वन मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री जी क्या पहाड़वासियो की जान यू ही जाती रहेगी?

पुरोला। गोविंद पशु विहार क्षेत्र के तुमणीय कोट तोक में भालू ने एक व्यक्ति पर हमला कर घायल कर दिया।

घायल को यहाँ सीएचसी में भर्ती करने के बाद चिकित्सकों ने देहरादून रेफर कर दिया है।

गोविंद पशु विहार क्षेत्र के तुमणीय कोट तोक में ढाटमीर गाँव निवासी पतीलाल48वर्ष पुत्र मदनू लाल बुधवार सायं 6 बजे अपने घर के पास खेतों में काम कर रहा था कि अचानक भालू ने उस पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया।

वहाँ आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह भालू को भगाकर घायल को पीएचसी मोरी लाए, जहाँ चिकित्सकों ने उसे पुरोला रैफर किया।

पुरोला सीएचसी से भी चिकित्सकों ने उसे देहरादून रेफर कर दिया है।

कांग्रेस पार्टी के ब्लाक अध्यक्ष ढाटमीर गाँव निवासी राजपाल रावत ने गोविंद वन्य जीव पशु विहार प्रशासन से घायल को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है।
आपको बता दे कि पहाड़ो मे बाघ हो या भालू इनके आतंक से पहाड़वासियों को राहतत नही मिल तभी तो कल सदन मे 
नाराज़ भाजपा विधायक ने धमकी दे डाली वो बोले एक हफ्ते में दे दूंगा इस्तीफा।
आपको मालूम ही है कि विधानसभा सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही भी हंगामेदार शुरुआत के साथ हुई। सदन के भीतर अपने ही विधायकों ने एक बार फिर अपने सवालों से सरकार के मंत्रियों को असहज कर दिया तो वहीं बीजेपी के ही एक विधायक ने इस्तीफे की धमकी तक दे डाली।
आपको बता दे कि सदन के प्रश्नकाल के बीच बागेश्वर से भाजपा विधायक चंदन राम दास ने धमकी तक दे दी कि वो एक हफ्ते के भीतर अपना इस्तीफा दे देंगे। दरअसल चंदन राम दास अपनी विधानसभा में गुलदार के आतंक से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस कदम न उठाए जाने के नाराज़ हैं। उन्होेंने अपनी नाराज़गी जाहिर करते हुए एक हफ्ते में इस्तीफा देने की बात कही साथ ही गुलदार के आतंक से बागेश्वर बाजार बंद होने की भी बात कही।
बता दें कि बीते रोज ही बागेश्वर में गुलदार ने एक 6 साल की मासूम को अपना शिकार बनाया था,,,,इस घटना से गुस्साए ग्रामीण वन विभाग पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैें।
बहराल गुलदार के आतंक से पहाड़ वासी परेशान है पर ना सरकार को कोई मतलब ना वन महकमे के मंत्री हरक सिंह रावत को कहना गलत ना होगा कि मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य विभाग में ओर वन महकमे के मंत्री हरक सिंह रावत के विभाग से पहाड़ की जनंता नाराज़ है

आपको मालूम ही है  की अभी तक लगभग 300 से ज्यादा लोगो को बाघ अपना शिकार बना चुका है। तो दूसरी तरफ सरकार के प्रयास के बावजूद भी पहाड़ बीमार है स्वास्थ्य सेवाओं मे सुधार नही आ रहा है। जब देहरादून का दूंन मेडिकल अस्पताल ही  खुद  बीमार  है तो  राज्य के पहाड़ी अस्पतालों की कहानी और गाँव वालों के दर्द को बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नही।

बस यही कहता हूँ कि वन मंन्त्री जी और स्वास्थ्य मंत्री जी क्या पहाड़ के लोग  यू ही अपनी  जान  कब तक देते रहेंगे ?

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