
वही पुलवामा में आत्मघाती हमले में शहीद उत्तराखण्ड के विरेंद्र सिंह के पिता दीवान सिंह को बेटे की शहादत पर गर्व है। अपने बेटे को याद करते-करते उनकी आंखें कभी डबडबा कर छलक पड़तीं तो कभी भिंचे ओठ पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश दर्शाते हैं।
आतंकियों की कायराना हरकत पर दीवान सिंह ने कहा कि ‘आतंकी देश से बदलो लेना चाहिए। मेरा देश इन हमलों का बदला जरूर ले ।वही शहीद के बड़े भाई जयराम सिंह और राजेंद्र भाई की शहादत से सदमे में
आपको बता दे कि सीआरपीएफ के जवान विरेंद्र की शहादत की खबर जिसे भी मिली,
वह उनके घर की ओर चल पड़ा। विरेंद्र की बेसुध पत्नी रेनू और अन्य परिजनों को ढाढ़स बधाते हुए हर एक आंख नम हो गईं। सभी की जुबां पर सिर्फ यही बात थी कि आखिर कब तक हमारे बच्चों का खून इसी तरह बहता रहेगा।
आखिर कब आतंकियों, उनके आकाओं को माकूल जवाब मिलेगा। थरूवाटी भाषा में महिलाएं यही कहती दिखीं कि ‘नाश जाय, पाक को नाश कैसे होवेगो।’ पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में खटीमा के मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी विरेंद्र सिंह राणा (36) क्षेत्र के मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी दीवान सिंह (80) के पांच बेटों और बेटियों में सबसे छोटे थे। उनकी माता सावित्री देवी का सात वर्ष पूर्व निधन हो चुका है।
बड़े भाई जयराम सिंह वर्ष 2017 में बीएसएफ से सेवानिवृत्त हैं, जबकि मझले भाई राजेंद्र सिंह खेती करते हैं। पिता दीवान सिंह विरेंद्र के परिवार के साथ ही रहते थे। विरेंद्र सिंह वर्ष 2004 में रामपुर से सीआरपीएफ बटालियन 45 में भर्ती हुए। एक वर्ष पहले ही उनकी पोस्टिंग कश्मीर में हुई थी। वह बीती 23 जनवरी को छुट्टी पर घर आए थे और दो दिन पहले (12 फरवरी) ही ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे। तब किसी को क्या पता था कि विरेंद्र को सभी आखिरी बार देख रहे हैं।

विरेंद्र की शहादत की सूचना मिलते ही उनकी पत्नी रेनू (26), उनकी भाभियां और दोनों बहनें रित्छा और पुष्पा बेसुध हो गईं। विरेंद्र के दो मासूम बच्चे बड़ी बेटी रोही (4) और ढाई वर्षीय पुत्र बयान सिंह हैं। बेटी रोही ब्राइट एकेडमी प्रतापपुर में कक्षा एक में पढ़ती है।

वही शहीद के मासूम बच्चों रोही और बयान नहीं जानते कि उनके घर पर लोग क्यों एकत्र हुए हैं और मम्मी और बाबा के अलावा सभी लोग रो क्यों रहे हैं।
पुलवामा में सी आर पी एफ पर आतंकी हमले में शहके सैनिकों के परिजनों को मुख्यमंत्री ने की 25 लाख रूपए देने की घोषणा
दुःख की इस घड़ी में हम सब शहीदों के परिजनों के साथ हैः मुख्यमंत्री।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुलवामा में आतंकियों द्वारा सी.आर.पी.एफ. काफिले पर किए हमले में शहीद उत्तराखण्ड के सैनिकों के परिजनों को 25 लाख रूपए दिए जाने की घोषणा की है। उन्होंने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि इस कायराना हरकत का करारा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुःख की इस घड़ी में हमसब शहीदों के परिजनों के साथ है।
इस घटना की जितनी निंदा की जाए, उतनी कम है। पूरा देश इन शहीदों की शहादत के प्रति नतमस्तक है और अपनी सेना, अपने अर्धसैन्य बलों व पुलिस के साथ पूरी तरह खड़ा है।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाईं जारी रहेगी। पुलवामा की घटना का हमारे वीर जवान करारा जवाब देंगे। मुख्यमंत्री ने फिर से दोहराया है कि देश में जब भी कोई संकट आता है ऐसे समय में हम सब एक रहते हैं। हम सबकी भावना भी एक ही रहती है। शहीदों के सम्मान में राज्य सरकार द्वारा सैन्य व अर्द्धसैनिक बलों के आश्रितों को उनकी योग्यता के अनुसार सेवा योजित करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने शहीद परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि हमें अपने वीर जवानों पर गर्व है। हमारी सेना सशक्त व मजबूत है। हमारी सेना हमारा गौरव है। देश पर आने वाले किस संकट का मुकाबला करने के लिए हमारे सैन्य बल समर्थ है।
जम्मू के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देहरादून निवासी मोहन लाल रतूड़ी भी शहीद हुए हैं। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर देहरादून पहुंचा। अंतिम दर्शन की ये तस्वीरें देखने से पहले आपको अपना दिल मजबूत करना होगा 
सीआरपीएफ में एएसआई रतूड़ी की शहादत की खबर शुक्रवार सुबह आई तो परिवार में मातम छा गया। उनका पार्थिव शरीर शनिवार की सुबह दून पहुंचा
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार सुबह शहीद के आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। ओर दोपहर में उनका राजकीय सम्मान के साथ हरिद्वार में अंतिम संस्कार किया गया

श्रीनगर-जम्मू मार्ग पर पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले में मूल रूप से उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ के बनकोट निवासी मोहन लाल रतूड़ी (53) भी शहीद हुए हैं।






