माणा गांव में पुष्कर कुंभ का धूम, तीन दिन में पहुंचे हजारों श्रद्धालु, चाक चौबंद व्यवस्थाएं –  

माणा गांव में पुष्कर कुंभ का धूम, तीन दिन में पहुंचे हजारों श्रद्धालु, चाक चौबंद व्यवस्थाएं –

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चमोली: पर्यटन गांव मणि भद्रपुर माणा में अलकनन्दा नदी और सरस्वती नदी के पावन संगम तट पर स्थित पवित्र केशव प्रयाग में इन दिनों दक्षिण भारत के श्रद्धालुओं का विशेष पुष्कर कुंभ का दिव्य स्नान चल रहा है. जिसमें दक्षिण भारत क्षेत्र से प्रति दिन हजारों श्रद्धालुओं की आमद हो रही है. संगम तट पर आस्था का जन सैलाब उमड़ा हुआ नजर आ रहा है.

पुष्कर कुंभ को लेकर जिला प्रशासन ने भी तैयारियों पर पूरी ताकत झोंक दी है. शुक्रवार को सरस्वती व अलकनन्दा संगम तट केशव प्रयाग पर देश के दक्षिणी भारत क्षेत्र के विभिन प्रांतों से आए करीब 10 हजार तीर्थ यात्रियों ने केशव प्रयाग माणा पहुंच कर पवित्र सरस्वती गंगा में आस्था की डुबकी लगाई. अपने पूर्वजों के निमित पूजा श्राद्ध तर्पण पिंड दान तर्पण आदि दिया. मणि भद्रपुर माणा के पुष्कर कुंभ में भीड़ का आलम ये है कि माणा टैक्सी स्टैंड से लेकर केशव प्रयाग संगम तट तक पूरा आस्था पथ श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ नजर आ रहा है.

एसडीआरएफ पुलिस के जवान भी संगम तट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पैदल पथ पर आवाजाही में काफी मददगार साबित हो रहे हैं. माणा क्षेत्र में भीम पुल से लेकर ब्यास गुफा, गणेश गुफा क्षेत्र ओर देश की पहली चाय की दुकानों पर भी काफी रौनक नजर आ रही है. जिला प्रशासन ने कुंभ क्षेत्र में व्यवस्थाओं को दुरस्त किया है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गए हैं.

डीएम चमोली संदीप तिवारी ने बताया आस्था के इस पर्व पुष्कर कुंभ को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सभी सुविधाएं की हैं. श्रद्धालुओं के लिए डॉक्टरों की एक स्पेशल टीम भी माणा केशव प्रयाग में तैनाद कर दी गई है. उन्होंने बताया तहसील प्रशासन को पुष्कर कुंभ के आयोजन को लेकर व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं.

चमोली जिले की सीमा पर स्थित गांव माणा में 12 वर्ष बाद पुष्कर कुंभ का आयोजन किया जा रहा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब 12 वर्ष में बृहस्पति ग्रह मिथुन राशि में प्रवेश करता है, तो माणा गांव स्थित अलकनंदा और सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित केशव प्रयाग में पुष्कर कुंभ का आयोजन किया जाता है. इस आयोजन में मुख्य रुप से दक्षिण भारत के वैष्णव मतावलम्बी प्रतिभाग करते हैं. हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,माणा गांव के पास स्थित केशव प्रयाग में महर्षि वेदव्यास ने तपस्या करते हुए हिन्दू धर्म के पौराणिक ग्रंथ महाभारत की रचना की थी. यह भी कहा जाता है कि दक्षिण भारत के महान आचार्य रामानुजाचार्य और माध्वाचार्य ने इसी स्थान पर मां सरस्वती से ज्ञान प्राप्त किया था. जिसके चलते अपनी पौराणिक परंपराओं के संरक्षण के लिए बदरीनाथ धाम के समीप स्थित माणा गांव पहुंच कर केशव प्रयाग में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं.

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