
गैरसैण गैरसैण
पर वख कैल रैण ?
साल भर मा एकदा आंदी सरकार
अर, दुसरे ही दिन भगणु तैयार

नेताजी की कोठी दून
ठीकेदारों क घार दून
पहाड़ हवै गी सब्या सून
अफसर बाबू थे कि हरद्वार पसंद
पहाड़ सुणैकि छुटदी असांद

डाकटर साब रैणा हल्द्वानी
मास्साबों की भी यई कहानी
पहाड़ जांद मोरदी सब्योक ननी
अर, फूले सरकार मा

कांग्रेस थे प्यारो गैरसैण
हाथै की गोरमिंट मा ही
भजपा याद आंद गैरसैण
कुर्सी म भुला बैठि जू भी
बथा याद कार कैण ?
गैरसैण गैरसैण
ये निर्भाग गैरसैण
त्यार कुछ हवै नी सकदू
बस पॉलिटिक्स ही ह्वैण
( बस यूं ही गैरसैण में पड़े पड़े..☺️)
वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर बूढ़ा कोटि की कलम से उनके फेसबुक वॉल से










