
मुख्यमंत्री रावत ने चंडीगढ़ में ‘‘नशे के खिलाफ संयुक्त रणनीति’’ पर आयोजित सम्मेलन में प्रतिभाग किया।
पंजाब व हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने भी सम्मेलन में शिरकत की।
सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने चंडीगढ़ में ‘‘नशे के खिलाफ संयुक्त रणनीति’’ पर आयोजित सम्मेलन में प्रतिभाग किया। हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित संयुक्त सम्मेलन में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह व हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित संबंधित राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। सम्मेलन ड्रग्स की समस्या व इससे संयुक्त रूप से लड़ने के लिए रणनीति बनाने पर विस्तार से विचार विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार नशे के खिलाफ लड़ाई में सहयोग के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है। ड्रग्स की समस्या एक-दो राज्यों की समस्या नहीं है। इससे प्रभावी तौर पर निपटने के लिए सभी संबंधित राज्यों को मिलकर रणनीति बनानी होगी। विशेष तौर पर पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश को मिलकर काम करना होगा। इन राज्यों की पुलिस में बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा। मुख्यमंत्री ने खुफिया तंत्र को मजबूत करते हुए एक-दूसरे से सूचनाओं को साझा किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही चिंताजनक है कि हमारे युवा नशे के जाल में फंसते जा रहे हैं। अपने युवाओं को ड्रग्स माफिया से बचाने के लिए फूल प्रूफ प्लान बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा। इसमें शिक्षण संस्थानों पर विशेष नजर रखनी होगी। नशे के खिलाफ लड़ाई में अध्यापकों, अभिभावकों व स्वयं सेवी संस्थाओं को भी साथ लेना होगा। नशा कानूनी समस्या के साथ ही सामाजिक समस्या भी है। नशे की समस्या को जड़ से मिटाने के लिए व्यापक जन जागरूकता बहुत जरूरी है। वही मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने उत्तरकाशी जिले मे हुई मासूम की मौत और दुष्कर्म पर बयान दिया कि पुलिस जल्द से जल्द कभी भी इस पुरे मामले का खुलासा कर देगी और हम दोषियों को कानून के अनुसार सख्त से सख्त सजा दिलाएंगे
तो दुसरी तरफ पूरे उत्तराखंड़ मे उत्तराखंड़ की जनता नाबालिग मासूम के साथ दुष्कर्म करने वाले ओर फिर उसकी हत्या करने वालो को फाँसी की माग करती रही जगह जगह धरने दिए गए तो पहाड़ मे रेलिया निकाली गयी
देहरादून में जिलाधिकारी को ज्ञापन दिए गए माँ गंगोत्री मे एक बजे तक नदी के घाटो पर पूजा तक नही की गई बाज़र बंद रहे। माग सबकी एक ही है कि मासूम के दोषियों को फाँसी की सज़ा दी जाए वही ख़बर ये भी है कि पुलिस ने जिनको पकड़ा है वो अपराध को स्वीकार नही कर रहे है
जिसके बाद पुलिस इस पूरे मामले को नए सिरे से भी जांच कर रही है लेकिन सवाल यही है कि आखिर कोन है मासूम के हत्यारे जिनका अभी तक नाम निकलकर नही आया है । 








