विजय बहुगुणा की चुपी किसी आने वाले तूफान का संकेत तो नही !

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा आजकल राजनीति मे सक्रिय नही दिखाई दे रहे है जनता पूछ रही है कि आखिर कहा है बीजेपी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा काफी समय से विजय बहुगुणा का राज्य हित मे ना कोई बयान आया ना कोई बार त्योहार पर उनका जनता के नाम संदेश हा जब राज्य सभा जाने के लिए नाम निकल रहे थे तब विजय बहुगुणा चर्चा मे थे लेकिन अनिल बलूनी को बीजेपी ने राज्य सभा का टिकट देकर विजय बहुगुणा का पत्ता काट दिया था बस तब से अब तक कही भी विजय बहुगुणा का नाम अब सुनाई नही दे रहा है क्या बीजेपी के बड़े नेताओं ने बहुगुणा को ठंडे बस्ते में डाल दिया है.                          या फिर विजय बहुगुणा शांत रहकर सियासत मै आने वाले दिनों मे तूफान ला सकते है क्या बहुगुणा की ये शांति किसी तूफान का सकेत है माना जा रहा है कि बहुगुणा बीजेपी से अपने लिए टिहरी से लोकसभा का टिकट माग रहे है पर सवाल यही है कि फिर बीजेपी केसे माला राज्य लक्ष्मी शाह का टिकट काट देगी यही नही विजय बहुगुणा तो साकेत बहुगुणा को भी कही ना कही फिट करना चाहते है पर अभी उनकी चल नही रही है या फिर कह लो वो जानकर चुप बैठे है बात जो भी ही पर ये हम मानने को तैयार नही की बहुगुणा को राज्य मे होने वाले काम काज से लेकर हर सियासत की जानकारी ना हो विजय बहुगुणा भले ही खामोश है                          लेकिन राजनीति के जानकार कहते है कि बहुगुणा बोलते कम है और बयान भी बहुत कम देते है वो बोलने से ज्यादा कुछ करने मे विस्वास रखते है इसलिए ये नही माना जा सकता की बहुगुणा चुप होगे वो कही भी रहकर राजनीति का कोन सा दाव को सी चाल कहा बैठ कर चल दे कोई नही जानता अगर आपको 18 मार्च की घटना याद दिलाये तो आपको मालूम होगा कि विधान सभा मे जब उस दौरान काग्रेस के नेताओ ने हरीश रावत से बगवात की थी तो उस पूरे रोल में हरक सिंह रावत का नाम उछला था लेकिन जानकार ये कहते है कि उस समय सभी बगवात करने वाले नेता अपना नेता विजय बहुगुणा को मान कर चल रहे थे और वो दौर भी आया जब सबने मिकलर बीजेपी को ज्वाइन किया उससे पहले हरीश रावत का जो स्टिंग हुवा था उसको भी सबसे पहले फ्रंट मे आकर साकेत बहुगुणा ने दिल्ली मे प्रेंस कांफ्रेंस कर मीडिया को बताया था                                         हम ये बात इसलिए बोल रहे है कि विजय बहुगुणा ने कभी खुद फ्रंट पर आकर सियासत का कोई दाव नही खेला पर जो लोग फ्रंट पर आए उनके नेता बहुगुणा ही रहे और आज भी होगे इसलिए जानकार कहते है कि भले ही बीजेपी ने बहुगुणा को ठंडे बस्ते में डाल दिया हो तो भी बहुगुणा चुप नही बेठ सकते वो भले ही शांत है भला वो क्यो नही चाहेगे की एक बार फिर उनको राज्य की कमान मिले भले ही समय जितना भी लग जाये वैसे अभी तो ये भी मालूम नही की बीजेपी उनको टिहरी से लोकसभा का टिकट देगी भी या नही ख़बर है कि बहुगुणा की बीजेपी हाईकमान अमित शाह से सीधी बात है और बहुगुणा समय समय पर अमित शाह से मिलते भी रहते है तो क्या मान लिया जाए कि बहुगुणा को टिकट मिलेगा या बहुगुणा के लिए बीजेपी ने कुछ और सोच रखा है खेर जो भी हो पर आने वाले दिनों मैं भी विजय बहुगुणा शांत दिखाई देंगे या उनकी इस शांति के बाद सियासी तूफान आएगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा क्योकि ये वही बहुगुणा है जिन्होंने हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनने के बाद कभी चैन से नही रहने दिया और ये बात भी सही है कि जब बहुगुणा मुख्यमंत्री थे तव हरीश रावत के पत्र लगातार उनके पास आते थे इसलिए विजय बहुगुणा भले ही आजकल शांत है पर उनको अपना नेता मानने वाले ये बात बिल्कुल भी पचा नही पा रहे है बीजेपी के बड़े नेताओं ने बहुगुणा जी को अभी किनारे कर रखा है                        फिलहाल उनकी नज़र अभी टिहरी लोकसभा पर लगी है कि उनके नेता को यहा से टिकट मिलता है भी या नही क्योकि जानकार कहते है कि फिर यही राज्य की राजनीति मे कुछ नए मोड़ आ सकते है

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