विजय बहुगुणा ओर माला राज्य लक्ष्मी शाह लापता है! टिहरी लोकसभा से क्यो आई ये बात ?

पूरा पहाड़ गुस्से की आग मे सुलग रहा था विशेष रूप से पूरी टिहरी लोकसभा की जनता क्या महिला क्या पुरूष ओर क्या छात्र छात्राओं की रैलियों ने बात दिया था कि वो गुस्से में है । पुलिस पर बड़ा दबाव था पहाड़ी जिलो मे माहौल ओर ना बिगड़े उसके लिए नेटवर्क सेवाओ को भी बंद कर दिया गया था जो पुलिस प्रशासन का अच्छा निर्णय था और फिर अंत मे हवस के भेड़िए को पुलिस ने पकड़कर सलाखों के अंदर डाल ही दिया जिसके बाद पुलिस के अधिकारियों से लेकर सरकार ने राहत की सांस ली ओर पहाड़ का गुस्सा शांत हुवा क्योकि मासूम का हत्यारा अब सलाखों के अंदर है लेकिन अभी भी उत्तराखंड मासूम के हत्यारे को फाँसी की सज़ा की माग लगातार कर रहा है ।.            

बहराल इन सब के बीच एक बात पूरे टिहरी लोकसभा की जनता के बीच गूँजती रही ओर वो बात थी कि कहा थी उनकी या कहा है उनकी टिहरी लोकसभा की महिला सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह उनके पहाड़ की बेटी अब दुनिया मे नही रही दुष्कर्म तक मासूम के साथ हो गया पर ना तो इन सासंद का कोई बयान सुनाई दिया इस घटना पर ओर न इनकी मौजूदगी कही पर दिखाई दी इस बात से टिहरी लोक सभा की जनता नाराज़ है।  यही नही माला राज्य लक्ष्मी शाह को एक समय के दौरान राज्य सभा का रॉ मैटीरियल बोलने वाले उस समय के कांग्रेस के नेता ( जो आज बीजेपी की शान है ) ठीक पहचान आपने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की बात कर रहा हूँ जो कहते है कि टिहरी लोकसभा की जनता का हर दर्द दुःख उनका अपना है वो भी इस पूरे दुःखद प्रकरण से कनी काट गए।  

ना विजय बहुगुणा ओर ना उनके साकेत बहुगुणा दिखे ओर ना कही सुनाई दिए गए जनता का उन पर भी गुस्सा साफ झलक रहा था उनकी माने तो ना विजय बहुगणा ना माला राज्य लक्ष्मी शाह और ना टिहरी लोकसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी करने वाले वो सभी राजनेता मोन ही गए थे हम्हे इस दुःख मे अकेला छोड़ कर, ख़ास कर जब पहाड़ गुस्से में हो तो वहां के बड़े नेताओं का काम होता है उनके दुःखों को बाटाना ओर उनको समझाना पर ये नेता तो नदारद ही रहे टिहरी लोकसभा की जनता ने कहा कि कोई बात नही आने दो इनको फिर वोट मांगने इस बार टिहरी लोकसभा की जनता इन नेताओं को सबक सिखाने का काम करेगी  

कांग्रेस के उन नेताओं को भी जो हमारे पास रहकर भी हमारे दर्द को कम करने तक नही आये । बहराल ये पूरी बात टिहरी लोकसभा की जनता की थी जो कही चाय की दुकान ओर सुनाई दे रही थी तो कही खाने के डाभे पर जहा भी चार पांच लोग खड़े हो जाते वो बीड़ी सुलगाते बस यही सब कुछ कह रहे थे। 

बोलता है उत्तराखंड़ की आखिर कहा है विजय बहुगणा उनके अपने इस टिहरी लोकसभा की जनता उनको याद कर रही थी पर वो लापता हो गए । वही हाल माला राज्य लक्ष्मी शाह का भी देखने को मिला ।और यही वो दो नेता है जो इस बार फिर आगामी लोकसभा के चुनाव मे टिहरी के मैदान मे कूदने को बेताब है फिर चाहे खुद लड़े या अपने चाहने वाले को लड़वाये पर रहेगे तो टिहरी के मैदान मे ही । वही अपने आप को पहाड़ी नेता कहने वाले प्रीतम पवार हो या दिनेश धने या फिर किशोर से लेकर राजकुमार ओर माल चंद तक ओर वो तमाम नेता जो टिहरी लोकसभा के दर्द को अपना दर्द कहते है उनके दुःखो को अपना दुःख कहते है उन सब मे अधिकांश ये नेता गायब ही दिखाई दिए। इस पूरे प्रकरण पर राजनीति नही होनी चाइए। पर जो टिहरी लोकसभा की जनता इन पर विस्वास करती है उनका कहना था कि हमको अब ऐसे नेताओं की जरूरत नही जो दिल्ली मे बैठ कर हमारी लाचारी ओर बेबसी को देख रहे थे पर हमारे आंखों से निकलने वाले खून के पानी तक को साफ करने तक ना आये ओर ना उनका कोई बयान सुनाई दिया ताकि हम भी तो कहते कि कोई है हमारा भी अपना क्योंकि जब परिवार मे दर्द होता है घर का मुखिया ही उनके दर्द को कम करता है उनके पास आता है और उन्हें समझाता है पर हमारे मुखिया तो माला राज्यलक्ष्मी शाह से लेकर विजय बहुगुणा रहे है और है फिर ये क्यो हमसे दूर हो गए हमहे इस दुख के समय अलग छोड़कर अब हम भी इनको समय आने पर बताएंगे कि लोकतंत्र क्या होता है। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here