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कोरोना संक्रमण के नए मामलों में लगातार आ रही कमी और कोविड कर्फ्यू में मिली छूट के बाद अब पहाड़ी रूटों की परिवहन सेवा फिर से पटरी पर आने लगी है। ऋषिकेश से टिहरी और उत्तरकाशी जनपद के लिए विभिन्न रूटों पर 17 बस सेवाओं का संचालन शुरू हो गया है। धीरे-धीरे अब यात्रियों की संख्या बढ़ने लगी है। परिवहन कारोबार के दोबारा गति पकड़ने से कारोबारी भी उत्साहित हैं।

मालूम हो कि बसों में 50 प्रतिशत सवारी का नियम लागू होने से नाराज परिवहन कारोबारी पर्वतीय रूटों पर वाहनों का संचालन नहीं कर रहे थे। इसके बाद राज्य सरकार ने 50 प्रतिशत सवारी की बाध्यता खत्म करने की घोषणा की थी। वाहनों का संचालन ठप होने के कई दिनों बाद 14 जून से पर्वतीय रूटों पर सवारियों के अनुरूप बसों का संचालन शुरू किया गया था।

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शुरूआत में टिहरी और उत्तरकाशी जनपद के रूटों पर मात्र दो-तीन बस सेवाएं आरंभ की गई। पर्वतीय रूट पर बसों के संचालन को मंगलवार को 16 दिन हो गए। अब लगभग 50 प्रतिशत बसें पहाड़ के विभिन्न रूटों पर दौड़ने लगी हैं। टीजीएमओ के अध्यक्ष जितेन्द्र नेगी ने बताया कि उत्तरकाशी के साथ ही टिहरी जनपद के घनसाली, लंबगांव, पिपरी, चंबा, नरेंद्रनगर रूट पर नियमित 34 से अधिक बस सेवाएं हैं। इनमें से वर्तमान में 17 बस सेवाएं शुरू कर दी गई हैं। हालांकि रुद्रप्रयाग और गोपेश्वर रूट पर सवारियों की कमी के चलते अभी दो-तीन बस सेवाएं ही शुरू हो सकी हैं। जल्द परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से सुचारु होने की उम्मीद है।

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यातायात सहकारी संघ अध्यक्ष मनोज ध्यानी ने बताया कि फिलहाल बाहरी राज्यों की बसों का उत्तराखंड में प्रवेश बंद है। रोडवेज की बसें भी बाहरी राज्यों में नहीं जा रही है। उत्तराखंड रोडवेज की बसें उत्तरप्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा में चलने के बाद पर्वतीय रूट पर सवारियों की संख्या और बढ़ेगी। धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।

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