
वरिष्ठ पत्रकार हेम काण्डपाल का आलेख।
यादों के झरोखे से- भूल नही पाऊंगा अडवाणी जी का वो आत्मीयता भरा इंटरव्यू
हेम कांडपाल-
-भारतीय राजनीति के शिखर पुरूष, पुरोधा भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता श्री लालकृष्ण अडवाणी जी का कद जितना बड़ा है उतना ही विशाल उनका हृदय भी है। 1996 में चुनावी दौरे पर चौखुटिया आए तो मैंने अपनी आदत के अनुरूप उनके मंच से उतरते ही सवालों की झड़ी लगानी शुरू कर दी। सही मायनो में देखा जाए तो उस समय मुझ जैसे नौसिखिए पत्रकार के लिए उन जैसे महान व्यक्तित्व से प्रश्र पूछना तो दूर उनके सामने खड़े होना ही मुश्किल था, पर बचपन से ही इंटरव्यू का जुनून इतना था कि इस इंटरव्यू के बाद अविभाजित उत्तर प्रदेश के कई मंत्रियों व बड़ अधिकारियों का इंटरव्यू लिए।
मुझे भली भांति याद है मैने उनसे पहला सवाल हिंदुत्व के बारे में पूछते हुए कहा था कि हिंदुत्व विचारधारा के मूल में क्या है ये एक वर्ग विशेष का प्रतिनिधित्व करने वाली विचारधारा है या फिर पूरे भारत के जनमानस के सर्वांगीण विकास और कल्याण की मंसा रखते हुए सक्रिय है। यह सुनते ही उन्होंने बड़े दुलार से अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और बड़ी आत्मीयता से जवाब देने लगे। कुछ पलों के लिए यह एक अदने से पत्रकार और शीर्ष नेता के बीच नही बल्कि एक बुजुर्ग और बच्चे के बीच की जैसी बातचीत हो गई। जीवन की इस तरह की एतिहासिक यादें जीवन पटल पर नई ऊर्जा का संचार कर देती हैं। इंटरव्यू से पहले उन्होंने मंच से जब अपना संक्षित भाषण दिया तो सन्नाटा छा गया। उन्होंने अपने भाषणों से सभा में मौजूद जनमानस को झंकृत कर दिया। उस सभा का संचालन श्री बलवंत सिंह नेगी ने किया था। सभा में भाजपा के दिवंगत नेता श्री बंशीधर जोशी सहित कई वरिष्ठजन मौजूद थे।
हेम कांडपाल।
यादो के झरोखे में अगली बार करूंगा किसी और महानुभाव की चर्चा।
वरिष्ठ पत्रकार हेम काण्डपाल का आलेख,




