
नम आंखों से पत्नी नितिका ने शहीद विभूति को दिया अंतिम सैल्यूट, बोली-I LOVE YOU

आपको बता दे कि पुलवामा में सुरक्षा बल और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में शहीद हुए उत्तराखंड के लाल मेजर विभूति ढौंडियाल की अंतिम विदाई के वक्त हर किसी की आंखों में आंसू थे. अंतिम दर्शन के समय पत्नी नितिका कौल ने शहीद मेजर विभूति की तस्वीर को नमन किया और नम आंखों से पति शहीद मेजर विभूति के पार्थिव शरीर को अंतिम सैल्यूट किया. नितिका ने शहीद पति को नमन करते हुए आई लव यू बोला फिर उनकी आंखे नम हो गई
- वही आज मंगलवार को शहीद मेजर विभूति का पार्थिव शरीर सुबह 8.30 बजे अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर रखा गया था. इस दौरान सबसे पहले सेना के अफसरों ने उनके आवास पर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके बाद सूबे के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे, बीजेपी विधायक गणेश जोशी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने शहीद को श्रद्धांजलि दी.

आपको बता दे कि मौसम खराब होने के बावजूद भी भारी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर शहीद के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे थे. लोगों जहां मेजर विभूति की शहादत पर गर्व महसूस कर रहे थे तो वहीं अपने लाल को खोने के गम में भी डूबे भी थे.
वही आखिर में शहीद की bh पत्नी, मां, दादी और बहनों ने उनके आखिरी दर्शन किए और श्रद्धांजलि दी. अंतिम दर्शन के समय पत्नी ने शहीद की तस्वीर को नमन किया
. इसके बाद शहीद के पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए ले जाया गया ओर. हरिद्वार में मेजर विभूति का
पूरे सम मान के साथ
अंतिम संस्कार किया गया ।
ओर पंचतत्व मे विलीन हो गए हमारे मेजर साहब ।

आपको बता दे कि
मेजर विभूति ढौंडियाल को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। वे दो बार असफल हुए, लेकिन फिर मंजिल तक पहुंच कर ही दम लिया। मेजर बनने के बाद उनका जोश और जुनून दोगुना हो गया था। शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल के दोस्तों ने उनके जुनून की कहानी बयां की।
दोस्त मयंक ने बताया कि वह दोनों बचपन से ही साथ पढ़े। साल 2000 में सेंट जोजेफ्स एकेडमी से 10वीं और 2002 में पाइन हॉल स्कूल से 12वीं पास की। इसके बाद डीएवी से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। इससे पहले कक्षा सात से ही विभूति ने सेना में जाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। सातवीं कक्षा में थे तो राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज(आरआईएमसी) में भर्ती की परीक्षा दी लेकिन चयन नहीं हुआ। वही 12वीं में एनडीए की परीक्षा दी, लेकिन चयन नहीं हुआ। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उनका चयन हो गया और वह ओटीए चेन्नई में प्रशिक्षण हासिल करने गए। यहां से वर्ष 2012 में पासआउट होकर सेना में कमीशन प्राप्त किया। आपको बता दे कि हर छह माह में भारतीय सैन्य अकादमी की परेड और जैंटलमैन कैडेट्स की सुर्खियों से लबरेज समाचार पत्र देखकर भी मेजर विभूति का मन सेना में भर्ती होने का उत्सुक हो जाता था। उनके दोस्तों ने बताया कि आईएमए भी उनके लिए प्रेरणा था।





