
देवभूमि मे डबल इज़न की सरकार है फिर भी ये सब कुछ । क्या इन हालातों को सुधारने मे सरकार कामयाब नही हो पा रही है या फिर अभी समय और लगेगा तो कितना ये सवाल खड़ा होता है ।
अब ये दुखी करने वाली बात ही तो है ना कि यहां एक स्कूल में दो कमरों के अंदर ही प्राइमरी से लेकर हाईस्कूल तक की कक्षाएं चल रही हैं
जी हा उत्तराखंड में चमोली के देवाल ब्लॉक के स्कूल में ऐसा सिर्फ इसलिए क्योंकि बमोटिया जूनियर हाईस्कूल का भवन निर्माण छह साल से लटका पड़ा है। राम जी भला करे । पर ये शिक्षा मंन्त्री क्या कर रहे है।
आपको बता दे कि
स्थिति यह है कि हाईस्कूल प्राथमिक विद्यालय में संचालित किया जा रहा है। यहां दो कमरों में नौ कक्षाएं एक साथ चल रही हैं और 78 बच्चे एक साथ पढ़ते हैं। अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव बमोटिया के लिए वर्ष 2012 में जूनियर हाईस्कूल भवन निर्माण के लिए 17.51 लाख की धनराशि स्वीकृत हुई, लेकिन चयनित भूमि वन विभाग की होने से मामला लटक गया।

आपको बता दे कि स्थिति यह है कि अभी तक वन विभाग की भूमि शिक्षा विभाग के नाम हस्तांतरित नहीं हो पाई है। इसके चलते जूनियर हाईस्कूल प्राइमरी विद्यालय में संचालित किया जा रहा है। बमोटिया के उपप्रधान चंद्र सिंह का कहना है कि यहां प्राइमरी विद्यालय में 40 बच्चे अध्ययनरत हैं, जबकि जूनियर में 16 और आंगनबाड़ी में 22 बच्चे हैं।
यहां न जूनियर हाईस्कूल का भवन है और न ही आंगनबाड़ी केंद्र का। ऐसे में सभी बच्चे प्राइमरी के दो कमरों में पढ़ाई करते हैं। उन्होंने कहा कि भवन नहीं बनने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर उप शिक्षा अधिकारी आरपी अवस्थी ने कहा कि बमोटिया जूनियर हाईस्कूल के लिए वर्ष 2012 में 17.51 लाख रुपये स्वीकृत हुआ था।
वन भूमि पर विद्यालय को बनना है। एसएमसी के माध्यम से भूमि हस्तांतरित की फाइल जिले को भेजी गई है। भूमि हस्तांतरित होने के बाद विद्यालय भवन निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। वन क्षेत्राधिकारी गोपाल सिंह बिष्ट ने बताया कि संबंधित फाइल की पूरी कार्रवाई कर उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है।
बहराल शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय जी आप तो कुछ भला कर दो । अब डबल इंजन की सरकार है मन्त्री जी आपकी फिर भी कुछ मामले लटके हुए है ये दुःख की बात है क्योकि समय अधिक लग रहा है और जनता का विस्वाश कम हो रहा है ख़ास कर पहाड़ी जिलो से अगर बात करे तो निकाय चुनाव में जो निर्दलीय जीत कर आये है ओर उनकी जीत ने बता दिया है कि सरकारी सिस्टम से पहाड़ नाराज हो रहा है।






