अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के खुले कपाट आओ चले अब चारधाम ।
आज अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर माँ गंगोत्री और माँ यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का आगाज हो गया है।
आज मंगलवार की सुबह गंगा जी की डोली यात्रा गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई। गंगोत्री पहुंचकर वहां गंगा स्तोत्र, गंगा लहरी एवं गंगा सहस्त्रनाम पाठ कर गंगा का अभिषेक किया गया। अभिजीत मुहूर्त में पूर्वाह्न 11:30 बजे गंगोत्री मंदिर के कपाट खोले गए। विधि विधान एवं विशेष पूजा-अर्चना के साथ गंगा जी की भोग मूर्ति को मंदिर के भीतर विराजमान किया गया। इस मौके पर श्रद्धालुओं ने मंदिर के भीतर जल रही अखंड ज्योति के दर्शन का पुण्य लाभ भी अर्जित किया।


वहीं इसके साथ ही मां यमुना की डोली को खरसाली गांव से सुबह यमुनोत्री धाम के लिए विदा किया गया। फिर विशेष धार्मिक अनुष्ठान के बाद सुबह 9 बजे मां यमुना की मूर्ति को यमुना मंदिर से बाहर निकाला गया।
इसके बाद शनि देवता की अगुवाई में सभी श्रद्धालु मां यमुना की डोली को लेकर यमुनोत्री धाम पहुंची, जहां विशेष पूजा अर्चना के बाद दोपहर 1:15 बजे के शुभ मुहूर्त में मंदिर के कपाट खोल दिए गए।


आपको बता दे कि वहीं हैदराबाद से चारधाम यात्रा पर आए 60 वर्षीय वी विरेशम की जानकीचट्टी स्थित होटल में मौत होने की सूचना है। परिजन उन्हें बड़कोट अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वही उनके परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से मना किया है। पुलिस के अनुसार तीर्थयात्री की मौत संभवत हार्ट अटैक से हुई है। पोस्टमार्टम नहीं होने से मौत के कारणों का सही पता नहीं चल सका।
तो उधर भगवान  बदरीनाथ धाम के कपाटोद्घाटन की तारीख लगभग करीब आते ही अब तीर्थयात्री धाम पहुंचने लगे हैं। दिल्ली, गुजरात और उत्तर प्रदेश के तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम पहुंचने लगे हैं। तीर्थयात्रियों ने सोमवार को सुबह तप्तकुंड में स्नान कर बदरीनाथ के सिंहद्वार पर मत्था टेका।


बता दे कि बदरीनाथ धाम के कपाट अभी बंद हैं, लिहाजा तीर्थयात्री अभी सिंहद्वार से आगे नहीं जा सकते हैं। धाम में इन दिनों मौसम सुहावना बना हुआ है। सुबह और शाम को यहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकारी और कर्मचारीगण यात्रा तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
बदरीनाथ के बस स्टैंड, विजयलक्ष्मी चौक और मुख्य बाजार में अधिकांश दुकानें खुल गई हैं। व्यवसायी अपनी दुकानों को सजाने में लगे हुए हैं। यात्रा पड़ाव पीपलकोटी, जोशीमठ, चमोली, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, गौचर, गोविंदघाट और पांडुकेश्वर में भी चहल-पहल शुरू हो गई है।
तो बाबा केदारनाथ की यात्रा पर आने के लिए भी केदारनाथ की तरफ सेकड़ो भक्तो का जथा ऋषिकेश से निकल चुका है।


जहा सरकार और प्रशासनिक अधिकारीयो का दावा है कि यात्रा को लेकर उन्होंने पूरे इंतज़ाम कर रखे है तो विपक्ष मै बैठी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रवक्ता गरिमा मेहरा का कहना है कि सरकार की तैयारिया यात्रा को लेकर बहुत अधूरी है।
जो काम अब तक पूरे हो जाने चाइए थे वो सब आधे से भी कम धरातल पर उतरे है पर यहां की पूरी सरकार , अन्य राज्यो मे अपने नेताओं के लिये प्रचार कर वोट माग रही है उन्हें यात्रा से सरोकार नही।
तो वही टिहरी लोक सभा का निर्दलीय चुनाव लड़ चुके संत कथावाचक गोपाल मणि महाराज ने चार धाम यात्रा पर आने वाले भक्तों को सुभ कामनाये दी है इसके साथ ही चारो धाम की यात्रा में अभी अव्यस्था को बताते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए है ।फिर बात चाहे हवाई यात्रा पर अभी तक तस्वीर साफ होने की बात हो या, केदारनाथ पैदल मार्ग की खमियो की बात, तो अलवेदर रोड़ से सड़कों के बुरे हाल पर चिंता जताई है कि सरकार को यात्रा मैं आने वाले भक्तों को कम से कम मूलभत सुविधाओं का ख्याल रखना होगा।
ओर आखिर क्यों सरकार केदारनाथ भगवान की यात्रा को माता वैष्णो देवी की यात्रा की तरह संचलित नही करती
आखिर क्यों नही जब भी हवाई यात्रा आरम्भ हो तो क्यो नही किराये को कम किया जाता है।वैसे कहते है कि डबल इंजन की सरकार है और हवाई यात्रा के किराए के दाम को खूब बड़ा रहे है अच्छा होता जो किराया माता वैष्णो देवी की यात्रा के दौरान हवाई सेवा के रूप मे लिया जाता है ठीक उसी प्रकार यहां भी किराया तय किया जाना चाइये।
कैबिनट मंत्री यशपाल आर्य ने कहा की सरकार ने पूरी तैयारी कर रखी है हर विभाग को पर्यटन मंत्री ने दिशा निर्देश दे रखे है हमारे अधिकारीयो की पूरी टीम चार धाम यात्र मार्ग से लेकर चारो धाम तक फीड बेक ले रही है सब व्यवस्था पूरी है जो कही कम भी होगी तो बद्रीनाथ ओर केदारनाथ कपाट खुलने तक सब व्यवस्था पूरी कर ली जाएगी। यशपाल आर्य ने कहा कि
विपक्ष बेवजह यात्रा का आगाज होते ही घटिया राजनीति पर उतर आया है।
यात्रा पर सियासत ना हो तो अच्छा।
बहराल बोलता है उत्तराखंड
ख़बरदार यात्रा चार धाम पर ना हो सियासत क्योकि ये यात्रा लगभग 30 लाख लोगों की रोजी रोटी से जुड़ी हुई है । उन लोगो की जीविका सिर्फ यात्रा पर ही निर्भर है 4 महीने कमाते है और साल भर के राशन की व्यवस्था , ओर सुख दुःख, शादी , बीमारी ,ओर पढ़ाई ,सब कुछ यात्रा के दौरान छोटे छोटे काम से कमाकर ही पूरे करते है।
फिर चाहे बात घोड़े खचर वालो की हो या पालकी वालो की, चाय वाले कि दुकान हो या दाल भात वाले भाई की,
या फिर उत्तखण्ड के पारंपिक उत्पाद, बेचने वालों की हो या हर उस व्यक्ति की जो इन दिनों का इंतज़ार करता है कि यात्रा कब आरंभ हो और वे लोग फिर अगले साल तक रोटी इंतज़ाम कर सके।
सियासत से मतलब है बेवजह के आरोप लगाना ,जो सत्य है और किया जा सकता था या हो सकता है उस पर बात होनी चाइए।
ना कि आरोप एक दूसरे पर लगाने से। इससे सन्देश ठीक नही जाता और भक्तो पर प्रभाव पड़ता है
दूसरी बात पहाड़ी राज्य की सड़क अक्सर बरसात आने पर ,टूटती रहती है ,चटान भी खिसकती रहती है। भूस्खलन भी होता रहता है।पर अक्सर खबरिया चैनलों में उन तस्वीरों को इस कदर बार बार दिखाया जाता है जिससे लोग सहम जाते है।जबकि हकीकत ये है कि यात्रा मार्ग के हर डेंजर जोन तक प्रसाशनिक अमला , ओर उनकी मशीने तैयार रहती है जो कम से कम समय मे सड़कों की अव्यवस्था को ठीक कर देती है।पर उसको कोई ठीक से ना बताता है ना कोई ख़बरिया बताता है।
ओर बार बार बरसता होने पर उन्ही पुरानी तसवीर को दिखा कर आने वाले भक्तों के मन मे सन्देह पैदा करता है जो ठीक नही।
बहराल आप सबको  यात्रा चार धाम की  आने पर बोलता उत्तराखंड की बहुत बहुत सुभकामनाये।
देवभूमि मै आप सबका स्वागत है।



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