
बोलता उत्तराखण्ड के सूत्र बोल रहे है कि की आगे आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस मे तीखी खट पट होना तय माना जा रहा है यदि राहुल गांधी ने उत्तराखंड कांग्रेस मे जल्द ही सबु कछ ठीक नही किया तो अगले विधानसभा चुनाव से पहले ही काग्रेस मुक्त उत्तराखंड़ होने मे समय नही लगेगा आपको बता दे कि काग्रेस के बड़े नेताओं मे मन मुटाव के चलते राज्य की काग्रेस पार्टी धड़ो मे बट गयी है जिसमे इंदिरा ह्रदयेश ओर प्रीतम सिंह एक साथ है तो हरीश रावत ओर किशोर एक साथ सूत्र बोल रहे है कि इन दोनों नेताओं को ठिकाने लगाने की योजना बन चुकी है बस अभी तक कि जानकारी अनुसार योजना पर काम चल रहा है राज्य के कुछ काग्रेस के कार्यकर्ता बड़ी सख्या मे निगम चुनाव से पहले बीजेपी मे जा सकते है ख़बर है कि उनको ओर कार्यकर्ताओ को ये लग रहा है कि यहा एक नेता दूसरे नेता को पार्टी मे खत्म करने का काम कर रहा है जो ठीक नही है उनके अनुसार नेता को बनाना और हटाना जनता के हाथ मे है इसलिये कल कोन आगे जाता है और कौन पीछे रह जाता है ये जनता तय करती है पर अभी सभी नेताओं को मिलकर एक साथ काग्रेस को मजबूत करना था जो कि यहा नज़र नही आता।
कुछ खबरी कह रहे है कि किशोर उपाध्याय बेकार ही टिहरी मे पसीना बहा रहे है क्योकि इस बार टिहरी लोकसभा से प्रीतम सिंह चुनाव लड़ने का मन बना चुके है जानकार कहते है कि अगर प्रीतम को टिकट मिला और वो जीत जाते है तो फिर प्रीतम सिंह चकराता विधानसभा सीट से अपने परिवार से किसी को या अपने भाई को मैदान मे उतारेंगे अगर ये होता है तो किशोर की राजनीतिक हत्या होना पूरा तय माना जा रहा है इसके पीछे एक महत्वपूर्ण वजह ये है कि प्रीतम सिंह से चकराता विकास नगर वाले नेता का दाग हट जाएगा ओर यदि 2022 मे काग्रेस सता मे आती है तो प्रीतम ही मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार होंगे
दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश इस बार जो कि खबरी बोल रहे है कि मेडम नैनीताल लोकसभा से टिकट खुद के लिए माग सकती है और जानकार कह रहे है कि उनको काग्रेस आलाकमान टिकट दे भी सकता है क्योकि ये इंदिरा ह्रदयेश की राजनीति मे आखरी पारी होगी उसके बाद स्याद राजनीति से सन्यास ओर इंदिरा अपने बेटे सुमित ह्रदयेश को फिर हल्द्वानी विधानसभा से मैदान मे उतारकर अपनी विरासत सोप देगी इस प्रकार की अफवाह साफ तौर पर उड़ रही है हरीश रावत नैनीताल लोकसभा से एक बार फिर जनता के बीच जाना चाहते है क्योकि राज्य मे उनके प्रति कही जिलो मे लोगों की भावनाओ को जोड़ कर देखा जा रहा है और हरीश रावत को अल्मोड़ा की जनता एक बार फिर जीता कर सांसद बनना चाहती है पर अगर इंदिरा ने टिकट मागा नैनीताल से तो मैडम का टिकट मामले मे पलड़ा भारी रहेगा ये कहकर की हरीश रावत आप हरिद्वार से चुनाव लड़े कह सकता है काग्रेस का आलाकमान!
अभी तक ये ख़बर सियासत के घरानों तक घूम रही है अब सवाल ये खड़ा होता है कि क्या किशोर ओर हरीश रावत इंदिरा ह्रदयेश ओर प्रीतम सिंह के खिलाफ गेम प्लान कर रहे है या प्रीतम ओर इंदिरा ह्रदयेश इन दोनों नेताओं के खिलाफ ये इनको ही मालूम होगा और आगे काग्रेस हाईकमान राहुल गांधी को भी पता चल जाएगा ही क्योंकि बात ये भी है कि प्रीतम सिंह ओर इंदिरा ह्रदयेश उन नेताओ को पार्टी मे वापस लाना चाहते है और कुछ को ले भी आये है जिन्होंने काग्रेस से बगवात कर काग्रेस के ही दावेदार के खिलाफ चुनाव लड़ा ओर उनको हरवाने मे कोई कोर कसर नही छोड़ी प्रीतम सिंह का कहना है कि मुझे पार्टी को मजबूत करना है और अगर कोई बिना शर्त ओर बिना मन मुटाव के घर वापस आता है तो विचार करके उनको पार्टी में ले लेना चाइए जबकि किशोर कहते है कि जिनको उन बागियों ने चुनाव हराया बिना उनकी सहमति से कोई किसको पार्टी मे केसे ले सकता है पहले उनसे भी बात होनी चाइए 
तो दूसरी तरफ अभी हाल मे ही जोत सिंह बिष्ट की पोस्ट को भी अगर पढ़ लिया जाए तो मालूम होता है कि आज पूरी काग्रेस मे खटपट है आप भी पढ़े जोत सिंह बिष्ट की पोस्ट उत्तराखंड से लगभग1200 कि0मी0 दूर उत्तराखंड की बहुत सारी खबरों जिनमे दर्दनाक हादसे से लेकर संवेदनशील वाकये भी शामिल हैं, से रूबरू हुवा, हादसों से मन दुःखी हुवा, इसी बीच किसी मित्र ने अखबार की एक खबर भेजी जो मन को कचोट गई, सोच रहा हूँ कि हम इतनी दूर आये कांग्रेस की सेवा के लिए और कुछ लोग वहाँ कॉग्रेस के हित की बात सोचने के बजाय कांग्रेस को अपना हित साधने के माध्यम बना रहे हैं। 
खबर में जो कुछ भी लिखा गया है सुखद नही है, खबर कितना सही या गलत है,इस सबसे ज्यादा कष्टकारी उस व्यक्ति का दम्भपूर्ण बयान है, जिसने एज नौकरशाह के रूप में कांग्रेस को तो कुछ नहीं दिया लेकिन कांग्रेस की सरकार में स्वयं खूब लाभ लिया, तिवारी जैसी शख्सियत को किस मुकाम पर पहुंचाया सब जानते हैं, जिसने अम्बिका सोनी जी, हरीश रावत जी से कहा कि मुझे चाहे सोनिया गांधी, राहुल गांधी भी मना करेंगे तब भी नहीं मानूँगा, हर दशा में चुनाव लड़ूंगा, इस प्रकार कांग्रेस नेतृत्व का अपमान करते हुए तब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ चुनाव लड़ा और अब कांग्रेस में शामिल होने को तत्पर है, लेकिन अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय शामिल होने के लिए कांग्रेस के नेताओं को अपमानित करने की शर्त रखता है, तो क्या कांग्रेस नेतृत्व इस अकूत धन संपदा के स्वामी (जिसका उल्लेख इसने अपने नामांकन पत्र में किया है लेकिन यह नहीं बताया कि इतनी धनसंपदा आईं कहाँ से, जांच का विषय है? जो कांग्रेस का अपराधी है, कांग्रेस नेतृत्व को अपमानित करने का अपराधी है) को कांग्रेस को मजबूत करने के नाम पर उसकी शर्त मान कर कांग्रेस में शामिल करेगा?
जो लोग आज वर्तमान नेतृत्व को इस बात के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रहे हैं उनसे एक सवाल कि प्रदेश के कांग्रेस के वर्तमान नेतृत्व के खिलाफ यदि कोई बागी होकर चुनाव लड़े और उसके बाद नेतृत्व परिवर्तन हो जाय (जो कि स्वाभाविक है) और सजे बाद नया नेतृत्व या उनके निकटस्थ लोग ऐसे बागी व्यक्ति को बिना पूर्व नेतृत्व की राय के कांग्रेस में शामिल करने की पैरवी करेंगे तो क्या तब भी वर्तमान पैरोकार आज की तरह पैरोकारी करेंगे या स्वर बदल कर बात करेंगे? कुछ लोग मेरे 2012 के निर्दलीय चुनाव लड़ने पर सवाल करेंगे, उनसे निवेदन कि पार्टी के लिए किया गया मेरा जीवनभर का योगदान, इस राज्य के निर्माण में मेरे योगदान और मेरे साथ कई बार की गई नाइंसाफी तथा निर्दलीय लड़ने के बाद पार्टी के लये समर्पण के साथ योगदान और 2017 में चुनाव में मनमोहन मल्ल का भरपूर समर्थन भी ध्यान में रखना, जो कि 6 साल के निष्कासन से भी भारी है।मेरा सवाल केवल उनसे है जिनका जमीर जिंदा है।
कांग्रेस के वास्तविक शुभचिंतकों से सटीक प्रतिक्रिया की अपेक्षा के साथ…
ये तो कुछ भी नही अभी .जहा हरीश रावत ने अपने गाँव मे हरेला पर्व मनाया तो तो दूसरी तरफ इंदिरा बयान चला जब पत्रकारो ने हरीश रावत से रिलेटिड सवाल किया तो इंदिरा ह्रदयेश बोल उठी की उनको पार्टी ने वो सब कुछ दिया जो मिलना चाइए था फिर भी अगर उनको कुछ और चाइए तो वो पार्टी फॉर्म मे बात रखे ना कि फेसबुक वट्सअप सोशल मीडिया पर यही नही इंदिरा ने इशारों मे साफ किया बिना नाम लिए की ये वही है जो तिवारी की सरकार को भी रोज रोज गिराने की धमकी देते थे और हम बढे नेताओ को कहते थे कि फलहा फलहा व्यक्ति है मतलब नाम लिए बगैर हरीश रावत बोल डाला फिलहाल अभी तक इन सब बातों से बहुत कुछ समझ आ रहा कि काग्रेस मे कुछ भी ठीक नही अब देखना ये होगा कि राहुल की डांट या फटकार किस को लगती है या बिन डाट फटकार के राहुल इन नेताओं को एक साथ लेकर फिर से कैसे आपसी सामंजस्य बैठाते है ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा फिलहाल घमासान जारी है अब किसी की चलेगी ओर किसकी नही ये राहुल गांधी ही तय करेंगे




