
हरीश रावत कांग्रेस के कालनेमि और
रावण,भगवान राम का अस्तित्व न मानने वाली कांग्रेस सरकारें: बंशी धर भगत
देहरादून , 19
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशी धर भगत ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा उन पर की गई टिप्पणी का उत्तर देते हुए कहा है कि सच कड़वा होने से हरीश रावत बौखला गए हैं । उनका कहना है कि हरीश रावत कांग्रेस के कालनेमि और
रावण,भगवान राम का अस्तित्व न मानने वाली कांग्रेस सरकारें हैं.
भगत ने रावत को खुला पत्र भी भेजा है :

जिसमें लिखा है कि
प्रिय हरीश रावत जी
शायद आपको मेरी बात थोड़ी कड़वी लगी हो, परन्तु मैं आपको बताना चाहता हूँ कि “सच कड़वा होता है” और आप की बौखलाहट इसका परिणाम है ।।
लेकिन आपने बिल्कुल ठीक कहा कि मैं रामलीला में दशरथ का पाठ खेलता हूँ अगर आपने रामलीला देखी होगी तो आपको राजा दशरथ का एक वक्तव्य याद होगा “हम नहिं बोले झूठ, पलट जाए चाहे जमीं सारी”।।
मुझे गर्व है कि हम इस सनातनी परंपरा का निर्वहन सार्वजनिक जीवन में भी कर रहे हैं, हम तो भगवान श्री राम चंद्र जी के भक्त हैं और पूरी दुनिया ने भी यह देख लिया कि अयोध्या की पावन राम जन्म भूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है, रावण रूपी हम नहीं ।वे तो कांग्रेसी नेता व उनकी सरकारें रही हैं, जिन्होंने भगवान श्री राम चंद्र जी के काल्पनिक होने का दावा किया था ।।
आप कांग्रेस के वे कालनेमि हैं जिसे हनुमान जी का रास्ता रोकने के लिए कांग्रेस रूपी रावण ने भेजा है। मगर आपको ये याद तो होगा ही कि कालनेमि हनुमान जी के हाथों मात खाता है। उसी तरह 2022 में भी ये हनुमान रूपी जनता आप जैसे कालनेमि को फिर से परास्त करेगी।
उत्तराखंड आंदोलन के समय में मुलायम सिंह जी से आपकी दोस्ती जग ज़ाहिर है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने पर कांग्रेस ने कितने घोटाले किए सब भली भांति जानते हैं।
मान्यवर, आप जनता को जवाब दें कि उत्तराखंड का विशेष पैकेज एवं विशेष राज्य का दर्जा जब केंद्र में आपकी सरकार समाप्त कर रही थी तो आप दिल्ली में धरने पर क्यों नहीं बैठे? आपको धरना देने का बड़ा शौक़ है, तो उस वक़्त आप कैसे भूल गए ??
वैसे आप की धरना राजनीति की एक विशेषता यह भी है कि उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने के लिए आप ने अपने ही मुख्यमंत्रियों की जड़ों में खूब मट्ठा डाला, आप रायता फैलाने में विशेषज्ञ हैं, लेकिन अब आपके ये सारे खेल दुनिया जान चुकी है और आपकी पार्टी के नेता भी इस वक्त आपके इस रायते से बचने की कोशिशों लगातार दिखते हैं।
जहाँ तक IDPL और HMT का सवाल है, रावत जी भूल गए कि ये दोनों केन्द्र सरकार के प्रतिष्ठान थे जिनकी स्थापना 1961 में हुई थी, लेकिन केंद्र में कांग्रेस सरकारों की नीतियों व ख़राब प्रबंधन के कारण ये लगातार डूबती गई और अंततः बंद हो गई। हम तो हमेशा इनके पुनर्जीवन के पक्ष में रहे।
रावत जी आपमें एक और विशेषता है कि खुद तो कुछ करते नहीं किंतु जब भाजपा सरकार बड़ा काम करती है तो आप तुरंत श्रेय लेने की जुगत में लग जाते हैं, चाहे ऑल वेदर रोड हो या जमरानी बांध का मामला हो। लेकिन यह तो बता दीजिए कि आपने मुख्यमंत्री रहते हुए बिना पैसे स्वीकृत किए जो हज़ारों घोषणाएँ की थी उनका क्या हुआ? कोई एक आध भी पूरी हुई या वह भी नहीं ??
मान्यवर, अब जनता काम व नौटंकी का फ़र्क़ समझती है।






