राहुल गांधी, उत्तराखंड की जनता पूछ रही है—एन.डी. तिवारी और हरीश रावत सरकारों के भर्ती विवादों का जवाब कौन देगा?

 

राहुल गांधी, उत्तराखंड की जनता पूछ रही है—एन.डी. तिवारी और हरीश रावत सरकारों के भर्ती विवादों का जवाब कौन देगा?

उत्तराखंड पूछता है… राहुल गांधी से कुछ सवाल!
राहुल गांधी जी, देहरादून आने से पहले उत्तराखंड के युवाओं और जनता को पूरा सच भी बता दीजिए।
उत्तराखंड पूछता है…
एन.डी. तिवारी सरकार (2002–2007) के दौरान
• दरोगा भर्ती में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे। मामला इतना गंभीर था कि जांच CBI तक पहुंची।
• पटवारी भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के आरोप लगे। एक ही परिवार के कई सदस्यों के चयन और लेन-देन के आरोपों के बाद भर्ती निरस्त करनी पड़ी।
हरीश रावत सरकार (2014–2017) के दौरान
• वर्ष 2016 की UKSSSC VPDO भर्ती परीक्षा विवादों में रही। बाद की जांच में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हुई।
• सिडकुल भर्ती विवाद में पक्षपात और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे। मामले की SIT जांच तक करनी पड़ी।
• UBTER और आयुर्वेद विश्वविद्यालय की भर्तियां भी लगातार विवादों और अनियमितताओं के आरोपों में घिरी रहीं।
यानी जिस दौर में कांग्रेस सत्ता में थी, उस समय भर्ती प्रक्रियाओं पर लगातार सवाल उठे, जांच एजेंसियां लगीं, भर्तियां रद्द हुईं और लाखों युवाओं का विश्वास टूटता गया।
अब वर्तमान की भी बात कर लेते हैं।
जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में UKSSSC भर्ती घोटाले का मामला सामने आया, तब क्या उसे दबाया गया? नहीं।
✔ देश का सबसे कठोर नकल-विरोधी कानून लागू किया गया।
✔ 100 से अधिक नकल माफियाओं और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
✔ भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए।
✔ पिछले चार वर्षों में 34,000 से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां मिलीं।
यही फर्क है।
कांग्रेस के शासनकाल में भर्ती घोटाले सामने आते रहे, जांच होती रही, भर्तियां रद्द होती रहीं और युवाओं का भरोसा टूटता गया।
भाजपा सरकार में जब गड़बड़ी सामने आई तो उसे दबाया नहीं गया। कानून बनाया गया, नकल माफियाओं पर सख्त कार्रवाई हुई, गिरफ्तारियां हुईं, जेल भेजा गया और पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार किए गए।
राहुल गांधी जी, उत्तराखंड की धरती पर आकर युवाओं के भविष्य पर राजनीति करने से पहले इन सवालों का जवाब भी दीजिए।
उत्तराखंड पूछता है—
▪️ भर्ती घोटालों की नींव किसके शासनकाल में पड़ी?
▪️ दरोगा भर्ती, पटवारी भर्ती, UKSSSC VPDO, सिडकुल, UBTER और आयुर्वेद विश्वविद्यालय की भर्तियां बार-बार विवादों में क्यों रहीं?
▪️ युवाओं का भविष्य किसने दांव पर लगाया?
▪️ जांच एजेंसियों को बार-बार दखल क्यों देना पड़ा?
▪️ भर्तियां रद्द क्यों करनी पड़ीं?
▪️ युवाओं का विश्वास किसने तोड़ा?
▪️ और व्यवस्था को बदलने का काम किसने किया?
उत्तराखंड का युवा सब याद रखता है।
उसे भाषण नहीं, रिकॉर्ड दिखाई देता है।
एक तरफ भर्ती घोटालों का इतिहास है।
दूसरी तरफ देश का सबसे कठोर नकल-विरोधी कानून, नकल माफियाओं पर कार्रवाई, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और 34 हजार से अधिक युवाओं को योग्यता के आधार पर मिली सरकारी नौकरियां।
युवाओं के सपनों की सबसे बड़ी दुश्मन वह राजनीति है जिसने वर्षों तक भर्ती व्यवस्था को सड़ने दिया।
और युवाओं का सबसे बड़ा साथी वह शासन है जिसने व्यवस्था को साफ किया, कानून को सख्ती से लागू किया और भर्ती प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने का प्रयास किया।
उत्तराखंड पूछता है… राहुल गांधी जी, जवाब दीजिए।

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