अपने गाँव भेजिए ज्ञान की समूण: हमारा लक्ष्य हर बच्चे के हाथ दुनिया की हर वो किताब पहुंचे जो उनकी दुनिया को नया फलक दे सके। उससे भी बड़ा लक्ष्य यह कि उसे ये किताब देने की पहल समाज के भीतर से ही पैदा हो

*अपने गाँव भेजिए ज्ञान की समूण*

■ *मेरे गाँव का स्कूल अभियान मे रोज नए स्कूल के बच्चों की हाथों में किताबे लिए फ़ोटो मिल रही है। लोग जुड़ रहे है और दूर पहाड़ की अलग अलग धार खाल पर मौजूद स्कूलो तक उनकी दी हुई समूण(भेंट) पहुंच रही है। ये समूण है ज्ञान की,कल्पना की और नई दृष्टि की।इस समूण में है एन.बी.टी., इकतारा,एकलव्य,प्रथम और दिल्ली प्रेस जैसे प्रतिष्ठित बाल साहित्य के प्रकाशकों की किताबें।*

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■ *हमारा लक्ष्य हर बच्चे के हाथ दुनिया की हर वो किताब पहुंचे जो उनकी दुनिया को नया फलक दे सके। उससे भी बड़ा लक्ष्य यह कि उसे ये किताब देने की पहल समाज के भीतर से ही पैदा हो।*

■ *धाद इसके लिये पिछले तीन साल से आवाज दे रही है और सैकड़ों लोग जुट चुके है जो बना रहे है अपने अपने गाँव के स्कूल को थोड़ा बेहतर और थोड़ा सक्षम।*

■ *पिछले हफ्ते जिन्होंने अपने गाँव ये दुनिया की बेहतरीन किताबो की समूण भेजी है:-*
◆ *रा उच्च प्राथमिक विद्यालय चोपताखाल बीरोंखाल पौड़ी गढ़वाल-सहयोगी पूजा ध्यानी*
◆ *रा प्रा वि बुकंडी, यमकेश्वर, पौड़ी गढ़वाल-सहयोगी सत्येश्वर प्रसाद जोशी*
◆ *इंटर कालेज किमसार, यमकेश्वर, पौड़ी गढ़वाल-सहयोग दीपक बिष्ट*
◆ *राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सल्या,अंद्रवाड़ी रूद्रप्रयाग-सहयोग सुप्रिय बहुखंडी*
◆ *इंटर कॉलेज ल्वाली,पौड़ी गढ़वाल-सहयोगी सत्य नारायण उपाध्याय*

■ यदि आप जुड़ना चाहते है इस यात्रा के साथ तो अपने गाँव के स्कूल के एक कोने को किताबों से सजाने के अभियान का हिस्सा बनिये।
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