
उत्तराखंड भाजपा से बड़ी खबर : मदन कौशिक देगे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा! या फिर भाजपा भी बनाएगी गढ़वाल से कार्यकारी अध्यक्ष पूरी ख़बर
उत्तराखंड को बीजेपी आलाकमान ने स्याद एक्सपेरिमेंट की लैबोरेट्री बना कर रख दिया है क्योकि लगता कुछ ऐसा ही है 5 महीने में दो मुख्यमंत्री बदलकर पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया गया है
ओर अब प्रदेश अध्यक्ष को भी बदलने का हल्ला बीजेपी में शुरू हो गया है
आपको बता दे कि जब भी उत्तराखंड में बीएल संतोष आते है तब तब उत्तराखंड में किसी ना किसी का बदलाव हो ही जाता है
प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मदन कौशिक जो मैदान से आते हैं और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो कुमाऊँ से आते हैं ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा था कि गढ़वाल के नेतृत्व की अनदेखी के बात उठेगी और वैसा हुआ भी बुधवार को जब संघ और बीजेपी के बीच समन्वय बैठक हुई तो और उसके बाद देर रात तक बैठक चलती रही तो इस बात की चर्चा हुई की सूत्र बातते है कि गढ़वाल के विधायक नाराज हैं विधायकों ने अपनी नाराजगी जताते हुए यह भी कहा कि अगर गढ़वाल की उपेक्षा हुई तो पार्टी को चुनाव में नुकसान हो सकता है
काऱण ये बताया गया है कि कांग्रेस ने गढ़वाल से अपने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में गणेश गोदियाल को जिम्मेदारी सौंपी है उसके बाद से गढ़वाल में इस बात को लेकर बीजेपी के नेताओं ने उपेक्षा का गाना गाना शुरू कर दिया सूत्र बताते हैं विधायकों की नाराजगी की बात इतनी उठी कि कल यह लगभग तय हो गया था की प्रदेश अध्यक्ष के पद से मदन कौशिक को हटाकर गढ़वाल से महेंद्र भट्ट को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी जाए
लेकिन फिर मदन कौशिक पार्टी के संभावित फैसले को टालने में कामयाब हो गए ऐसा कहा जा रहा है

अब कहा ये जा रहा है कि यदि मदन कौशिक को नहीं हटाया जाएगा तो
कांग्रेस की तरह ही भाजपा भी उत्तराखंड में कार्यकारी अध्यक्ष का फार्मूला अपना सकती है उम्मीद यह है कि गढ़वाल से महेंद्र भट्ट को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी पार्टी सौंप सकती है ।
सूत्र कहते है कि लेकिन अभी पार्टी के अंदर और बीएल संतोष जो राष्ट्रीय संगठन महामंत्री हैं उन तक ही यह बात चल रही है
ओर इस बारे में अभी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी बातचीत होगी उसके बाद ही यह तय हो पाएगा कि भाजपा की आगे की रणनीति क्या है
बहराल इतना तय है हरीश रावत की कार्यकारी अध्यक्ष की रणनीति ने भाजपा में खलबली मचा दी है
वैसे बीजेपी में कुछ भी तय हो सकता है लेकिन अंतिम समय तक विश्वास नहीं किया जा सकता जब तक इसकी घोषणा पक्के तौर पर ना हो जाए
इसलिए पिक्चर अभी पूरी तरह से साफ नही है लेकिन एक हफ्ते के अंदर पूरी तरह साफ हो जायेगी





