यहा सीएम त्रिवेन्द्र का नही बल्कि विधायक का है बोल बाला !

राज्य की सरकार ने कहा कि तीन सालों तक मलिन बस्तियों को तोड़ा नही जाएगा मतलब साफ है इस डबल इज़न की सरकार पर दबाव देखा जा सकता है वोट बैंक का क्योंकि अगर ये बस्तियां उजड़ जाती तो कांगेस के नेता लोग इस सरकार को सड़क पर ले आते जिसे सरकार भी जानती थी और बीजेपी के विधायक भी यकीन नही होता आपको इस भीड़ को देखिए                ये लोग अपने नेता जी को धन्यवाद बोल रहे है उन्हें कंधे पर उठा कर उमेश शर्मा काऊ जिंदाबाद के नारे लगा रहे है क्योकि इन लोगो का मानना है कि अब हमारे घर को बचा लिया विधायक् जी ने                             ओर बात भी सही है विधायक जी ने ही बचाया है सब कुछ तभी तो ये लोग। खुश है नाच रहे है क्योकि अब इनके मकान नही टूटेगे जी भाई हम तो यही कहेंगे कि मुख्यमंत्री से बढ़कर है विधायक उमेश शर्मा काऊ क्योकि इन्होंने ही एक बार रायपुर से त्रिवेन्द्र रावत को चुनाव हराया था ।।         और अब जब केबिनेट ने फेशला लिया तो पूरी रायपुर विधान सभा की जनता ने काऊ जी को सर माथे पर बैठा लिया ओर त्रिवेन्द्र सरकार को चिड़ा दिया इतनी भीड़ तो कभी त्रिवेन्द्र रावत के जयकारों के लिए भी एकत्र नही हो पाई जिंतनी काऊ के घर पर मौजूद थी आपको बता दे कि इन बस्तियों पर ये रहा फैसला
मलिन बस्तियों को लेकर अध्यादेश लाया गया।
राज्य के अंदर 2016 में मलिन बस्तियों के लिए पूर्व की सरकार ने कानून बनाया था जिसमें एक मकान को भी उस एक्ट के तहत मलिकाना हक नहीं मिल सकता था
नगर निकाय और प्राधिकरण में निर्माण पुनर्वास होगा।
उत्तराखंड नगर निकाय और प्राधिकरण के लिये विशेष प्राविधान अध्यादेश 2018 लागू होगा। 
जबतक नियमावली नहीं बनेगी तबतक पुरानी नियमावली लागू रहेंगी।
11 मार्च 2016 तक कि यथास्थिति रखने के आदेश।
2016 के बाद के सभी अनाधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई होगी।
सार्वजनिक जगहों पर सड़क और गलियों में निर्माण नहीं होगा।
3 साल में बनेगी नियमावली तबतक मलिन बस्तियों को तोड़ा नहीं जाएगा।
इसको लेकर विधानसभा में सरकार लाएगी एक्ट।
आज कोर्ट में देंगे जवाब। 
सिर्फ मलिन बस्तियों को लेकर है फैसला जबकि बाकी ध्वस्तीकरण जारी रहेगा। बस फिर क्या नेता जी को धन्यवाद तो बनता है क्योकि बसाने वाले है काऊ ना कि इनको हटाने वाले और काऊ की जीत मे इनका ही योगदान सबसे ज्यादा रहता है याबी बात साफ हो गई है कि त्रिवेन्द्र रावत को अगला चुनाव भी डोईवाला से ही लड़ना होगा क्योंकि यहां तो काऊ का बोल बाला है क्योंकि इन बस्तियों का वोट तो काऊ को ही मिलेगा ये तय है हा हा हा वोट वाली बस्तियां है जो जुगाड़ से आबाद हई है बोलता उत्तराखंड़ अब जल्द ही एक एक बस्ती मे रहने वाले लोगो की कहानी आपके सामने लाएगा की कितने कितने मे इनको किस किस ने जगह बेची ओर कोन है बस्तियां बसाने वाला ,नाले खाले बेचने वाला मास्टर माइंड

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