यहा रिजल्ट मिलता है क्योकि पहाड़ का दर्द इनके सीने में भी है !

राज्य सभा सांसद पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी जिस काम में हाथ डालते है उसको पूरा होने तक लगातार प्रयास करते है और उनके द्वारा किये जाने वाले प्रयास का फल भी सुभ ही होता है। बलूनी ने लगातार अपने राज्य हित के निरंतर प्रयास की बदौलत ही पूरे गढ़वाल ओर कुमाऊँ मे अपनी लोकप्रियता का ग्राफ़ बड़ा दिया है आज अगर सासंदो के तौर पर एक सर्वे ओर आंकलन हो जाये तो बलूनी को जनता सब सांसदों से आगे रखे । उन सांसदों से भी जो अब अपना कार्यकाल पूरा होने के समय तक भी अपनी सांसद निधि खर्च नही कर पाये तो कुछ सांसद पूरी सांसद निधि भी केन्द्र से नही ले पाए।

आपको बोलता उतराखंड ने  21 सिंतबर को  बताया था कि  भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी ने  एक अभूतपूर्व फैसला लिया जो आज तक किसी ने नही किया वो अनिल बलूनी ने किया और ये फैसला  था  कि उत्तराखंड राज्य के एक गैर-आबाद गाँव/निर्जन गाँव, ग्राम – बौर (ब्लॉक दुगड्डा, जनपद पौड़ी गढ़वाल ) को उन्होंने गोद लेने का फैसला किया है। पहाड़ पुत्र अनिल ने कहा कि इस गाँव को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लिया गया है, इसके बाद अन्य ऐसे गैर-आबाद गाँव, जहां कोई भी आबदी नहीं रहती है, उनको भी इसी मॉडल पर आबाद करने के प्रयास किये जायेंगे। इस गाँव को पुनर्जीवित करने के लिए मूलभूत सुविधाओं बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़ा जाएगा ताकि गाँव पुनः पुनर्जीवित होकर अपने पूर्व के स्वरूप में आबाद हो सके। इस संबंध में शीघ्र ही इस गाँव के प्रवासियों के साथ पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी बैठक करेगे ।

बोलता उतराखंड को पहाड़ पुत्र बलूनी ने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड में पलायन की समस्या काफी भयावह बनती जा रही है, आप लगातार देख रहे हो और ख़बर लिखते रहते हो कि तमाम गाँव धीरे-धीरे खाली होते जा रहे हैं और राज्य की महान संस्कृति विलुप्ति के कगार पर है। इसलिए अब हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने राज्य की विशिष्ट संस्कृति और परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए कटिबद्ध हों। पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी ने कहा कि निर्जन गाँवों को आबाद करने का यह प्रयास उत्तराखंड के लिए मील का पत्थर साबित होगा। जो नौजवान रोजगार के लिए गाँव छोड़ने को मजबूर हुए हैं, उन्हें वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराकर ‘रिवर्स माइग्रेशन’ के द्वारा गाँवों को आबाद करने की शुरुआत की जा रही है। 
इसके साथ ही राज्य सभा सांसद पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी ने कहा कि बौर गांव को अंगीकृत करने के साथ-साथ इन गैर-आबाद ग्रामों के पुनर्जीवन की कार्ययोजना भी तैयार कर ली गई है, जिसके तहत वे उत्तराखण्ड के प्रवासी परिवारों/संगठनों के बीच जाकर संवाद करेंगे। उत्तराखंड के लाखों प्रवासी जो कि दिल्ली, लखनऊ, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर, जयपुर, मुंबई आदि शहरों में जाकर बस गए हैं, उन सबसे चर्चा कर गांव के पुनर्जीवन हेतु अनुरोध किया जाएगा और उनकी मांगों के निराकरण हेतु प्रयास किया जाएगा। साथ ही प्रवासियों से संवाद अभियान के माध्यम से उत्तराखंड के कौथीग (मेले), ऋतुपर्व और पारंपरिक आयोजनों को पुनः पुनर्जीवित करने के लिए संपर्क किये जायेंगे।
आपको बता दे कि राज्य के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा कि इस तरह से एक निर्जन गाँव को गोद लेने और उसके पुनर्विकास का प्रयास किया गया हो। ओर यह अपने आप में एक अनूठा कदम है।

ओर अब रिजल्ट भी आने लग गया है  यानी महज 15 दिन  के अंदर जो  आपके सामने है।

बहराल बोलता उत्तराखंड ने सारी बात आपके सामने  रख दी है जिसको पढ़कर समझ कर आप भी कहेंगे कि  हा पहाड़ पुत्र बलूनी  जिस काम को भी अपने हाथ में लेते है उसे  जल्द से जल्द पूरा करने के  लिए पूरा प्रयास करते है और देवी देवताओं की किर्पा से उनके प्रयास सफल भी  हो रहे है लोकप्रिय  राज्य सांसद  अनिल बलूनी को बहुत बहुत सुभकामानये  की आप  निरंतर इस तरह जन हित ओर पहाड़ के लोगो के  दर्द को दूर करने का प्रयास लगातार करते रहेंगे ।

आपको बता  दे कि राज्य सासंद  अनिल बलूनी ने कहा कि  मित्रों, मुझे यह सूचित करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि माननीय केंद्रीय मंत्रियों द्वारा निर्जन बौरगांव को आबाद करने की दिशा में सहयोग देने के वचन के बाद देश के प्रतिष्ठित होटल उद्योग समूह हयात रीजेंसी ने आगे हाथ बढ़ाया है। बौरगांव के विकास में अब हयात होटल समूह की इकाई एशियन होटल भागीदार बनेगी। समूह के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक श्री एस के जटिया जी का पत्र उत्साह बढ़ाने वाला है। उन्होंने निर्जन गांव को आबाद करने के अभियान को रिवर्स माइग्रेशन, पलायन रोकने, युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने के साथ साथ उत्तराखंड में पर्यटन की अपार संभावनाओं के विकास से जोड़ा है और उन्होंने बौरगांव में होमस्टे के अभियान में भागीदार बनने की इच्छा व्यक्त की है।
मैं हयात समूह और जटिया जी का आभार व्यक्त करना चाहूंगा जिन्होंने गैर व्यावसायिक भावना से आगे आकर हमारे अभियान में साथ दिया।

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