
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लिखते है कि
20 सितम्बर को नैनीताल के न्याय के मन्दिर में, मैं न्याय की प्रार्थना के लिये जा रहा हॅू। आप मेरे लिये प्रार्थना करें, कांग्रेसजनों व शुभचिंतकों को नैनीताल आने की आवश्यकता नहीं है। केन्द्र सरकार के उत्पीड़न से हमें लड़ने से कोई नहीं रोकेगा और हमें राजनैतिक उत्पीड़न का लोकतांत्रिक जवाब देना भी चाहिये, मगर उत्पीड़न की कार्यवाही के समय, न्यायिक बहस के समय नहीं। केन्द्रीय सत्ता स्वयं अपराधी है, दल-बदल व निर्वाचित सरकार को बर्खास्त करने के निर्णय, केन्द्रीय सत्ता ने मेरे घर में डांका डाला, माल असबाब लूटा और मुझे ही जेल डालना चाहते हैं। कहीं मैंने हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री की तर्ज पर सार्वजनिक रूप से फरसा लहराते हुये, सर काट डालने की धमकी दी होती, तो मुझे बिना जांच के आज की केन्द्रीय सत्ता फांसी पर चढ़ा देती। हम आह भी भरते हैं, हो जाते हैं बदनाम, वो कत्ल भी करें, तो कहते हैं चर्चा भी ना करें। मेरे प्रकरण में स्पष्टतः लोकतंत्र की हत्या हो रही है और लोकतंत्र की स्वामिनी जनता जनार्दन है, विचार करें।
आपको बता दे कि विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में सीबीआई तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएगी। ये ख़बर भी निकल कर आई थी सीबीआई ने मामले की सुनवाई के दौरान हाईऱ्कोर्ट के न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ के समक्ष यह जानकारी दी थी जिसकी अगली सुनवाई 20 सितंबर को होगी।
इस पूरे मामले के अनुसार साल 2016 में एक निजी चैनल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक स्टिंग दिखाया था।
इस दौरान कांग्रेस के कुछ विधायक भाजपा में शामिल हो गए और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लग गया था। राष्ट्रपति शासन लगाने का मामला पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, फलस्वरूप रावत सरकार बहाल हो गई थी।







