
अगले महीने जनप्रतिनिधियों का होगा सम्मेलन
इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री करेंगे मन्त्रियों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों के साथ विचार विमर्श
राज्य के समेकित विकास पर होगा मंथन
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत अगले माह प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में अब तक किये गये समेकित प्रयासों के साथ ही राज्य के दृष्टिगत भविष्य की जरूरतों के सम्बन्ध में प्रदेश के मन्त्रिगणों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों एवं ब्लॉक प्रमुखों से चर्चा करेंगे। साथ ही इस सम्बन्ध में उनके सुझावों, विचारों एवं समस्याओं की भी जानकारी लेंगे। यह राज्य के समेकित विकास की दिशा व दशा तय करने में भी मददगार होगा। इस एक दिवसीय आयोजन में विभिन्न सत्रों के माध्यम से सभी मन्त्रिगण अपने विभागों से सम्बन्धित कार्यकलापों एवं उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण के माध्यम से चर्चा करेंगे। वही विधायकगण, जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख जनपदवार अपने-अपने सुझाव रखेंगे तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की स्थिति पर चर्चा भी करेंगे।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि क्षेत्र विशेष की समस्याओं के समाधान एवं विकास के आयामों से आम जन मानस को परिचित कराने में यह प्रयास कारगर सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व आम जनता की भलाई के लिये समर्पित होना है। जन जागरूकता एवं क्षेत्रीय विकास में भागीदारी निभाना उनका दायित्व भी है। उन्होंने ऐसे प्रयासों को राज्य हित में बताया है। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन की व्यवस्थाओं का दायित्व सचिव वित्त अमित नेगी, सचिव मुख्यमंत्री श्रीमती राधिका झा के साथ ही महानिदेशक सूचना डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट को सौंपा हैं।
शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित इससे सम्बन्घित बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, श्रीमती राधा रतूड़ी, सचिव वित्त अमित नेगी, सचिव मुख्यमंत्री श्रीमती राधिका झा, अपर सचिव मुख्यमंत्री एवं महानिदेशक सूचना डॉ0 मेहरबान सिंह बिष्ट उपस्थित थे।
कुल मिलाकर सरकार पहल अच्छी है बस निवेदन ये है कि जब प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में अब तक किये गये समेकित प्रयासों के साथ ही राज्य के दृष्टिगत भविष्य की जरूरतों के सम्बन्ध में प्रदेश के मन्त्रिगणों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों एवं ब्लॉक प्रमुखों से चर्चा हो रही है तो क्या आपको नही लगता कि इस चर्चा के लिए एक दिन का समय बहुत कम रखा गया है
इस महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधियों के सम्मेलन का समय कम से कम तीन दिन तक लगातार होना चाहिये
ताकि हर कोई भरपूर समय मैं खुल कर अपनी बात कह सके
कुछ अच्छे विचार सामने आ सके
ओर इसी वजह से भी सरकार के सामने पूरी बात सामने आ सके
क्योकि हमारे अफसर तो कहते है जी सर हो जाएगा आपके सामने
पर जब कभी पूछा तो सर हो रहा है उसमें ये खामियां थी
बस वो दूर होते ही कर देंगे
ओर यदि जोर देकर पूछा तो
कहेंगे कि सर सब कुछ तो ठीक है पर वित्त का इंतज़ाम जब तक नही हो जाता कुछ नही कर सकते।
इसलिए
जनप्रतिनिधियों का महत्वपूर्ण सम्मेलन मैं समय मतलब दिन अगर ओर बढ़ जाये तो अमृत निकलता नज़र आएगा।
आगे सरकार तो आप है जो सही लगे वो मंजूर।





