
शिल्पा भट्ट बहुगुणा की कलम से
उनके फेसबुक वॉल से
सुनो त्रिवेंद्र सरकार
दिल से निकली बात।

करोना से तो जो होगा वो होगा पहले तो आदमी को ये शराब मार देगी । शराबी ख़ुद मरे न मरे लेकिन अपने परिवार को ज़रूर मार देगा । बीवी को ऐसे मार के और बच्चों को डरा के मार देगा । आज जब घर वापस आ रहीं थी तो लगभग 7:30 बजे सड़क पर एक लड़का इस औरत को गोद में लिए दौड़ रहा था ।

औरत की हालत ख़राब थी ख़ून बह रहा था । जिस तरह का माहौल आजकल हैं,
उनकी मदद करने से पहले उनके पास जाने से पहले मैंने सच में दो से तीन बार सोचा
लेकिन उस औरत के सिर से जिस तरह ख़ून निकल रहा था और वो लड़का और उसके पीछे भी
दो छोटे छोटे बच्चें रो रहे थे ये देख कर मैं ख़ुद को रोक नहीं सकी ।

फिर आस पास सब बंद
ओर हॉस्पिटल का विकल्प समझ नहीं आया की कहा ले जाए
फिर
सामने कुछ दूरी पर एक मेडिकल शॉप दिखी वहाँ इसकी फटाफट पट्टी करवाई ।सामने ही बाई पास चौकी में इसके पति की कम्प्लेन करवाई ।

अब जान ले पूरा मामला ये
था की पति को आज 200 रुपए ठेकेदार ने दिए जिसमें से 150 की वो दारू पी गया । जब इस औरत ने उस से आटा लाने लिए पैसे माँगे तो उसने पथर से इसके सिर पर वार किया और जो लड़का इसको गोद में लेकर मदद के लिए भाग रहा था वो औरत का भाई था
ये सब एक ही साथ एक ही जगह मज़दूरी का काम करते हैं । बच्चे अपनी माँ को इस तरह देख कर रो रो कर इधर उधर भाग रहे थे क्यूँकि इनके शराबी बाप ने इनको भी मारने में कसर नहीं छोड़ी । समझ नहीं आता कि किन चीज़ों से लड़ें हम ? ग़रीबी से ? करोना से ? शराबी से ? इस तरह की औरतों के साथ हो रहीं हिंसा से ? आज अगर इसका भाई ना होता साथ तो क्या होता इस औरत और इन मासूम बच्चों का ?
शिल्पा भट्ट की कलम से





