उत्तराखंड के इन भवनों पर बन्दर,लंगूर,सांप,बिच्छू व जंगली जानवरो का कब्जा बना हुआ है बल ओर रात्रि में भूतों का आना जाना लगा रहता है!!

रिखणीखाल खबर सार-

कौन लेगा इन वीरान एवं खंडहर हो चुके दो सरकारी भवनों की सुध ?

ये जो दो भवनों के छायाचित्र दिखाई दे रहे हैं,ये रिखणीखाल प्रखंड के सुदूर ग्राम द्वारी में क्षेत्र की छवि को धूमिल कर रहे हैं।ये दोनों भवन लगभग दस से पन्द्रह साल पहले के बने हैं जिसमें स्थानीय ठेकेदार ही निर्माणदायी थे।इनमें से एक भवन ए एन एम केंद्र तथा दूसरा राजस्व उप निरीक्षक(पटवारी) के कार्यालय के नाम से बने थे,लेकिन ये आधे अधूरे ही बन पाये इनमें जो खिड़की,दरवाज़े आदि लगे थे उनको चोर चुराके ले गये है अब सिर्फ ईट,पत्थर ही रहा है।ये भवन अपना गृह प्रवेश समारोह व उद्घाटन भी नहीं देख सका।अब कयी सालों से इन भवनों पर बन्दर,लंगूर,सांप,बिच्छू व जंगली जानवरो का कब्जा बना हुआ है।रात्रि में भूतों का आना जाना लगा रहता है! ।कभी कभार ध्याडी वाले बिहारी,नेपाली मजदूर भी रहते हैं।चारों ओर से झाडियो ने घेर लिया है।

इस सम्बन्ध में स्थानीय वयोवृद्ध समाजसेवी प्रभुपाल सिंह रावत व अन्य लोगों द्वारा कयी बार शासन प्रशासन को आवाज लगायी गयी लेकिन किसी ने सुना नहीं।अभी सात आठ महीने पहले मीडिया भी भवनों के दर्शन करने गया था मामला काफी उछाला गया था लेकिन खबर पढके फिर भूल गये।समय गुजरता गया लेकिन हालत जस की तस है।कयी बार तहसीलदार रिखणीखाल द्वारा मौका मुआयना भी हुआ लेकिन जांच आख्या फाइलों में गुम हो गयी।

समझ में अभी तक नहीं आया कि ये आधे अधूरे क्यों छोड़कर भागे।क्या ये जंगली जानवर व भूतों व मजदूरो के लिए बनाये गये थे?जिस विभाग के लिए बने थे वे किराये के भवनों में रहते हैं।क्यों सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ?

 

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