चंपावत में तेज रफ्तार अनियंत्रित रोडवेज बस पलटी, यात्रियों की मची चीख-पुकार –  

चंपावत में तेज रफ्तार अनियंत्रित रोडवेज बस पलटी, यात्रियों की मची चीख-पुकार –

चंपावत: जिले के टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर आज सोमवार सुबह के समय रोडवेज की बस की दुर्घटना की खबर से हड़कंप मच गया. टनकपुर से पिथौरागढ़ जा रही रोडवेज की बस चलथी से पहले सिन्याड़ी नामक स्थान पर अनियंत्रित होकर सड़क पर ही पलट गई.

चंपावत में रोडवेज की बस पलटी: बस के पलटने से यात्रियों में जहां चीख पुकार मच गई, वहीं स्थानीय लोगों ने यात्रियों को बस से बाहर निकाला. गनीमत यह रही कि बस अनियंत्रित होकर खाई में नहीं गिरी. बस के सड़क पर ही पलटने से कुछ यात्रियों को ही चोटें आईं. सभी यात्रियों को अन्य बस के माध्यम से परिवहन निगम के द्वारा पिथौरागढ़ को रवाना कर दिया गया. बस में दुर्घटना के वक्त कुल 25 यात्री सवार थे.

बस पलटने से कई यात्री जख्मी: टनकपुर-चम्पावत राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा होने से टल गया. सिन्याड़ी के समीप टनकपुर से पिथौरागढ़ जा रही उत्तराखंड परिवहन निगम के पिथौरागढ़ डिपो की एक बस अचानक अनियंत्रित हो गई. अनियंत्रित बस पलट गई. बस के पलटते ही उसमें सवार यात्रियों में चीख-चिल्लाहट मच गई. हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे. उन्होंने किसी तरह यात्रियों को बस से बाहर निकाला. बताया जा रहा है कि हादसे में यात्री मामूली रूप से चोटिल हुए हैं. दुर्घटनाग्रस्त रोडवेज बस यूके07पीए-3201 काफी पुरानी बताई जा रही है.
उत्तराखंड में ये हैं दुर्घटना के कारण: उत्तराखंड में सड़क हादसे बढ़ते जा रहे हैं. उत्तराखंड ट्रैफिक पुलिस के अनुसार इनमें रैश ड्राइविंग, ओवरस्पीड, नौसिखिए ड्राइवरों द्वारा पहाड़ पर वाहन चलाना और शराब पीकर ड्राइविंग करना दुर्घटनाओं के मुख्य कारण माने गए हैं. उत्तराखंड में साल 2024 रैश ड्राइविंग और ओवरस्पीड से होने वाली दुर्घटनाओं काफी ज्यादा रही थीं. पिछले साल राज्य में अधिकतर दुर्घटनाएं इन्हीं वजह से हुईं थी. बीते साल सड़क हादसों में 900 से ज्यादा लोगों की जान गई थी.

उत्तराखंड के 11 जिले पहाड़ी क्षेत्रों में आते हैं. हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिले मैदानी जिले हैं. पहाड़ पर बर्फबारी और बारिश के दौरान ड्राइविंग काफी चुनौतीपूर्ण होती है. पाला गिरने पर भी रोड से वाहन के स्किड करने का खतरा बना रहता है. वहीं मैदानी इलाकों में कोहरे और जलभराव के दौरान दुर्घटनाओं का ज्यादा खतरा रहता है.

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