आपरेशन से पूर्व व आपरेशन के दौरान आने वाली चुनौतियों की
रोकथाम व प्रबन्धन पर एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने किया मंथन

एसजीआरआर मेडिकल काॅलेज में आयोजित राज्य स्तरीय काॅन्फ्रेंस में कई राज्यों के विशेषज्ञों ने की शिरकत

200 डाॅक्टरो व शोधार्थियों ने प्रस्तुत किये शोध पत्र

देहरादून। इण्डियन सोसाइटी आफ एनेस्थीसियोलाॅजी के निर्देशन में इस वर्ष उत्तराखण्ड राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस (11वीं यू.के. इसाकाॅन) का आयोजन देहरादून में हुआ। इण्डियन सोसाइटी आफ एनेस्थीसियोलाॅजी की उत्तराखण्ड इकाई व श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एण्ड हैल्थ साइंसेज़ एवम् श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के एनेस्थीसिया विभाग के सहयोग से एसजीआरआर मेडिकल काॅलेज में दो दिवसीय राज्य स्तरीय काॅन्फ्रेंस आयोजित हुई। ‘इनहांसिंग पैरी आपरेटिव आउटकम एण्ड पेशेंट सेफ्टी‘ विषय पर आयोजित काॅन्फ्रेंस में राज्य स्तरीय काॅन्फ्रेंस में पंजाब, राजस्थान, दिल्ली हरियाणा, यूपी व उत्तराखण्ड से 200 से अधिक डाॅक्टरों व विषय विशेषज्ञों ने कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। आन लाइन व आफ लाइन मोड पर डाॅक्टर्स व विषय विशेषज्ञों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में डाॅ विनय राय, पूर्व चिकित्सा अधीक्षक, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल को एनेस्थीसिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया।
शनिवार को श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एण्ड हैल्थ साइंसेज़ के आडिटोरियम काॅन्फ्रेंस का शुभारंभ मुख्य अतिथि डाॅ हेम चन्द्र पाण्डे, कुलपति, हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल विश्वविद्यालय, विशिष्ट अतिथि डाॅ यू.एस.रावत, कुलपति श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय, डाॅ दीपक मालवीय, पूर्व अध्यक्ष इण्डियन सोसाइटी आॅफ एनेस्थीसियोलाॅजी व डाॅ रोबिना मक्कड़, काॅन्फ्रेंस की चेयरपर्सन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। काबिलेगौर है कि एनेस्थीसिया की राष्ट्रीय इकाई इण्डियन सोसाइटी आफ एनेस्थीसियोलाॅजी के द्वारा हर साल देश के किसी एक राज्य में राज्य स्तरीय काॅन्फ्रेंस आयोजित करती है, इस वर्ष उत्तराखण्ड राज्य को इस काॅन्फ्रंस के लिए चुना गया है। इसाकाॅन एनेस्थीसिया डाॅक्टरों के संवाद व ज्ञान को आदान प्रदान करने का सर्वश्रेष्ठ मंच है। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल केयर भी अब एनेस्थीसिया का अभिन्न अंग बन गया है।
मुख्य अतिथि डाॅ हेम चन्द्र पाण्डेय ने अपने सम्बोधन में कहा कि किसी भी आपरेशन के दौरान सर्जन की भूमिका को ही सबसे महत्वपूर्णं माना जाता है, लेकिन देखा जाए तो एनेस्थैटिस्ट चिकित्सा जगत की वह देन है जो सर्जरी के दौरान महत्वपूर्णं रोल अदा करता है। एनेस्थेटिस्ट मरीज को सर्जरी के दौरान दर्द रहित व संवेदना से मुक्त रखकर सर्जन को आॅपरेशन के लिए अनुकूल माहौल बनाकर देता है। बिना एनेस्थीसिया के आॅपरेशन की कल्पना ही असम्भव है। एनेस्थीसिया को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने को लेकर पूरे विश्व में 16 अक्टूबर को विश्व एनेस्थीसिया दिवस मनाया जाता है।
विशिष्ट अतिथि डाॅ यू.एस.रावत ने कहा कि मरीज के आपरेशन से पूर्व, आपरेशन के दौरान व आपरेशन के बाद आनेे वाली मेडिकल चुनौतियों की रोकथाम व बचाव में एनेस्थैटिस्ट की भूमिका सबसे महत्वपूर्णं होती है। आपरेशन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने में एनेस्थैटिस्ट की टीम का योगदान सबसे अहम रहता है। मेडिकल साइंस में ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए देश दुनिया में आधुनिक शोध हो रहे हैं। इस काॅन्फ्रंस में नए शोधार्थियों को एनेस्थैटिस्ट से जुड़ी महत्वपूर्णं जानकारियों व भूमिका को जानने समझने का अवसर मिला है।
विशिष्ट अतिथि डाॅ दीपक मालवीय, पूर्व निदेशक आरएमएल लखनउ ने कहा कि एनेस्थीसिया का सबसे महत्वपूर्णं लक्ष्य आॅपरेशन के दौरान न्यूनतम मृत्यु दर होना चाहिए। श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एण्ड हैल्थ साइंसेज़ के कार्यवाहक प्राचार्य डाॅ पुनीत ओहरी ने अपने सम्बोधन में कहा कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के एनेस्थीसिया विभाग के डाॅक्टरों का कार्य दायरा बहुत बड़ा है। उन्होने एनेस्थीसिया विभाग के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
वरिष्ठ एनेस्थैटिस्ट डाॅ विनय राय ने पैरीआपरेटिव मैनेजमेंट आफ डायबिटिक पेशेंट विषय पर व्याख्यान देते जानकारी दी कि आपरेशन से पूर्व व आपरेशन के दौरान शुगर के मरीजों में किन किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है। उन्होंने ऐसे मरीजों में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल मैनेजमेंट के टिप्स भी सांझा किए। आल इण्डिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एण्ड हेल्थ साइंसेज़ (एम्स, ऋषिकेश) के प्रोफेसर डाॅ यशवंत सिंह पयाल ने दि पैरीआपरेटिव आउटकम इन ए पीडियाट्रिक पेशेंट विषय पर व्याख्यान देते हुए सर्जरी के दौरान बच्चों के मामले में आने वाली चुनौतियों व रोकथाम पर महत्वपूर्णं बिन्दु सांझा किए। पोस्ट ग्रेजुएशन इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एण्ड रिसर्च चण्डीगढ़ की प्रोफेसर डाॅ निधि भाटिया ने करंट कांसेप्ट इन दि अरली मैनेजमंट आफ ट्राॅमा विषय पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में इण्डियन सोसाइटी आफ एनेस्थीसियोलाॅजी उत्तराखण्ड की अध्यक्ष डाॅ गीता भण्डारी, आरगनाइजिंग चेयरपर्सन डाॅ रोबिना मक्क्ड, काॅन्फ्रेंस के को-चेयरपर्सन डाॅ अतुल कुमार सिंह, सचिव डाॅ आशुतोष, कोषाध्यक्ष डाॅ अनुप नेगी ने भी काॅन्फ्रेंस को सम्बोधित किया। मंच संचालन डाॅ तेजस्विनी ने किया। इस अवसर पर श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल एण्ड हैल्थ साइंसेज़ के सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, फेकल्टी सदस्य व स्टाफ व मेडिकल छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

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