उत्तराखंड: महिलाओं को मौत के घाट उतारने वाले आदमखोर तेंदुए को शिकारी जॉय हुकिल ने किया ढेर

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लगातार पहाड़ की महिलाओं को निशाना बनाने वाले आदमखोर तेंदुए को ढेर कर दिया गया है। अल्‍मोड़ा जिले के स्याल्दे तहसील में हिमाचल से पहुंचे शिकारी दल ने आदमखोर को मार गिराया। पिछले दिनों इसी तेंदुए ने महिला को शिकार बना लिया था। क्षेत्र में लगातार हमले बढ़ने के बाद इसको आदमखोर घोषित कर दिया गया था। विशेषज्ञ शिकारी ज्वाय हुकिल के साथ ही कुछ और शूटर भी बुलाए गए थे। शूटर का शिकार हुए इस तेंदुए की उम्र करीब 12 साल है।

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17 जनवरी की देर रात शांति देवी (50) पर आदमखोर तेंदुए ने हमला कर दिया था। 20 जनवरी को महिला का शव करीब 300 किमी दूर जंगल से बरामद किया गया था। इसके बाद आदमखोर के शिकार के लिए पद चिन्हों के आधार पर इसको कैद करने के प्रयास तेज कर दिए गए। लेपर्ड कोरिडोर पर मचान तैयार कर घटनास्थल व आसपास के इलाके में तीन पिजड़े लगा दिए गए थे। लेपर्ड कोरीडोर पर इंसानी गतिविधियां बढ़ने पर तेंदुआ सतर्क हो गया था। दो दिन तक इलाके में उसकी धमक न के बराबर हो गई थी। मगर बीते मंगलवार को दोपहर उसने किमबगड़ में लगाए गए पिंजड़े के पास गाय को शिकार बनाने के बाद निचले भूभाग में एक गुफा में डेरा जमा दिया। ग्रामीणों की भीड़ जमा होने पर उसने गुफा छोड़ दी।

रात करीब नौ बजे से शिकारी दल ने मुहिम शुरू की। सर्च लाइट की रोशनी में वह गुफा में नजर आया। इस पर हिमाचल प्रदेश से पहुंचे आशीष दास गुप्ता ने रात करीब 10:45 बजे आदमखोर तेंदुए पर निशाना साधा जो बिल्कुल सही बैठा। आदमखोर तेंदुए के मारे जाने से क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली। 

इससे पहले यह आदमखोर तेंदुआ बीती 26 दिसंबर को ग्राम पंचायत बारंगल के ही तोक डोडियाल बाखल में त्रिलोक सिंह की पत्नी अंजू देवी पर गुलदार झपटा था। उसे लहूलुहान हालत में काशीपुर रेफर किया गया था। इसके बाद 30 दिसंबर को हीरा सिंह की पत्नी कमला देवी, सात जनवरी को जय सिंह की पत्नी तुलसी देवी भी हमले में घायल हो गई थी। मगर चौथे हमले में उसने शांति देवी को शिकार बना डाला था।

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