ये ख़बर सरकार के लिए विपक्ष के लिए ओर आपके लिए है जो पहाड़ से प्यार करता है उसके लिए है

उत्तराखंड राज्य का दुर्भाग्य रहा है और अभी भी है कि राज्य के 20 प्रतिशत बड़े अधिकारीयो से लेकर छोटे अधिकारियों ने कभी खुद को पहाड़ का समझा ही नही रो रो कर पहाड़ चढ़े पर मन से नही सिर्फ समय पास करने और अपना वेतन पकाने के लिहाज से पहाड़ मे रहे और फिर वहां से वापस देहरादून तबादले के लिए जुगाड़ की सिफारिश लगाते रहे । ओर वो जुगाड़ हुवा भी फिर चाहे जैसे भी हो । साम दाम दंड भेद सब कुछ इन्होंने अपनाया और माल भी खूब कामाय । तो कुछ वो अधिकारी भी राज्य मे थे जो पूरी ज़िन्दगी देहरादून से कभी निकले ही नही ओर निकले भी तो हवाई जहाज़ से या फिर सचिवालय से लेकर देहरादून के सरकारी कार्यलयों मे a.c मे बैठ कर ओर बड़े चाव से बिस्लरी का पानी पी पी कर ओर चाय की चुस्कियों के साथ कभी ना परिणाम आने वाली उन बैठकों को किया । वो नीतियां वो योजनाएं बनाई जिससे इनका तो भला हो गया पर मेरा ओर आपका पहाड़ डूब गया । खेर जाने दो इनके नाम सबको मालूम है लेकिन क्या उन लोगो के नाम भी आप जानते है जिनकी तारीफ एक आम आदमी पहाड़ वासी करता है । सबसे पहले अधिकारी हरक सिंह रावत , दलीप जवालकर , सौजन्या मेडम जी , राधा रतूडी मेडम जी , विमी सच देवा , रविनाथ रमन, आशीष चौहान, शेलैस बगोली , वर्तमान मे देहरादून के जिला अधिकारी , ओर सुशील कुमार , के साथ और भी वो बहुत कुछ खास नाम है जो पहाड़ हित के लिए लगातार अपने अपने पद के अनुसार काम करते है । तो कुछ वो भी है जिनके पास सरकारी गाड़ी ओर चालक उनको दिए विभाग के अनुसार है बस फिर क्या उनका परिवार मज़े मे है । और कुछ वो है जिन्होंने किमीशन का मीट भात खाने की जगह जमीन और कुछ धंदे , पेट्रोल पंप , होटल जैसे कारोबार मे माल लगवा दिया अपना कुछ ने राज्य मे तो कुछ ने राज्य से बाहर ! तो कुछ वो अच्छे लोग भी है जिनसे सीखने की जरूरत है , जो बता रहे है कि देखो पहाड़ से प्यार कर क्या कुछ नही मिलता , पहाड़ के लोगो के लिए कुछ कर दुवा मिलती है , प्यार मिलता है , अपना पन मिलता है , ओर अगर उनके दर्द को दूर कर पाए तो सकून मिलता है और यही सकून मिल रहा है ऊषा घिल्डियाल जी को जो शिक्षक नहीं हैं, फिर भी शिक्षक बनकर नि:स्वार्थ भाव से छात्राओं के भविष्य को संवारने का काम कर रही हैं। आपको बता दे कि जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में वह नवीं व दसवीं की छात्राओं को न सिर्फ नियमित रूप से अंग्रेजी पढ़ाती हैं, बल्कि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण टिप्स भी देती हैं।
ओर ये कोई और नही बल्कि हमारे पहाड़ के रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल जी की पत्नी है जो ऊषा गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर में सीनियर वैज्ञानिक रह चुकी हैं। लेकिन, अब वह नौकरी छोड़कर रुद्रप्रयाग जिले में शिक्षा की बेहतरी के लिए कार्य कर रही हैं। एक वर्ष पूर्व जब उन्हें पता चला कि राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में अंग्रेजी की शिक्षक नहीं हैं तो उन्होंने स्वयं छात्राओं को पढ़ाने का निर्णय लिया। वह भी पूरी तरह सेवा भाव से। इसके अलावा वह छात्राओं को सेना, मेडिकल, बैंक, सिविल सर्विस व इंजीनियरंग की तैयारी के लिए टिप्स भी दे रही हैं। साथ ही उन्हें सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने के लिए भी प्रेरित करती हैं।

आपको बता दे कि ऊषा को शिक्षक के रूप में पाकर छात्राएं भी काफी खुश नजर आती हैं। वह पठन-पाठन से जुड़ी समस्याएं उनसे बेझिझक शेयर करती हैं। बीते सत्र में उन्होंने नवीं व दसवीं की छात्राओं को विज्ञान विषय पढ़ाया था। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय रुद्रप्रयाग में भी उन्होंने चौथी व पांचवीं के छात्रों को न सिर्फ गणित, विज्ञान व अंग्रेजी विषय पढ़ाया, बल्कि उन्हें नवोदय विद्यालय व सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी कराई।

मैडम ऊषा जी कहती हैं कि पहाड़ में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत बस उनका मार्गदर्शन करने की है। अगर उनके इस प्रयास से बच्चों को आगे बढऩे में मदद मिलती है तो यह उनके जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। वहीं, बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य ममता नौटियाल कहती हैं कि ऊषा के अध्यापन से छात्राओं को काफी लाभ मिल रहा है। वह बेटियों को कॅरियर के प्रति भी जागरूक कर रही हैं।

बहराल ये बात हमने इसलिए कही की जहा से चलता है ( सचिवालय) जीरो टालरेश वाली सरकार के लाट साहबों का शासन अगर वो कुछ लाट साहब ईमानदारी से पहाड़ की सेवा का सकल्प ले तो आज हालात कुछ और नज़र आये । ओर आज तो सिर्फ बोलता उत्तराखंड ने एक कड़वी बात कही है भविष्य मे उन लोगो के नाम उजागर भी होंगे जो त्रिवेन्द्र सरकार से लेकर पहाड़ तक को धोखे मे रखते है।

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