
देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री, सीएम आवास और सरकारों की वापसी से जुड़े तमाम मिथक हैं. लेकिन जनहित के लिए कड़े निर्णय लेने के लिए जाने जाये वाले सीएम त्रिवेंद्र के सामने ये मिथक खुद–ब-खुद टूटते चले जा रहे हैं. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत 18 मार्च को जहां 2 मिथक तोड़ने की तरफ बढ़ रहे हैं, वहीं 2022 में दो बड़े मिथक तोड़ने की चुनौती सामने खड़ी है, हालाँकि जिस विकास के विज़न के साथ वह आगे बढ़ रहे हैं, उससे यह मिथक तोडना भी उनके लिए बड़ी बात नहीं होगी. हालाँकि त्रिवेंद्र रावत का कहना है कि वो मिथकों पर नहीं, बल्कि काम पर यकीन रखते हैं.
आने वाली 18 मार्च को त्रिवेंद्र सरकार का 4 साल का कार्यकाल पूरा हो जाएगा. इस मुख्यमंत्री आवास में त्रिवेंद्र रावत के 4 साल पूरे हो जाएंगे. ऐसा होने पर त्रिवेंद्र रावत उत्तराखंड में मुख्यमंत्री और उसके आवास से जुड़े 2 बड़े मिथक तोड़ने की तरफ एक कदम आगे बढ़ जाएंगे.
पहला मिथक ये कि उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के अलावा किसी मुख्यमंत्री ने 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया.
दूसरा मिथक ये कि मुख्यमंत्री आवास में अपशकुन है, जहां पूर्व सीएम निशंक और विजय बहुगुणा की सत्ता बीच में गई. वहीं हरीश रावत ने तो घर की तरफ देखा तक नहीं, लेकिन त्रिवेंद्र रावत इस घर में आए भी और 4 साल पूरे करने की तरफ बढ़ रहे हैं.
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है आवास भी अच्छा है और उसका वास्तु भी. जो पानी और पैसे फिजूल की बर्बादी थी, वो उन्होंने खत्म की. त्रिवेंद्र रावत का कहना है कि वो मिथकों पर नहीं, बल्कि काम पर यकीन रखते हैं. साफ है कि 18 मार्च को त्रिवेंद्र रावत सरकार के कार्यकाल का पांचवां साल शुरू हो जाएगा. इसी के साथ 2022 में 2 और मिथक तोड़ने की चुनौती मुख्यमंत्री के सामने होगी. पहली ये कि हर 5 साल में सरकार बदलती है और दूसरी ये कि मुख्यमंत्री रहते कोई मुख्यमंत्री चुनाव नहीं जीता. लेकिन प्रदेश में अब तक की सबसे बड़ी समस्याओं का हल करने वाले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र के लिए ये मिथक तोडना भी कुछ खास मुश्किल नहीं होंगे.





