
आपको बता दें कि बृहस्पतिवार की सुबह झबरेड़ा से शुरू हुई पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत गंगा गन्ना यात्रा को लेकर देर शाम हरिद्वार पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरकी पैड़ी चौकी के पास यात्रा को विराम दिया। अंधेरा होने के कारण उन्होंने गंगा पूजन नहीं किया। आज दोपहर को गंगा पूजन के साथ यात्रा का विधिवत समापन होगा। हरकी पैड़ी चौकी के बाहर स्टूल पर खड़े होकर सभा को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने कहा कि बनारस में नरेंद्र मोदी यह कहकर चुनाव लड़ने आए थे कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है।

मां गंगा के आशीर्वाद से वे जीते और प्रधानमंत्री बन गए, लेकिन सत्ता पाते ही उन्होंने मां गंगा को भुला दिया। गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के लिए कोई कदम नहीं उठाया। जुमलेबाजी से पूरी सरकार चलाने वाले मोदी की नमामि गंगे जैसी योजना भी जुमला ही साबित हुई।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में गंगा की उपेक्षा हुई है। इसी तरह मोदी सरकार ने किसानों की भी घोर उपेक्षा की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गन्ने का भुगतान न होने से किसान परेशान हैं। पूर्व सीएम ने कहा कि यदि भाजपा सरकार ने किसानों का गन्ना भुगतान नहीं किया तो वे विधानसभा सत्र के दौरान धरने पर बैठेंगे।
वही उन्होंने सवर्णों को आरक्षण दिए जाने को भी मोदी सरकार का नया जुमला बताया।
हरीश रावत ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में किसान त्रस्त हो चुका है तो श्रमिक परेशान हैं। गंगा के नाम पर करोड़ों का बजट ठिकाने लगाया जा रहा है। गन्ना का बकाया भुगतान किसानों को नहीं मिल पा रहा है। बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 50 लाख पद समाप्त कर रोजगार के अवसर खत्म कर दिए हैं। देश में 26 लाख पद खाली पड़े हैं, बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना 56 इंच का सीना न तो पाकिस्तान को दिखाया और न ही चीन को। दोनों ही देश भारत को आंख दिखा रहे हैं।
उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि डबल इंजन की सरकार बनने पर बेरोजगारी खत्म करेंगे। किसानों का कर्जा माफ करेंगे और किसानों की आमदनी बढ़ाएंगे, लेकिन सभी वादे खोखले साबित हुए हैं। बहराल हरीश रावत की गंगा-गन्ना यात्रा इस ओर इशारा कर रही है कि कांग्रेस हाई कमान जैसे कह चुका है कि हरीश रावत जी हरिद्वार से ही लोकसभा का टिकट आपको मिलेगा आप यही मेहनत करो
जबकी ख़बर ये है कि हरीश रावत नैनीताल लोकसभा से ही मैदान में उतराना चाहते है पर वहा अभी ये तय नही हो पा रहा है कि क्या सच में भगत दा चुनाव नहीं लड़ेंगे।!
दूसरी तरफ भाजपा हर कीमत पर नैनीताल लोकसभा से भगत सिंह कोस्यारी को ही मैदान मे उतरना चाहती है। उस लिहाज़ से अगर भगत दा नैनीताल से चुनाव लड़े भी तो हर दा हमको नही लगता कि फिर भगत दा के विरोध में नैनीताल से चुनाव लड़ेंगे!, कुछ बाते सियासत में बिना बोले समझनी पड़ती है । और स्याद यही कुछ हरीश रावत समझाने की कोशिश कर रहे हो।





