
बोलता है उत्तराखंड दिल रोता है बार बार
आज उत्तराखंड की स्थाई राजधानी देहरादून में इंदिरा कॉलोनी में जमींदोज हुए मकान
जल्द ही एक या दो दिन में किलकारियां गूंजने वाली थी।
लेकिन।समय को कुछ और ही मंजूर था इस समय ने ऐसी करवट ली कि चंद सेकेंड में यहा मातम पसर गया। ओर
नींद में ही अकाल मौत ने चार जिंदगियों पर झपटा मार दिया। जी हां अपने पहले बच्चे आने की उम्मीद में समीर और किरन तमाम तैयारियों में जुटे थे। लेकिन, किसे पता था कि समीर के घर मे खुशी आने से पहले ही ये दर्दनाक हादसा हो जाएगा
बता दे कि भाई समीर और किरन भाभी की शादी को अभी अप्रैल में ही एक साल हुआ था। ओर किरन का गर्भकाल पूरा हो गया था। जानकरी अनुसार जल्द ही एक-दो दिन में किरण मां बनने वाली थी। समीर भले ही दिहाड़ी मजदूरी करता है लेकिन बकौल समीर वह पत्नी की सारी जरूरतों का ध्यान रखता था। उसका ध्यान रखने के लिए उसने मंगलवार को बहन को भी बुला लिया था। लेकिन, समीर को क्या पता था कि किरन और उसकी आने वाली संतान के साथ क्या होने वाला है? दुःखद है
बोलता उत्तराखंड घटना स्थल पर आधी रात से ही आज सुबह 11 बजे तक मौजूद था
ओर इस दर्दनाक हादसे का मंजर
अपने कैमरे से देख रहा था
तो आंखों भी उस दौरान नम थी हमारी
उफ्फ ऐसा लग रहा था कि
यहा मौत अपने शिकार को चुनने के लिए आई हो
ओर एक एक ही मकान में आसपास सोए छह लोगों में से चार लोगों की जान को अपने साथ ले गई । बाकी दो की बच गई। दरअसल,
जानकारी यही है कि विरेंद्र के कमरे में उनकी पत्नी विमला, बेटा कृष और बेटी सृष्टि एक साथ एक बेड पर सोए थे। लेकिन, हादसे में केवल कृष बच पाया दुःखद है

ओर इसी तरह दूसरे हिस्से में समीर का परिवार था। एक बेड पर समीर और किरन सोए थे और बगल के रसोई वाले कमरे में प्रमिला। फिर मकान गिरा तो प्रमिला और किरन की जान गई। जबकि, समीर को न के बराबर चोटें आईं।
वही जानकरीं अनुसार
कुछ लोगों ने समीर को बताया था कि पुश्ते पर दरारें आई थीं।
ओर दो दिन पहले उसके बारे में सब बातें कर रहे थे। लेकिन, समीर को क्या पता था कि ये उसके परिवार की मौत की वजह यही बनेंगी। समीर को भी इस बात का बेहद दुख है कि शायद इसमें पहले कोई कुछ कर लेता तो आज दोनों परिवार बच जाते।

बहराल स्थानीय लोग
सिस्टम को कोस रहे है उनकी माने तो वे लोग कही बार प्रशास न से शिकायत कर चुके है पर उनकी किसी ने नही सुनी
अगर उनकी बात पर अमल किया जाता तो स्याद लोगो की जान समय पर बचाई जा सकती थी
दुःखद
है
वही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस दर्दनाक घटना पर बेहद दुख जताया , ओर सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी से इस घटना की पूरी रिपोर्ट मांगी है





