ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत जी मनेरी भाली (2) उत्तरकाशी डीजीएम ( प्रोजेकट मैनेजर सतीश कुमार पर लग रहे है गम्भीर आरोप! क्या इनके खिलाफ़ बैठाई जाएगी जांच ?

ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत
मनेरी भाली (2) उत्तरकाशी डीजीएम ( प्रोजेकट मैनेजर
सतीश कुमार पर लग रहे है गम्भीर आरोप क्या इनके खिलाफ़ बैठाई जाएगी जांच ?

 

उत्तराखंड में नोकरशाह किस कदर मस्त है ये आज किसी से छुपा नही है आये दिन अपने लोगो को काम दिलाने ओर लाखो की कमीशन का खेल ये खेल जाते है!  और बदनाम हो जाती है सरकार बता दे कि कमीशन खोरी ओर अपने चहेतों को काम देने में मलाईदार विभाग ऊर्जा महकमा सबसे अधिक बदनाम है ! ये वही मलाईदार विभाग है जिसको पाने के लिए वर्चस्व की जंग हो जाती है फिर सोचिये आप की इस महकमे के अफसरो के हाथ से लेकर नीचे तक वालो के हाथ मे क्या क्या नही होता होगा!
आज बात डीजीएम ( प्रोजेकट मैनेजर सतीश कुमार की
इनपर आरोप लग रहे है कि ये सेटिंग गैटिंग वाले ठेकेदारों को ही काम दिलाते है ! उत्तराखंड के बड़े बड़े ठेकेदार/ कंपनियों को छोड़ ये बाहर के लोगो को काम दिलाते है ओर वो भी इस तरह से की साँप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे के अंदाज़ में! 
आरोप है कि काफी समय से
उत्तराखंड जल विद्युत निगम मनेरी भाली (2) उत्तरकाशी का डीजीएम ( प्रोजेकट मैनेजर
सतीश कुमार नियमो की अनदेखी कर अपने चहेतो ठेकेदारो को( कंपनी) को काम देता आया है और दे रहा है ! आरोप लग रहे है कि टेंडर की जितनी कीमत होती है उसके अनुसार
हिसाब किताब लाखो में होता है साहब का!  ,वो भी पूरी साठ गाठ के साथ ! ताजा मामला अभी एक ओर मनेरी भाली (2) उत्तरकाशी के डीजीएम ( प्रोजेकट मैनेजर सतीश कुमार का निकलकर आया है दरसल में उत्तराखंड जल विद्युत निगम ने सुरक्षा बाढ़ दीवार ( मनेरी झील के किनारे सुरक्षा नियंत्रण दीवार ) के लिए लगभग साढ़े 7 करोड़ का टेंडर/ निविदायें निकली जिसमे 8 कम्पनियो ने इसमें टेंडर भरे पर यहा टेक्निकल बीट में 5 को बाहर कर दिया गया और आरोप है कि सेटिंग गेटिंग वाली कपनी को क्वालीफाई कर दिया गया
सूत्र बताते है ओर आरोप है कि ये सब कुछ सतीश कुमार के इशारो पर होता है एक बार फिर आपको समझाते है उत्तराखंड जल विद्युत निगम मनेरी भाली 2 के द्वारा निविदा आमंत्रित की गई थी जिसमें 8 निविदाएं डाली गई थी
जिसमें की 1.a.p.s.
2.स्टार कॉन
3.JV of M/S हिलवेज /  को तकनीकी बिट में लिया गया और बाकी पांचों फर्मों को तकनीकी बिट से बाहर कर दिया गया हैरानी की बात तभ हुई जब उत्तराखंड में करोड़ो का काम लगातार करने वाली कंपनियों को भी सिर्फ इसलिए बाहर करने का बेवजह रास्ता निकाला जिससे वे अपने चहेतों को काम दिलवा सके ! जबकि जिन
कंपनियों को क्वालीफाई किया गया उससे बेहतर और अनुभव एवं कार्य कुशलता वाली कंपनी को बाहर का रास्ता दिखा दिया
अब सवाल ये उठ रहे है कि क्या
विभागीय सांठगांठ के कारण मनेरी भाली परियोजना के
डीजीएम सतीश कुमार के द्वारा अपने निजी फायदे के लिए अपने निजी कंपनी को कार्य दिया जा रहा है!  जिसे कुछ लोग डंके की चोट पर कह भी रहे है आरोप है कि सतीश कुमार पहले से ऐसा करते आ रहे है क्योकि कुछ समय पहले हुए टेंडरों मैं भी उनके द्वारा साठ गाठ वाली निजी कंपनियों को बड़े-बड़े कार्य सरकारी दरों से अतिरिक्त दरों पर दिए गए हैं!  जिसकी शिकायत पूर्व मुख्यमंत्री के शिकायत निवारण पोर्टल में भी की गई थी बता दे कि शिकायतकर्ता किशन सिंह भंडारी के द्वारा दिनांक 8:04 2021 को उस दौरान मुख्यमंत्री रहे तीरथ सिंह रावत के पोर्टल में इनके विरूद्ध शिकायत की गई थी और आरोप है कि बहुत सारी अनियमितताएं निकल कर आई है जो इनके द्वारा टेंडरों में की गई हैं जो कि एक जांच का विषय है
सूत्र बताते है कि डीजीएम ( प्रोजेकट मैनेजर सतीश कुमार ने जिस वजह से बडी कंपनी को टेक्निकल बीट में बाहर करने की वजह तलाशी उसका जवाब खुद सिचाई विभाग ने उत्तराखंड जल विद्युत निगम को दे चुका था जिससे ये साफ हो जाता है कि वो कंपनी टेक्निकल बीट में क्वालीफाई करती थी
बहराल ऊर्जा मंत्री अब उत्तराखंड में हरक सिंह रावत है जो दूध का दूध और पानी का पानी अलग करना जानते है लिहाजा ऊर्जा मंत्री से उम्मीद की जा रही है कि उत्तराखंड सरकार को भी घाटा पहुचाने वालो के खिलाफ जांच कराई जाए
ओर यदि मनेरी भाली परियोजना (2) के डीजीएम सतीश कुमार के खिलाफ आरोप लग रहे हे तो
इसकी तत्काल जांच बैठाई जाए
बाकी सतीश कुमार से भी उनका पक्ष मिलने पर उसे भी लिखा जाएगा

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