
आपको बता दे कि
15वें वित्त आयोग की संस्तुति के तहत अब उत्तराखंड की त्रिस्तरीय पंचायतों को 574 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है,
वही आयोग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह धनराशि साल 2020-21 के लिए है।
तो तीनों पंचायतों में बंटवारा भी राज्य वित्त आयोग की संस्तुति के हिसाब से ही होगा।
त्रिवेन्द्र सरकार अपने टैक्स में जो राशि पंचायतों को देती है, उसका भी 35 प्रतिशत जिला पंचायत, 30 प्रतिशत क्षेत्र पंचायत और 35 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को जाता है। ओर यदि इस हिसाब से केंद्र के पैसे का बंटवारा हुआ तो उत्तराखंड की 13 जिला पंचायतों को केंद्रीय अनुदान के रूप में लगभग 200 करोड़ और 95 क्षेत्र पंचायतों को लगभग 172 करोड़ रुपये मिलेंगे।
जानकरीं अनुसार आपको बता दे कि केंद्रीय अनुदान में जिला और क्षेत्र पंचायतों की हिस्सेदारी 14वें वित्त आयोग ने खत्म की थी। ओर इसके विरोध में उत्तराखंड में जगह-जगह प्रदर्शन भी हुए थे और दिल्ली में भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन चला
जिसके चलते क्षेत्र पंचायतों के लिए सरकार को अपने स्तर से अधिक अनुदान देने की व्यवस्था करनी पड़ी थी।
वही ये भी जान ले कि
केंद्रीय अनुदान तीन स्तरों पर बंटने से अब ग्राम पंचायतों का हिस्सा घट गया है।
पहले की स्थिति में इन्हें पूरे 574 करोड़ रुपये मिलते।
अब उत्तराखंड की 7500 से अधिक पंचायतों को केवल 200 करोड़ रुपये मिलेंगे। ऐसे में ग्राम पंचायतों के लिए राज्य सरकार को अपना हिस्सा बढ़ाना होगा।
बता दे कि इन्हें राज्य से 35 प्रतिशत अनुदान मिल रहा है। हिस्सा बढ़ाने का यह काम राज्य वित्त आयोग को करना होगा।
ख़बर है कि अभी नए राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियां नहीं आई हैं और चौथे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियां 2020-21 के लिए लागू हैं। इससे आगे के पांच सालों में अनुदान 15वें वित्त आयोग और राज्य के पांचवें वित्त आयोग की संस्तुतियों पर निर्भर करेेगा।





