मुख्यमंत्री जी अपने ग्रह क्षेत्र की भी सुध ले लो , यहा के लिए भी कोई निवेशक तलाश लो सरकार!

भगवान सिंह कि रिपोर्ट.. 

आपको बता दे कि सतपुली चिकित्सालय में सुविधाओं के लिए अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन कल से शुरू हो चुका है  
ख़बर सतपुली से है मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के गृह क्षेत्र तहसील सतपुली के अंतर्गत संयुक्त चिकित्सालय सतपुली में डॉ मौर्य की स्थायी नियुक्ति सहित पैथोलॉजी लैब,एक्स रे, अल्ट्रसाउंड मशीन प्रसूति गृह इमरजेंसी वार्ड व 108 सेवा उपलब्ध न होने के कारण स्थानीय जनता ने अपना रोष व्यक्त करते हुए आज से अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है ।

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इस आंदोलन को गति देने के लिए गैर राजनैतिक संगठन का निर्माण किया गया जिसका नाम नयारघाटी विकास समिति रखा गया । जिसमे महिपाल सिंह रावत को अध्यक्ष व प्रेम सिंह रावत जी को उपाध्यक्ष व संरक्षक मंडल में थामेश्वेर कुकरेती, प्रताप सिंह,मेहरबान मियां, रणधीर सिंह व अन्य कार्यकारिणी बनायीं गयी । क्षेत्रीय जनता मुख्य बाजार से रैली निकलते हुए जनगीत व मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तहसील परिसर में पहुचे और क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। क्रमिक अनशन के पहले दिन अभिषेक नेगी, थामेश्वर कुकरेती,विकास रावत अनशन पर बैठे । धरना स्थल पर जगदीश बिष्ट,प्रियदर्शन नेगी,अरविन्द रावत, अमन,रविन्द्र सिंह, कृष्णा बौठियाल,डबल मियां,मनीष खुगशाल स्वतंत्र,धर्मेंद्र,पूरण जेरवाण,विजेंद्र सिंह,तोताराम,पुष्पेन्द्र राणा आदि मौजूद रहे। ओर इनकी मागे आज भी जारी है 

तो वही बात अगर रिखणीखाल मे स्वास्थ्य सेवाओ की करे तो
रिखणीखाल क्षेत्र में ही नही अपितु समूचे उत्तराखंड मे स्वास्थ्य विभाग की हालत यह है कि स्वास्थ्य और शिक्षा की वजह से सब से ज्यादा पलायन हुआ है। रिखणीखाल क्षेत्र में एक मात्र 25 बैड के हॉस्पिटल में न कोई डॉक्टर है न दवाई 3 एम्बुलेंस (108) सेवा थी भी उन में विगत 4 महीने से तेल नही है और कर्मचारियों को पगार नही मिला है। चतुर्थश्रेणी के कर्मचारी मरीज का उपचार करते है।
पट्टी पेनों अन्दरगांव में 4 बैड का एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र था जिस के भवन का पुनर्निर्माण का कार्य बिगत 2 साल 5 महीने से चल रहा है। 81 लाख की लागत से यह भवन बन रहा है समय सीमा मात्र 14 महीने थी मगर ठेकेदार व प्रसासन के बीच में मामला ऐसे पिसा कि हॉस्पिटल अगले 4 साल में भी जनता के लिए नही खुल सकता है। ठेकेदार दिल्ली से श्री त्रिपन सिंह चौधरी है क्षेत्र में सरकारी jee श्री जगमोहन सिंह रावत व एक्सेन श्री हितेन कुमार जी है इन सरकारी व्यक्तियों को जब सवाल पूछो तो चुप्पी साध लेते है। पूरे बजट का 75% धन सरकार ठेकेदार को दे चुकी हैं मगर किसी के पास कोई सवाल नही कि कार्य क्यों नही पूरा हुआ। सम्बंधित अधिकारी ने कैसे ठेकेदार के पेमेंट वाऊचर पर दस्तख़त कर दिए यह भी गम्भीर सवाल है। 
जब यह शिकायत बिगत वर्ष मैंने hnn समाचार चैनल व प्रिंट मीडिया के माध्यम से देहरादून स्वास्थ्य विभाग से लगाई तो जांच टीम गठित हुई मगर क्षेत्र में गए अधिकारी रिखणीखाल से नीचे नही उतरी धरातल पर कोई भी अधिकारी कार्य देखने नही गया।

सामाजिक कार्यकर्ता श्री अदार सिंह गुसाई ग्राम अन्दरगांव ने जब विभाग से rti के माध्यम से हॉस्पिटल का ब्लूप्रिंट मांगा तो पता चला कि हॉस्पिटल के लिए बजरी हरिद्वार ज्वालापुर से आना था मगर ठेकेदार बजरी रेता ककर गाढ़ नदी का लगा रहा है। बिजली विभाग की अनुमति के बिना ठेकेदार बिजली इंस्तेमाल कर रहा है। बिना वन भिभाग की अनुमति के हॉस्पिटल परिसर में स्थित 60 साल पुराने 3 लिप्टिस के पेड़ काट दिए गए है।

 

श्री अदार सिंह जी ने जब दुबारा विभाग से जांच के आदेश दिए तो एक्सेन श्री हितेन कुमार ने तुरंत कार्य पर रोक लगाई मग़र जांच के बाद कोई सूचना नही है कि हॉस्पिटल कब कैसे शूरु होगा। मुझे फोन पर हितेन जी ने आस्वासन दिया था कि हॉस्पिटल 2 महीने में जनता के लिए खुल जायेगा मगर आज इस बात को भी 4 महीने हो गए है। हॉस्पिटल न होने की वजह से क्षेत्र में 9 मौतें हो चुकी है एक मात्र सहारा अन्दरगांव (बडियार गाँव) हॉस्पिटल भी बंद हो जाने की वजह से क्षेत्र वालों के पास 85km दूर कोटद्वार का रुख करना मजबूरी हो चुका है। विभाग व सरकार से अनुरोध है क्यों अनैच्छिक पलायन की ओर धकेल रहे हो हम लोगों को।

देवेश आदमी की कलम से

बहराल पहाड़ अपनी आवाज़ अब सरकार के कानों तक पहुँचा रहा है और जो दर्द सबसे जायदा नज़र आता है पहाड़ का वो है स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तरसना, उच्च ओर अच्छी गुडवत्ता की शिक्षा पहाड़ में । अगर इन दोनों विभागों के कामो पर सरकार पूरा दम खम डबल इंजन का दिखा कर काम करे तो पहाड़ के लोगो की बोलता उत्तराखंड समझता है कि 50 फ़ीसदी समस्या का हल हो जाये। उदारण है जब पहाड़ में अछी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिल जाएगी फिर पहाड़ का निवासी अपने परिवार को किराए पर देहरादून , दिल्ली और अन्य राज्य और अलग अलग सिटी में नही रखेगा । भले ही वो रोजगार के लिए अन्य जगह हो पर अपने परिवार का पहाड़ मे ही लालन पालन करेगा ।
उदारण बहुत है पर कास सरकार समझ जाएं तो बात बन जाये कि पहले इन विभागों पर ही हो फोकस।

अब देखना  ये होगा कि मुख्यमंन्त्री त्रिवेन्द्र रावत कब तक पहाड़ के दर्द को दूर करते है।

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