
,क्या बीजेपी में घमासान जारी है
काऊ की खिलाफत के लिए गुपचुप बैठक क्यो ,
पार्टी ने इस नेता को दिया कारण बताओ नोटिस
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक है ओर अब इसी के चलते
भाजपा में घमासान अब सार्वजनिक होने लगा है इसे लेकर संगठन के वरिष्ठ नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींचना स्वभाविक है
ओर अभी तक देहरादून में हल्द्वानी में भाजपा के भीतर ऐसे मामले सार्वजनिक हो चुके हैं देहरादून के भाजपा महानगर अध्यक्ष सीताराम भट्ट और प्रभारी कुसुम कंडवाल की मौजूदगी में रायपुर विधायक उमेश काऊ के विरोध में बैठक हुई हालांकि इनमें ज्यादातर कार्यकर्ता एक धड़े के बताए जा रहे हैं
बता दे कि त्रिवेंद्र रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए यह धड़ा काफी सक्रिय रह चुका है एक बार रायपुर विधानसभा क्षेत्र में हुए एक कार्यक्रम में यह त्रिवेंद्र की मौजूदगी में धड़ा और विधायक उमेश काऊ का ध आमने-सामने आ चुका है
सूत्रों से मालूम चला है कि इस क्षेत्र के कुछ कार्यकर्ताओं ने गोपनीय बैठक कर विधायक की खिलाफत की है इससे साफ जाहिर हो रहा है कि लड़ाई बढ़ रही है भाजपा के एक नेता का कहना है कि यह सब विधानसभा सीट को लेकर जोर आजमाइश है सूत्रों के मुताबिक रायपुर सीट पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की भी नजर है लेकिन सामने मजबूत कैंडिडेट की मौजूदगी से वह सार्वजनिक करने से बच रहे हैं
भाजपा हल्द्वानी के उत्तरी मंडल में भी पिछले दिनों का है इस मंडल के पदाधिकारियों मैं जिले के एक नेता को लेकर आक्रोश है इसके चलते मंडल के अध्यक्ष नवीन पंत महामंत्री कोषाध्यक्ष अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं
वहीं भाजपा ने रायपुर क्षेत्र में कुछ कार्यकर्ताओं की बैठक में विधायक के खिलाफ खुलेआम विरोध करने की गंभीरता से लिया है पार्टी के प्रांतीय महामंत्री कुलदीप कुमार ने महानगर अध्यक्ष सीताराम भट्ट से 1 हफ्ते के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है उन्होंने इसे प्रथम दृष्टया पार्टी के अनुशासनहीनता माना है कहा गया संतोषजनक जवाब न मिलने पर संगठन कार्रवाई करेगा
बहराल मोटी ओर दो टूक बात यही है कि विधायक उमेश काऊ का अपना जनाधार है
उन्हें रायपुर की जनता पसन्द करती है जिसका कारण है कि वे सिर्फ विकास की राजनीति करते है और उनके द्वारा किया जा रहा या किये गए कार्य उनकी अगली जीत ओर मुहर लगाती है
लेकिन जिस तरह से सूत्र कहते है कि काऊ की रायपुर विधान सभा के साथ जिस तरह बार बार उपेक्षा करना ,वहां के विकास के काम काजो पर अडेगे डालना उससे वे बेहद दुःखी है
हालांकि वे फिर में लड़ कर झगड़कर , बैठक कर ,मिलकर, सचिवालय जा जा कर अपनी विधानसभा क्षेत्र के काम करा ही लेते
फिलहाल सूत्र कहते है कि ऐसे में क काऊ 2022 का चुनाव भाजपा से लड़े ये कहना मुश्किल लगता है !





