
दुःखद से दुःखद ख़बर
इस मां और पत्नी को क्या मालूम था कि खुशियों और रोशनी भरे त्योहार में उनके घर का दीपक हमेशा के लिए बुझ जाएगा। दुःखद
जी हा दीपोत्सव के पर्व दिवाली से ठीक एक दिन पहले घर का चिराग बुझ गया।
उत्तराखंड के लाल
बीएसएफ जवान राकेश डोभाल के बारामुला में शहीद होने की खबर सुनने के बाद घर पर कोहराम मच गया तो उनकी
पत्नी संतोषी डोभाल बार बार बेसुध हो रही है
तो मां विमला देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।
वे अपने लाल का नाम लेकर उनकी यादे को याद कर रो रही है
जवान बेटे के शहीद होने पर उन्हें ढांढस बंधा रहे लोगों के आंसुओं का सैलाब फूट रहा है
यहा हर कोई शोकाकुल परिवार को सांत्वना दे रहा है
तो जवान की पत्नी सदमे में है उनके मुंह से कोई शब्द नहीं फूट रहा है
लाडली ( बेटी महज 10 साल ) को अभी इस बारे में पता ही नहीं कि उसके पिता अब उससे कभी फोन पर बात नहीं कर पाएंगे।
उसे कभी अब दिखाई नही देगे
वे तो बस घर पर उमड़ती भीड़ को देखकर
ओर अपनो को रोता देख
मायूस हो रखी है
बता दे कि
शहीद राकेश साल 2004 में बीएसएफ में भर्ती हो गए थे।
बीते एक साल से राकेश डोभाल जम्मू में तैनात थे।
शहीद के दो और भाई हैं। बड़ा भाई देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर शिक्षक है। एक छोटा भाई दिल्ली के एक होटल में कार्यरत है।
वही शहीद की खबर सुनकर उनके निवास स्थान ऋषिकेश के गंगानगर में लोगों का हुजुम उमड़ पड़ा। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल और नगर निगम मेयर अनीता ममगाईं भी शहीद के घर पहुंचीं। विधानसभा अध्यक्ष और मेयर ने शोकाकुल परिवार में मां और पत्नी से मुलाकात कर उन्हें सात्वंना दी।







