अंकिता के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने का आरोप

 

अंकिता के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने का आरोप

pinup pin up pin up pinup

 

 

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर विपक्ष द्वारा बार-बार सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन तथ्य बताते हैं कि इस पूरे प्रकरण में राज्य सरकार ने न केवल त्वरित और कठोर कार्रवाई की, बल्कि पीड़ित परिवार के साथ हर स्तर पर खड़े होकर संवेदनशील और जिम्मेदार शासन का परिचय दिया।
👉 सख्त कार्रवाई का नतीजा: तीनों आरोपी आज भी जेल में
सरकार की मजबूत पैरवी और सख्त रुख का ही परिणाम है कि इस जघन्य हत्याकांड के तीनों मुख्य आरोपी — पुलकित आर्य, अंकित और सौरभ — आज भी सलाखों के पीछे हैं। किसी भी आरोपी को न तो राजनीतिक संरक्षण मिला और न ही कानून से बचने का मौका। यह साफ दर्शाता है कि सरकार ने शुरुआत से ही “न्याय पहले” की नीति अपनाई।
👉 पीड़ित परिवार के कहने पर बदला गया वकील
अंकिता के माता-पिता की भावनाओं और आशंकाओं का सम्मान करते हुए सरकार ने उनकी मांग पर सरकारी पक्ष का वकील बदला। यह कदम इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने कभी भी परिवार की बात को नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि हर निर्णय में उनकी सहमति और संतुष्टि को प्राथमिकता दी।
👉 25 लाख से अधिक की आर्थिक सहायता
सरकार ने अंकिता के माता-पिता को 25 लाख रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की, ताकि परिवार को कठिन समय में सहारा मिल सके। यह सहायता केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि पीड़ा में साझेदारी का प्रतीक थी।
👉 शिक्षा के क्षेत्र में अमर हुई अंकिता
सरकार ने श्रीनगर स्थित डोभ कॉलेज का नाम बदलकर “अंकिता भंडारी कॉलेज” रखा। यह निर्णय बताता है कि सरकार ने अंकिता की स्मृति को केवल नारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे स्थायी सम्मान दिया।
👉 सीबीआई जांच की मांग भी मानी गई
जब अंकिता के माता-पिता ने सीबीआई जांच की मांग रखी, तो मुख्यमंत्री ने बिना देरी किए उस मांग को स्वीकार किया। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिससे यह साफ हो गया कि सरकार को अपनी कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है।
👉 अब हो रही है सिर्फ राजनीति
इन तमाम तथ्यों के बावजूद आज जो माहौल बनाया जा रहा है, वह न्याय के लिए नहीं बल्कि राजनीति के लिए है। कांग्रेस, सीपीआई, सपा सहित अन्य विपक्षी दल इस संवेदनशील मामले को चुनावी हथियार बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे हैं। आरोप है कि विपक्ष अंकिता के माता-पिता को भावनात्मक रूप से भड़का कर सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है।
👉 महापंचायत में जनता ने नकारा राजनीतिक ड्रामा
देहरादून के परेड ग्राउंड में बुलाई गई तथाकथित “महापंचायत” में भीड़ न जुटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जनता सच्चाई समझ चुकी है। जनता ने संवेदनशील मामले पर राजनीति करने वालों को मौन जवाब दिया है।
निष्कर्ष साफ है—
सरकार ने जो किया, वह कानून, संवेदना और न्याय के दायरे में किया। अब जो शोर मचाया जा रहा है, वह न्याय के लिए नहीं बल्कि सरकार को बदनाम करने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश भर है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here