
राज्य की पाँचो लोकसभा सीट पर चुनावी प्रचार अपने परवान पर है ।और सबसे अधिक हाट सीट अब नैनीताल लोकसभा सीट को माने जाने लगा है क्योंकि यह भाजपा से अजय भट्ट और कांग्रेस से हरीश रावत मैदान मे ये चुनाव दोनों ही नेताओ की साख का सवाल है ।
पिछले विधानसभा चुनाव मे इन दोनों ही नेताओ को जनता ने विधानसभा नही पहुचाया था और इन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।

वही अब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नैनीताल संसदीय सीट के प्रत्याशी हरीश रावत ने अपने प्रचार के दौरान भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को ‘मैं उज्याड़ खानी बल्द यानी कि (खेत में खड़ी फसल को चरने वाला बैल) बताया तो कोश्यारी ने हरीश रावत को ‘यकलू बानर’ मतलब (झुंड से अलग हटकर रहने वाला अकेला बंदर) करार दे दिया है।
आपको बता दें कि इससे पहले 24 मार्च को नैनीताल रोड स्थित भाजपा के चुनाव कार्यालय के उद्घाटन पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने ‘हरदा’ को ‘हारदा’ कहकर निशाना साधा था। जिसके बाद हरीश रावत ने भी कोश्यारी को ‘उज्याड़ खानी बल्द’ बोल डाला ।
हरीश रावत के अनुसार भगत सिंह कोस्यारी वे बेल है जो जहां हरी भरी फसल देखता है, वहां मुंह मारने चल पड़ता है
वही दूसरी ओर भगत सिंह कोस्यारी के अनुसार हरीश रावत वे अकेला बंदर है जो अपने झुंड से दूर ही रहता है और सामान्य रूप से अन्य बंदरों की तुलना में अधिक कटखना माना जाता है। बहराल दोनों ही नेता एक-एक बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और पहाड़ की लोक संस्कृति में रचे बसे हैं। ऐसे मे दोनों अपने अपने अंदाज में एक दूसरे पर शब्दो से प्रहार कर रहे है ।पर राजनीति के चाणक्य कहते है कि भगत दा के इन बयानों से हरीश रावत को ओर सुर्खिया मिल रही है। चुनाव भगत सिंह कोस्यारी नही बल्कि अजय भट्ट लड़ रहे है ऐसे मे भगत सिंह कोश्यारी को केंद्र की योजनाओं को जनता के बीच रख कर पीएम मोदी का जिक्र कर अजय भट्ट के लिए वोट मांगने चाहिए ।इस तरह की बयान बाज़ी से फायद कम ही होता है।
जहा हरीश रावत पूरा चुनाव खुद पर फ़ोकस कर लड़ रहे है वे अपने मुख्य मंत्री के समय किये गए कार्यो को जनता के बीच रख रहे है पहाड़ के उत्पादों से लेकर संस्कृति तक कि बात कह रहे है वही अजय भट्ट केंद्र और राज्य सरकार के विकास के काम काज को लेकर जनता के बीच है।






