डबल इंजन के पास धन ही धन, विकास के काम कब पकड़ेंगे रफ्तार ?

 

सूबे की त्रिवेंद्र सरकार के कामकाज़ पर भले ही विपक्ष में बैठी कांग्रेस ये कह रही हो की ये सरकार सिर्फ जुमलेबाज़ों की सरकार है और त्रिवेंद्र राज में अब तक कुछ भी काम होता दिखाई नहीं दिया, तो दूसरी तरफ 9 महीनों में करीब 8 हज़ार करोड़ के प्रस्तावों पर मुहर लगी है। इनमें से करीब आधे प्रस्ताव पास होने वाले हैं। ये करीब 4 हजार करोड़ के हैं जो जल्दी पास होंगे यह प्रस्ताव पर्यटन, ऊर्जा, शहरी विकास और उच्च शिक्षा की योजनाओं से जुड़े हैं। जिसमें पास हुए प्रस्ताव मुख्य हैं, पेयजल और सीवरेज से जुड़े दो प्रस्ताव, अर्ध शहरी इलाकों के विकास के लिए 9 हजार करोड़ जो परियोजना वर्ल्ड बैंक की मदद से चलेगी, 13 सौ करोड़ का सीवरेज से जुड़ा प्रोजेक्ट, आपदा प्रबंधन और उद्योंगों के लिए 7-7 सौ करोड़ के दो प्रस्ताव, तकनीकी शिक्षा के लिए 400 करोड़ के प्रस्ताव स्वास्थ्य, और ग्रामीण विकास , कृषि आदि से जुड़े अन्य प्रस्ताव।

वहीं लगभग 4 हज़ार करोड़ के प्रस्ताव जो पास होने हैं उनमें टिहरी में पर्यटन विकास के लिए 1200 करोड़, रोपवे परियोजनाओं के लिए 1000 करोड़, शहरों में अवस्थापना सुविधाओं के लिए 1000 करोड़, ऊर्जा विभाग के लिए 1000 करोड़ और महाविद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं के लिए 900 करोड़ पास होने हैं।

वहीं राज्य में विभागों पर गौर करें तो सरकार ने विभागों के लिए 20 फीसदी तक का बजट बढ़ाया है। जिसमें 01 अप्रैल-16 से 31 जनवरी-17 के बीच कुल 20 हजार करोड़ की रकम जारी की, इस साल इसी अवधि में 24 हजार करोड़ का बजट जारी, सबसे ज्यादा 4892 करोड़ रुपये शिक्षा के लिए, 1457 करोड़ ग्रामीण विकास के लिए साथ ही 1517 करोड़ का बजट पीडब्ल्यूडी के लिए जारी हुआ, स्वास्थ्य के लिए 811 करोड़, पीने के पानी के लिए 633 करोड़ और कृषि के लिए 373 करोड़ है।

बहरहाल डबल इंजन की सरकार के राज में विकास के कामकाजों के लिए धन की कोई कमी नहीं होनी चाहिए साथ ही ज़ीरो टॉलरेंस की बात करने वाले मुखिया को देखना होगा की बजट की पूरी राशि समय पर ख़र्च हो और विकास के कामकाजों में गुणवत्ता झलकती नज़र आये। अगर ऐसा नहीं हुआ तो विपक्ष में बैठी कांग्रेस डबल इंजन का पसीना निकालने से पीछे नहीं हटेगी।

 

 

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