
इसलिए, क्योंकि, अगर कांग्रेस लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड से सीटें जीतती है तो प्रदेश के कई दिग्गज भाजपाइयों को विधानसभा और राज्यसभा में पहुंचने का मौका मिलेगा ।
राज्य मे विपक्ष में बैठी कांग्रेस ये दावा कर रही है कि वो पांचों सीट जीतेगी.
वही कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के कुछ नेता चाहेंगे कि ये दावा कांग्रेस का सच हो जाए
आपको बता दे को . प्रदीप टम्टा और राज बब्बर मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं. ओर अगर ये दोनों प्रत्याशी ही जीतते हैं तो उत्तराखंड भाजपा का ही कोई नेता उनकी जगह लेना चाहेगा।
ओर इस मौके पर लाइन मे लगे कई नेताओं की हसरतें उछाल मार रही हैं. ऐसे नेता सियासी गुणा भाग में अभी से लग गए हैं. ख़ास कर वो दिग्गज जिन्हें टिकट नहीं मिला और वे भी जिन्होंने चुनाव लड़ने से ही मना कर दिया था।
वहीं अगर टिहरी सीट से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बाजी मारते हैं तब चकराता विधानसभा में उपचुनाव होगा. ओर प्रीतम सिंह चकराता से ही विधायक हैं. ऐसे में भाजपा को यहां से भी एक योग्य कैंडिडेट की दरकार होगी और भाजपा की नेत्री ओर नेता यहां से भी संभावनाएं तलाश रहे हैं।
वहीं अगर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह बाजी मारते हैं तो कांग्रेस भी अपने लोकसभा सांसद के काम का बोझ कुछ कम जरूर करेगी
ऐसे में प्रीतम सिंह के
पार्टी के अंदर ही राजनीतिक विरोधी अब प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा करने की सोच रहे है।
तो एक धड़ा वो भी है जो कहता है कि प्रीतम जीते या हारे प्रीतम को अब प्रदेश अध्य्क्ष पद से हटवाना है।
हा नैनीताल लोकसभा सीट वो सीट है जहा से हरीश रावत ओर अजय भट्ट मैदान मे है और देहरादून से बैठ कर राजनीति करने वाले भाजपा और कांग्रेस के ताकतवर नेता यही दुआ माँगे की अजय भट्ट ही जीत जाए तो कांग्रेस के कुछ अपने भी यहीं बोले कि अजय भट्ट को ही जितना चाहिए।
वजह साफ
है अगर अजय भट्ट जीत गए तो
प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खाली होती है भाजपा के नेता के लिए।
ओर आने वाले समय में राज्य सभा सीट पर अजय भट्ट का दावा भी खत्म हो जाएगा।
दूसरी तरफ यदि हरीश रावत हार गए तो उनके अपनी कांग्रेस के विरोधी नेता को मौका मिल जाएगा हरीश रावत को उत्तखण्ड से निपटाने का ।
बहराल हर कोई सही मौका लपक लेना और फिर हालातों को अपने अनुकूल कर लेने की कोशिश में अभी से जुट गया है
बहराल परिणाम तो 23 मई के दिन आयेगे पर ये तय है कि इन परिणाम आने के बाद उत्तराखंड की सियासत में पक्ष से लेकर विपक्ष तक साल 2022 के लिए कुछ बदलाव जरूर दिखेगे।



