
हरदा ने एक बार फिर फेसबुक के माध्यम से अपने दिल की बात कही है उन्होंने लिखा कि मेरे कई दोस्त, मेरे फेसबुक पेज पर पोस्ट किये गये लेखों/ट्वीट्स को महज सरकार की आलोचना मान रहे हैं। लेकिन मेरा मानना है कि ये न आलोचना है, न केवल आत्मालोचना है, बल्कि ये समालोचना के लिये लिखे जा रहे लेख हैं। एक सरकार कुछ निर्णय लेती है, कई कारण हो सकते हैं कि दूसरी सरकार उन निर्णयों को बदल दे, उन निर्णयों को क्रियान्वित न करे या उन निर्णयों में आंत्रिक परिवर्तन कर दे।
लोगों के सम्मुख यह जानकारी होनी चाहिये कि किसी भी सरकार द्वारा लिया गया निर्णय हो, वो मूल रूप में कैसा था और यदि उसको लागू नहीं किया गया है तो उससे राज्य को लाभ हो रहा है या हानि हुई है, या उसमें किया गया परिवर्तन राज्य के लिये तुलनात्मक रूप में कितना लाभदायक है! और ऐसा भी हो सकता है, जब आप कुछ बातों को आगे लाते हैं तो जिनके हाथ में सत्ता सूत्र हैं, वो उसका लाभ उठाकर के अपने प्रारम्भिक निर्णय को बदलकर के पूर्ववर्तीय सरकार के निर्णय को ही पुनः निर्णय में बदलकर लागू भी कर सकते हैं तो इसलिये राज्य में विकास के कतिपय बिन्दुओं पर बहस चले और आलोचना-समालोचना हो, इसलिये मैं कुछ ऐसे हिस्सों को जिनमें सरकार ने हमारे निर्णयों को बिल्कुल छोड़ दिया, उनको आपके सम्मुख ला रहा हूॅ। उनमें से एक निर्णय यू-हुड्डा को लेकर के भी है।

जब हमने भराड़ीसैंण में टाउनशीप बनाने का निर्णय लिया और उसका नोटिफिकेशन जारी किया तो प्रश्न यह उठा कि भराड़ीसैंण में टाउनशीप के निर्माण कार्य को कौन आगे बढ़ायेगा! और हमने भराड़ीसैंण के साथ ही कुछ बड़े नगरीय क्षेत्रों के निकट काउंटर मैग्नेटिक टाउन बनाने का निर्णय भी लिया था। देहरादून में भी हमने कुछ हाउसिंग प्रोजेक्ट मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के माध्यम से क्रियान्वित किये थे। दूसरी तरफ हम एक बड़ा हाउसिंग प्रोजेक्ट गरीब व निर्बल वर्ग के लोगों के लिये बनाना चाहते थे तो उसके लिये एक नई संस्था उत्तराखण्ड अर्बन हाउसिंग डेवलपमेंट अथाॅरिटी बनाई गई थी। एक समय ऐसा लगता था कि इस संस्था के पास बहुत काम होंगे, लेकिन आज उस संस्था का नाम भी नहीं सुनाई दे रहा है। ऐसा लगता है कि शायद भाजपा सरकार ने मेरी सरकार द्वारा लिये गये इस निर्णय को भी मीठी नींद सुला दिया है।







