देहरादूनः उत्तराखंड में BJP की डूबती नैय्या को सीएम धामी ने बचा लिया, खुद हारकर भी धामी प्रदेश में इतिहास रचने में कामयाब हो गए। इसे धामी की मेहनत का नतीजा ही कहेंगे क उत्तराखंड में सत्ता में बीजेपी ने वापसी कर ली है। बीजेपी ने 70 में से 48 सीटें जीतकर इस मिथक को तोड़ दिया कि उत्तराखंड में सरकारें रिपीट नहीं होती हैं। बता दें कि उत्तराखंड में बीजेपी की हार के लिए पूर्व मुख्यमंत्रियों के फैसले और एक कार्यकाल में तीन मुख्यमंत्री बनाया जाना विषय बन रहा था। लेकिन आखिरी वक्त में अचानक पार्टी ने बड़ा दांव खेलते हुए धामी पर दांव लगाया। धामी ने कड़ी मेहनत कर अपने मजबूत फैसलों के दम पर बीजेपी की सत्ता में वापसी करा दी।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार चार साल बाद त्रिवेंद्र को हटाकर तीरथ सिंह रावत को CM बनाया गया। तीरथ की बयानबाजियों ने पार्टी को कई बार असहज स्थिति में ला खड़ा किया। ऐसा लगा कि पार्टी चुनाव में 20 सीटों तक सिमट कर रह जाएगी। इंटर्नल सर्वे और संगठन के फीडबैक के आधार पर ‌BJP ने तीसरी बार रिस्क लिया। दूसरी बार विधायक बने युवा नेता पुष्कर सिंह धामी को चुनाव से आठ माह पहले CM बनाया गया। धामी ने सक्रियता दिखाई, जिससे BJP चुनाव जीत गई। पर सीएम धामी खुद चुनाव हार गए। हालांकि प्रदेश में जीत दर्ज कराने में लगे होने के कारण वह अपनी विधानसभा पर फोकस नहीं कर पाएं। जिससे उनकी हार हो गई। हालांकि प्रदेश में बीजेपी की वापसी को मोदी लहर भी कहा जा रहा है। जितना हाथ इस जीत में धामी का रहा उतना ही कार्यकर्ताओं का भी रहा है।

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राजनीति के जानकार कहते हैं कि मोदी के मुकाबले कोई नहीं है। यह मोदी मैजिक सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मूलमंत्र पर आधारित है इसलिए तमाम अस्थिरता के बाद भी पार्टी को बड़ी जीत मिली। यह जीत इतनी बड़ी थी कि कांग्रेस के सीएम हरीश रावत खुद लालकुआं सीट से हार गए। यानी इस जीत ने साबित कर दिया कि ब्रांड मोदी का कोई तोड़ नहीं है और राज्य में कोई भी चेहरा हो लोग पीएम मोदी का चेहरा देखते हैं और इस आधार पर ही भाजपा 5 राज्यों के चुनावी मुकाबले में 4-1 से स्कोर करने में कामायाब हो पाई है। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में मोदी फैक्टर का असर कायम रहा। इन जिलों में धार्मिक भावनाओं का खासा महत्व है। BJP ने इसे भुनाने में कसर नहीं छोड़ी। PM मोदी खुद कई बार उत्तराखंड में चुनावी कैंपेन करने के लिए आए। बताया जा रहा है कि मोदी के चुनावी कैंपेन से राज्य की आठ से दस सीटों पर सीधे असर पड़ा। यही वजह रही कि आज उत्तराखंड में परंपरा को तोड़कर BJP ने सत्ता में वापसी की।

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