सीएम से मिलने का वक़्त नहीं मिला, तो यहां हड़ताल का ऐलान

आंदोलन के गर्भ से जन्में प्रदेश में हड़ताल, धरना-प्रदर्शन का मानो चौली दामन का साथ हो। कभी अध्यापकों की हड़ताल, कभी बैंककर्मियों की हड़ताल, कभी संविदाकर्मियों की हड़ताल, कभी उपनलकर्मियों की हड़ताल तो कभी मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ की हड़ताल। जी हां हड़ताल हड़ताल हड़ताल। राज्य में बस ये ही शोर अब सुनाई देता है। जिसके लिए या तो ज़िम्मेदार यहां की सरकारे रही हैं या नौकरशाह या खुद हड़ताल करने वाले। पर नुक्सान हमेशा आम जनमानस को ही उठाना पड़ा है। अब ज़रा सुन लीजिए। राज्य के डॉक्टर अपनी लंबित मांगों की सुनवाई न होने पर 10 अप्रैल से हड़ताल पर चले जाएंगे। तब सिर्फ आपातकालीन सेवा और पोस्टमार्टम की ड्यूटी को छोड़कर सेवाएं बंद रखेंगे।

प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखंड कार्यकारिणी के अध्यक्ष ने कहा कि सीएम वार्ता के लिए समय नहीं दे रहे हैं। ऐसे में हम दफ्तरों का चक्कर नहीं काट सकते। इसलिए अब सीधे होगी हड़ताल। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अभी तक NPA, HRA, हिल अलाउंस, DACP की शर्त और ट्रांसफर एक्ट पर न तो महानिदेशालय ने शासन को कोई प्रस्ताव भेजा और न ही शासन ने संघ से इस विषय पर बात की। लिहाज़ा अब प्रदेशभर के सभी डॉक्टर 10 अप्रैल से हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। हे प्रदेश के मुख्यमंत्री जी आपके प्रदेश के डॉक्टर शायद नाराज़ चल रहे हैं। अब इन्हे मनाना है या नहीं ये तो आपके अधिकारी जाने या आप जाने। हम तो सिर्फ ये जानते हैं कि जब प्रदश का डॉक्टर हड़ताल पर चला जाता है। तो प्रदेश बीमार हो जाता है।

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