ये वोट बैंक वाली बस्तियां है इनके लिए सरकारे कुछ भी करेगी !

जुगाड़ की सिफ़ारिश से आबाद होती है ये बस्तियां पार्षद से लेकर सांसद तक बसाते है ये बस्तियां ये बस्तियां नही राजनेताओ का वोट बैंक है जनाब । राशन कार्ड से लेकर ,वोटर कार्ड, बिजली, ओर घर घर पर आता है इनके नलखो पर पानी फिर किस कि। मजाल जो इनको उझाड़े भाई शाहब ये वोट बैंक है वोट बैंक कोई सरकार हाथ भी लगाए तो 5 लांख से जायद वोट बिगड़ जाए और जो लेकर चले इनको साथ उसको बोनस मे इनके वोट मिल जाये जी हा इसलिए ही अब उत्तराखंड में मलिन बस्तियों को लेकरबड़ा फैसला डबल इज़न ने ले लिया है क्योंकि ये त्रिवेन्द्र रावत की सरकार फैसला ले चुकी है  
फैसले के बाद कांग्रेस, यूकेडी सहित तमाम राजनैतिक दलों के साथ ही मलिन बस्तीवासियों की मांग पूरी हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश पर चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान की जद में आईं मलिन बस्तियों को बड़ी राहत दे दी है। कैबिनेट की बैठक में अध्यादेश के मसौदे को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। तय हुआ है कि इन बस्तियों में रहने वालों के नियमितीकरण के अलावा पुनर्वासन और पुर्नस्थापन की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए तीन वर्ष का समय मसौदे में दर्ज किया गया है। इस कवायद से न केवल राजधानी बल्कि पूरे प्रदेश की मलिन बस्तियां फिलहाल किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से बची रहेंगी। उधर हाईकोर्ट के आदेश के तहत सड़कों और उनके किनारों पर किए गए अतिक्रमण को तोड़ने की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। 

सचिवालय में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की अध्यक्षता में शाम चार बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई। इसमें कुल 12 विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें आठ को सर्वसम्मति से पास किया गया। इसमें सबसे पहला प्रस्ताव अवैध मलिन बस्तियों को तोड़ने के लिए अध्यादेश लाने के मसौदे से जुड़ा था। मसौदे में इन बस्तियों को नियमितीकरण करने के लिए वर्ष-2016 में बनाए गए एक्ट में संशोधन करने के साथ ही इन बस्तियों में रह रहे परिवारों को व्यवस्थित करने के लिए तीन वर्ष का समय निर्धारित किया गया है। इस अवधि तक इनके खिलाफ होने वाली दंडात्मक कार्रवाई स्थगित रहेगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना की ली जायेगी मद्द
इस कार्य में प्रधानमंत्री आवास योजना के अलावा राज्य सरकार की योजनाओं की मदद ली जाएगी। कैबिनेट से पास अध्यादेश के मसौदे को आज राज्यपाल के पास भेजा जाएगा, जहां से इसे जारी किए जाने की कार्रवाई होगी। इसके बाद छह माह के भीतर राज्य सरकार विधानसभा सत्र के दौरान इस अध्यादेश को विधेयक के रूप में पास करेगी। 
आपको बता दे कि
बीती 18 जून को हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को देहरादून शहर का अतिक्रमण चार सप्ताह में ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। 26 जून को आदेश की कॉपी मिलने के बाद अतिक्रमण हटाओ टास्क फोर्स ने 28 जून से अभियान शुरू किया था। ऐसे में आज 26 जुलाई यानी बृहस्पतिवार को चार सप्ताह का समय समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सरकार हाईकोर्ट में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपेगी।

शहर में…
129 मलिन बस्तियां
40000 मकान
300000 हैं निवासी है मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की अध्यक्षता में कल कैबिनेट की अहम बैठक सचिवालय में हुई। कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य को छोड़कर सभी मंत्री बैठक में पहुंचे।
सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने बैठक में लिये गये फैसलों पर जानकारी देते हुये बताया कि कुल 12 विषय मंत्री परिषद के सामने आए। समय न होने के कारण जिनमें से 4 को स्थगित किया गया।

मलिन बस्तियों पर ये रहा फैसला
मलिन बस्तियों को लेकर अध्यादेश लाया गया।
राज्य के अंदर 2016 में मलिन बस्तियों के लिए पूर्व की सरकार ने कानून बनाया था जिसमें एक मकान को भी उस एक्ट के तहत मलिकाना हक नहीं मिल सकता था
नगर निकाय और प्राधिकरण में निर्माण पुनर्वास होगा।
उत्तराखंड नगर निकाय और प्राधिकरण के लिये विशेष प्राविधान अध्यादेश 2018 लागू होगा।
जबतक नियमावली नहीं बनेगी तबतक पुरानी नियमावली लागू रहेंगी।
11 मार्च 2016 तक कि यथास्थिति रखने के आदेश।
2016 के बाद के सभी अनाधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई होगी।
सार्वजनिक जगहों पर सड़क और गलियों में निर्माण नहीं होगा।
3 साल में बनेगी नियमावली तबतक मलिन बस्तियों को तोड़ा नहीं जाएगा।
इसको लेकर विधानसभा में सरकार लाएगी एक्ट।
आज कोर्ट में देंगे जवाब।
सिर्फ मलिन बस्तियों को लेकर है फैसला जबकि बाकी ध्वस्तीकरण जारी रहेगा।

कैबिनेट में लिए गए अन्य फैसले
किशोरी बालिकाओं/महिलाओं को सैनेटरी नेपकिन बांटने वाली आंगनबाड़ी महिलाओं को दो रुपये प्रोत्साहन राशि जारी की गई।
लखनऊ से पुनर्गठन आयुक्त कार्यालय समाप्त किया गया।
न्यायलय शुल्क विधेयक 2018 में संशोधन।
उच्च न्यायलय और सभी कोर्ट फीस के लिए ई-ट्रेडिंग लागू किया गया है।
पुलिस निरीक्षक/उप निरक्षक नियमावली को मंजूरी।
विश्व बैंक सहायता परियोजना के तहत 25 ITI को चुना गया है।
पांच साल के लिए विश्व बैंक करेगा फंडिंग।
अब जो ITI जितना टर्नओवर करेगी उनको उतनी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
उत्तराखंड निवेश सम्मेलन 2018 को मंजूरी।
25 करोड़ के बजट को मिली मंजूरी। टोटल 8 समिति है।
उत्तराखंड ग्राम पंचायत विकास अधिकारी नियमावली में बदलाव। शैक्षिक योग्यता में बदलाव।                     बहराल ज़िस तरह बस्तियों के मामले मे सभी राजनीतिक दल एक साथ आकर खड़े हो गए है उससे तो यही लगता है की ये सब बोट बैंक के सिवा कुछ नही ओर ये सरकार बस्तियों। को छूने भी नही देगी किसी को। बोलता उत्तराखंड़ का मकसद ये नही कि किसी का घर उजड़ जाए हम तो बस ये चाहते है कि सरकार अवैध बस्तियों को पनपे ना दे क्योकि इन्होंने ही लगाया है दूंन के दामन पर दाग दूसरी बात ये है कि कभी सरकरो ने ये ना सोचा की इन बस्तियों मे रहने वाले हमारे भाई लोग कहा से आये है उनका अपना घर गाँव इलाका कहा का है? कोई छान बीन नही की इन बस्तियों में कोन कोन रहकर क्या कर रहा है इसका खुलासा बोलता उत्तराखण्ड जल्द करेगा ।

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