
सरकार नहीं कर पा रहीं मवेशियों के चारे और लोगों के खाने की व्यवस्था, भूख से तड़प रहे सब
देहरादूनः उत्तरकाशी के पुरोला क्षेत्र में सांकरी से पहले रोके गए वन गुर्जरों के मवेशी अब सड़कों पर मरने लगे हैं. इसके साथ ही वन गुर्जर परिवार भी भूख-प्यास से तड़प रहे हैं. ऐसे में एक तरफ जिला प्रशासन इसकी पूरी जिम्मेदारी वन विभाग पर डाल रहा है, तो दूसरी तरफ वन विभाग जिला प्रशासन को इसका जिम्मेदार ठहरा रहा है. आलम ये है कि 2 विभागों के बीच फंसे गुर्जरों को अपने मवेशियों से हाथ धोना पड़ रहा है।
दरअसल कुछ हफ्ते पहले हर साल की तरह इस बार भी उत्तराखंड के मैदानी इलाकों से पुरोला से आगे मोरी और सांकरी के जंगलों के लिए वन गुर्जर निकले थे. देहरादून के मैदानी इलाकों से पुरोला तक पहुंचे वन गुर्जरों को सांकरी के पास रोक दिया गया. उन्हें आगे जाने की इजाजत नहीं दी गई. जिस पर वन विभाग से गोविंद विहार नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर कोमल सिंह का कहना है कि इन वन गुर्जरों के लिए आगे जाने की अनुमति नहीं है. जबकि वन गुर्जरों के मुताबिक वह हर साल वहां जाते हैं. उनके पास अनुमति भी है।
इस सबका खामिजाया मवेशियों को उठाना पड़ रहा है. वन विभाग ने वन गुर्जरों को ऐसी जगह पर रोका है, जहां न तो मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था है, और ना ही वन गुर्जरों के लिए राशन की व्यवस्था है. वन विभाग के अधिकारियों ने अपना पल्ला झाड़ते हुए जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है. उधर उत्तरकाशी जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने भी जिला प्रशासन की जिम्मेदारी से इनकार कर दिया है।





