
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की पहाड़ी व्यंजनों लगातार चल रही दावतों से आज कोई अंजान नही ये वो रावत है जो दोनों सीटो से विधानसभा का चुनाव हार गए , ये वो रावत है कि जब ये प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब इनके नेतृत्व मे चुनाव लड़ा गया और कांग्रेस महज 11 सीटो पर आकर थम गई। ये वो रावत है जिनके अपने 9 साथी ने ही 18 मार्च 2016 मै विधानसभा मे जो किया दुनिया ने देखा, ये वो रावत है जिन्होंने दिल में दबाये दर्द को निकलने तक ना दिया
और अब ये वो रावत है जो अपनी सियासी जमीन पुख्ता करने उसे फिर से सींचने के साथ ही कांग्रेस के उन दूसरे गुट को सियासी संदेश देने में भी जुटे हैं। जो हरीश रावत को प्रदेश में निपटाने की ठान चुके है। कोई कुछ भी कहे पर बात सच इतना सब कुछ होने के बाद भी हरीश रावत जनता के बीच है, ओर अपनी हर सियासी चाल से अपने राजनीतिक विरोधियों को जवाब भी देते रहते है हरीश रावत की जगह कोई दूसरा नेता होता तो स्याद दोबारा घर से बाहर ही न निकलता या कह लो मीडिया के सामने ही ना आ पात पर यहा उल्टा है यह तो हरीश रावत जिधर उधर कैमरे खुद किलिक करने लग जाते है
जी हां अब हरदा की ओर से अब 12 जनवरी को देहरादून में भव्य मशरूम पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। आपको बता दे कि काफल, आम, भुट्टा, ककड़ी और पहाड़ी फलों की पार्टी के बाद मकर संक्रांति पर हरीश रावत की ओर से आमंत्रित मेहमान मशरूम के अलावा विभिन्न पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद लेंगे। ये मेहमान दावत में मशरूम से बने पहाड़ी व्यंजन भटवाणी, लाल भात, मूली की टपकिया, मंडुवे की लेसू रोटी का स्वाद लेंगे। देहरादून में 12 जनवरी को एक वेडिंग प्वाइंट में होने वाली इस दावत में मशरूम गर्ल दिव्या रावत और उनके साथियों को सम्मानित करने की योजना है।
राजनीति के चाणक्य हरीश रावत इन दावतों के बीच से ही राजनीतिक ओर सियासी दांव भी खेलेते रहते है दावतों के स्वाद से भरपूर इन आयोजनों से हरीश रावत चर्चा बटोरते रहे हैं। ओर यही है उनका मकसद भी की जनता की नज़रों मे उतराखण्ड मे हरीश रावत नाम ज़िंदा रहे क्योकि इस नाम पर कपड़ा लपेट कर उन्हें ठंडे बस्ते में डालने वाले राजनीतिक विरोधियों की कमी नही जिसे हरीश रावत जानते है ।
बहराल 2018 में दिल्ली से लेकर राज्य के विभिन्न शहरों में पहाड़ी व्यंजनों की दावतें राजनीतिक गलियारों मैं खूब सुर्खियां बनती रही हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हरीश रावत प्रदेश की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का कोई न कोई मौका बना ही लेते हैं। नए साल में उत्तरायणी के पावन पर्व पर मशरूम पार्टी का आयोजन कर हरदा पहाड़ी उत्पादों की वकालत के साथ साथ उन कांग्रेस के साथियों को भी राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने हरीश रावत को पूरा निपटाने की ठान ही रखी है मानो हरीश रावत कह रहे हो अभी मे जिंदा हूँ। हरीश रावत कहते है कि मैं लंबे समय से पहाड़ी खाद्य पदार्थों को जन-जन तक पहुंचाने की मुहिम में जुटा हूं। इससे उत्तराखंड की संस्कृति का भी प्रचार प्रसार हो रहा है। युवा पीढ़ी में भी अपने स्थानीय उत्पादों के प्रति समझ व रुचि बढ़ रही है। सभी को न्योता भेजा जा रहा है। बहराल इस सब के बीच बात ये भी चल रही है कि हरीश रावत एक बार फिर हरिद्वार से लोकसभा चुनाव के मैदान मे उतरेगे या फिर नैनीताल लोकसभा सीट से इसको लेकर खुद हरीश रावत समझ नही पा रहे है कि कहा से माहौल जीत का बनेगा इसलिए इन दोनों सीटों पर बनते बिगड़ते हर समीकरण की हरीश रावत बारीकी से नज़र बनी हुई है। हरीश रावत अगर भांप गए कि हालाता क्या निकलने वाले है तो हरीश रावत चुनाव लड़ने की जगह लड़वाना पसंद करेंगे । क्योंकि सूत्र बोल रहे है कि रावत इस दावत के बहाने अपने उन लोगो से बात करेंगे जो उन्हें हरिद्वार ओर नैनीताल लोकसभा सीट का सही आज का समीकरण बताएंगे ।अब तो 10 फीसदी आरक्षण भी मोदी सरकार ने दे डाला है इसको लेकर भी चर्चा तय है क्योंकि अब हरिद्वार में समीकरण कुछ हद तक बदल जाएंगे।







