
एक कदावर नेता जो हर समय मुख्यमंत्री का साथ देता है जिसके लिए गए फैसले की हर कोई मिसाल देता है जिसको दबंग के साथ साथ ईमानदार मंत्री के रूप मे देखा जाता है जिसके घर से लेकर ऑफिश तक मिलने वालो का दरबार लगा रहता है जो हर किसी को मेरे भाई मेरे भाई कह कर पुकारता है।
फिर आखिर एसा क्या हुवा जो पांडेय जी मतलब शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय जी अब थोड़ा थोड़ा चिड़े नज़र आने लगे है ,क्या कारण है कि पांडेय जी अब सवाल करने वालो पर नारज हो जाते है और गुस्से मे वो कह देते है जो उनको नही बोलना चाहिए। याद करो उतरापंत बहुगुणा मेटर जिसमे सबसे पहले ये ईमानदार मंत्री ही कूदा था और जैसे तैसे उतरा पंत का गुसा शांत करवाया फिर चाहे इन्होंने माफी उतरा से मागी हो या नही पर उतरापंत ने कहा था कि उन्होंने सीएम के व्यवहार के लिए माफी मांगी मंत्री ने उनसे मिलने का वादा किया अब क्यो नही मिले या सरकार ने कुछ कहा ये तो सरकार और मंत्री ही जाने लेकिन इसके बाद मंत्री जी की मीडिया ने खूब खिंचाई कर दी चलो बात धीरे धीरे शांत हो गईं उसके बाद एक निजी चैनल के पत्रकार और शिक्षा मंत्री की 13 के पहाड़े को लेकर मामला गरमा गया और मंत्री जी पत्रकार पर भड़क गए दो दिन तक ये सारा ड्रामा टीवी चैनल से लेकर सोशल मीडिया में खूब चला ।
उसके बाद अभी हल्द्वानी वाला मामला ताज़ा ही है जो आपको मालूम है दोनों ही मामले मे एक बात साफ है कि मंत्री जी पत्रकारो से नारज है या फिर बहुत बडी टेंशन मे है देखो किसी पत्रकार को फ़र्ज़ी कहना या किसी पत्रकार को कांग्रेस का एजेंट कहना ये मंत्री जी को शोभा नही देता खास कर उतराखंड मे क्योकि यहा तो नेता ही कुछ पत्रकार को बनाता है और कुछ पत्रकार एक आम को खास नेता इतिहास के पन्ने गवाह है वरना सब जानते है कि आजकल पत्रकार तो छोड़ो दिल्ली के नेता चैनल तक को किसी पार्टी का बता ओर एंकर पर किसी का टेग लगाकर हो हल्हा मचा देते है और बात खत्म .। पर सर ये तो उत्तराखंड है ना आप कब से यू बदले बदले नज़र आने लगे क्या है आपकी टेंशन की वजह क्यो उखड़े उखड़े है आप ।सर मे किसी भी पत्रकार की बात नही करुगा की उन्होंने क्या पूछा ओर क्यो पूछा बस मे तो इतना जानता हूँ कि आपको सयंम रखना चाहिए था क्योकि आप राज्य के मंत्री है वो भी एक विभाग के नही तीन तीन महत्वपूर्ण विभाग के शिक्षा विभाग आपका ,
पंचायती राज मंत्री आप , खेल मंत्री आप ओर ये तीनो महत्वपूर्ण वो विभाग है जिनके ऊपर राज्य का भविष्य दाव पर लगा है शिक्षा बेहतर होगी तो राज्य का भविस्य उज्वल होगा । खेल में राज्य आगे बढ़ेगा तो भी उत्तरखण्ड का भविष्य आगे बढ़ेगा, ओर अगर पंचायत मजबूत मतलब गाँव गाँव मजबूत होंगे और जब गांव गांव मजबूत होगा तो उतराखंड आगे बढ़ेगा ।
समझे जनाब अब आप आपके कंधों पर कितना विस्वास किया है मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने ओर आपको जहा भी कोई भी पत्रकार मिलेगा वो इन तीनो विभाग से रिलेटेड सवाल पूछ सकता है इसलिए जवाब आपके पास होना चईये । अब आप ये मत कहना कि कोई मुझ से 13 का पहाड़ पूछे तो बताओ इसमें मे क्या करूँ ?? आप कह सकते है बस नो कमेंट बात खत्म आगे जिसको जो करना या चलाना वो चलाये यही तो कहता कोई की मंत्री जी को पहाड़ा नही आता बात खत्म । ठीक उसी प्रकार पत्रकारो का तो काम ही है किसी के मुह से कुछ निकला ओर जनता के आगे फिर रखना पर आप क्यों वो बात कह देते हो जिससे पत्रकार ही उकसा जाए क्यो किसी को किसी का एजेंट बना रहे हो सर अगर नही देना किसी के सवाल का जवाब तो खा जाओ उसका सवाल ओर अगले की सुन लो पर पत्रकारो से बहस क्यो सर ??
राज्य के पत्रकारो की बात मे नही करता मे सिर्फ अपनी बात कह रहा हूँ कि आप एक अच्छे ओर ईमानदार नेता है फिर आपको उलझने की जरूरत क्या है आपके सारे अछे कामो पर पानी फेरता है ये गुस्सा ।
ओर एक ओर बात अगर आप को लगता है कि राज्य के अंदर फ़र्ज़ी पत्रकार है जो I.d लेकर घुमते है तो सरकार तो आपकी है ना ओर विभाग मुख्यमंत्री के पास वही करो शिकायत ओर असली नकली या फ़र्ज़ी पत्रकार प्रकरण पर क्यो नही बैठाते हो जांच वादा करता हूँ अगर ये काम हो गया तो राज्य के आधे से अधिक पत्रकार आपके साथ खड़े होगे की चलो अब हमारी बदनामी कम होगी फर्जी पत्रकार आउट होंगे पर ये नेेेक काम आपकी सरकार भी नही करने वाली कारण आपको मालूम ही है । चलो अब मुद्दे पर आते है क्योकि अरविंद पांडेय को गुसा यु ही नही आ रहा होगा कुछ तो वजह है इनके गुस्से की हा मंत्री जी कही ये तो नही की विकास के काम की गति बढ़ाने के चकर मे आप टेंशन मे आ गए है क्योंकि तीन तीन महत्वपूर्ण विभाग आपके पास है और हर विभाग को विकास की दरकार है क्योकि आपने ही कहा था मंत्री बनते ही की शिक्षा विभाग बर्बाद है इसको पटरी पर लाना है ।खेल मै कुछ हुवा नही यहा बहुत कुछ होना बाकी है और पंचयात विभाग तो ओर बेहाल है इसको स्वर्ग बनाऊंगा यही तो आपकी टेंशन ओर चिंता का कारण नही जो आप लगातार चिड रहे है ओर उखड़े उखड़े नजर आते है आप । आपको मालूम है आपने काफी हद तक शिक्षा के हालत सुधारे है और खेल की बात करे तो जो काम आज तक ना हुवा वो आपके समय हो गया क्रिकेट की बात कर रहा हूँ मै मान्यता की बात , और मैचो की बात तब राज्य के हर पत्रकार ने क्या छापा था क्या कहा था क्या दिखाया था टीवी चैनल ने की शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने सुधारे शिक्षा के हालात, अब निजी स्कूलो कि नही चलेगी मनमानी , ncrt की कितांबे शिक्षा मंत्री ने कराई लागू ओर खेल मंत्री ने कर दिखाया कमाल b.c.ci की उत्तरखंड को मिली मान्यता , ओर भी बहुत कुछ कुछ जब ये खबरे पत्रकार छाप रहे थे दिखा रहे थे तब क्या किसी नेता ने ये कहा पत्रकारो को . कि आप बीजेपी एजेंट हो इनमें जायद। काम हरीश सरकार पूरी कर चुकी है मंत्री ने तो अब सिर्फ फीता कटाना है और अपना नाम करना है क्यों?? खेर राजनीति मे ये सब आम बात है होता रहता है छोड़ो अब इन बातों को पर स्याद आप पर विकास का दबाव जायदा है जिसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत का आपके लिए विस्वास जायदा है तभी तो तीन तीन मत्वपूर्ण विभाग आपके पास दे रखे है और स्याद यही है दबाव आपके ऊपर की आप इन तीनो विभागो मे तेज़ी से काम करे क्योकि मेहनत करने से तो मंत्री जी पीछे नही हटेंगे लेकिन काम का ही दबाव है जो पत्रकारो के आगे आप किल्स जाते है अगर ये बात है तो आपकी टेंशन का कारण फिर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत है जिन्होंने आपको तीन तीन महत्वपूर्ण विभाग देकर दिन रात काम मे जोख रखा है और स्याद जब कोई और नया मंत्री बने तो आपको कुछ हल्का कर दिया जाए !हो सकता है ये !!फिर क्यो आप अभी इतनी टेंशन लेते हो पांडये जी जिस विभाग को कल जाना हो उसे आज ही टाटा बाय बाय बोलकर बाकी विभागों पर मेहनत करो और लगाओ चौके छक्के कोन रोकता है पर यू ना बीपी अपना बढ़ाओ ओर ना सवाल पूछने वालो का मंत्री जी




