उत्तराखंड की जनता ने अपने पाँचो लोकसभा सांसद के लिए वोट दे दिया है अब उनके भविष्य का फैसला 23 मई को होगा कि जनता ने किसे सांसद बनाकर संसद तक पहुचाया ।
बहराल बोलता उत्तराखंड एक बात डंके की चोट पर कहता है की अबकी बार जो भी सांसद बनकर राज्य से संसद पहुचे वे पहाड़ पुत्र राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी से मिलना और उनसे सीखना।
क्योंकि सीखने की ना कोई उम्र होती है।और ना कोई कुछ सीखने से छोटा हो जाता है। ओर सीखता वही है जिसे कुछ करना होता है। करने से मतलब विकास।
बोलता है उत्तराखंड की अबकी बार 23 मई को चुने जाने वाले पाँचो सांसद सबसे पहले पहाड़ पुत्र अनिल ब्लूनी के पास जाना और उनसे पूछना की सर आप हम्हे बताए हम अपनी सांसद निधि को विकास कार्यों के लिए कैसे ठीक से खर्च करे, कैसे प्रस्ताव बनाये, हम लोकसभा मे राज्य हित के लिए कोन से सवाल उठाए, हम कैसे पहाड़ के विकास के लिए अपने सांसद वाले पद का सही और उपयोग करे, हम कैसे राज्य के मूलभूत सुविधाओं के लिए केन्द्र के मंत्रियों को बताकर ,अफसरों को बता कर उसका वो हल निकाले ताकि योजनाओ को धरातल पर अमलीजामा पहना कर उत्तरा जा सके।
आदि आदि।


बुरा ना माने नए बनने वाले उत्तराखंड से सांसद जी । क्योकी बोलता उत्तराखंड जानता है की पिछले 5 सालो मे पाँचो लोकसभा सीट से कितनी सांसद नीधि केंद्र ने मंजूर की , कितनी आई ,कितनी खर्च हुई, ओर कितनी नही आई सवाल महज 125 करोड़ का नही बल्कि विकास का है।
अगर राज्य के पिछले पाँच साल तक सांसद रहने वाले पाँचो सांसद 125 करोड़ मै से 100 करोड़ भी रिलीज करा पाते और 80 करोड़ भी धरातल पर उतरता तो बहुत कुछ हालत स्वास्थ, शिक्षा , स्वरोजगार, बढ़ते पलायन , पर्यटन के सुधरते।
पर ये हुवा नही खेर जाने दो पुरानी बातें बस यही कहेंगे कि अब 23 मई के बाद जो भी उत्तराखंड का सांसद बने ।और वो विकास को प्रथमिकता मै रखता है तो पहाड़ पुत्र राज्य सभा सांसद से जरूर सीखना ।ताकि। अब तक के सांसदों के दामन पर लगे कीचड़ को काफी हद तक बनने वाले सांसद साफ कर सके।
इन 18 सालो मै सिर्फ पहाड़ पुत्र ब्लूनी ही है जिन्होंने अभी तक राज्य सभा सांसद रहते महज अपने कम कार्यकाल में वो सब कर दिखाया है ।जो आज तक राज्य गठन से लेकर अब तक के सांसदों ने नही किया।

बोलता उत्तराखंड लगातार इस बात को डंके की चोट पर कह रहा था और आगे भी कहता रहेगा ।कि पहाड़ पुत्र लोकप्रिय राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी का हर क्षण राज्य के विकास के लिए सोचने में , कुछ नया करके दिखाने मे जाता है। यही वजह है कि उन्होंने अपने मात्र 11 महीने से भी कुछ दिन कम के कार्यकाल मै अभी तक उत्तराखंड के लिए 12 से अधिक बड़े काम करके दिखा दिए । उन्होंने बता दिया कि अगर आप ठान ले तो कुछ भी नामुनकिन नही।
ओर बोलता उत्तराखंड की अब तक कि पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी से जुड़ी हर खबर पर कुछ दिन पहले उत्तराखंड आये केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी अपनी मोहर लगा दी थी।
उन्होंने राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी की मुक्त कंठ से ख़ूब प्रशंसा की। उन्होंने प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर बलूनी की सक्रियता को सराहा गोयल अपने अंदाज मे बोले थे कि , ‘वे बहुत तंग करते हैं, अगली बार ऐसे तंग करने वाले सांसद मत भेजा करें।’
गोयल ने बीते मंगलवार को उत्तराखंड एक होटल में प्रबुद्धजनों के सम्मेलन को संबोधित किया था । इसमें पहाड़ पुत्र बलूनी भी मौजूद थे। इस दौरान पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी ने जहां गोयल को बड़ा भाई और दिल्ली में अपना लोकल गार्जियन बताया तो वहीं जब केंद्रीय मंत्री की बारी आई तो उन्होंने भी बलूनी के काम की जमकर तारीफ की।

उन्होंने कहा कि जब वे बलूनी को जानते नहीं थे और नए आए थे तब हम बात करते थे कि नरेंद्र मोदी जी किसको उठाकर ले आए हैं और पार्टी का राष्ट्रीय मीडिया इंचार्ज बना दिया है। इसे इस रूप में समझा जा सकता है कि जिस दल की केंद्र में और देश के 15-16 राज्यों में सरकारें उस समय रही हों, उसके मीडिया की जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण होती है
लेकिन अनिल बलूनी ने जिस खूबसूरती, जिम्मेदारी और प्रभावशाली ढंग से काम संभाला, उससे उत्तराखंड का नाम भी रोशन किया है। रेल मंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति गर्व से कह सकता है कि बलूनी का पार्टी की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने, सरकार, पार्टी और मीडिया के बीच समन्वय बनाने में बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने बलूनी के स्वभाव की तारीफ की। साथ ही कहा कि बलूनी हंसमुख स्वभाव के हैं, उन्हें हैरानी होती है कि वे कभी नाराज नहीं होते ।
सुना आपने पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी खुद की लकीर खीचने मै विस्वास रखते है ना कि दूसरी के खिंची लकीर को मिटाने की ।
ओर यही वजह है कि लोकप्रिय पहाड़ पुत्र बलूनी के राजनीतिक विरोधियों के पास इस समय जलने भुनने के सिवाय कुछ काम नही ओर वे कर भी क्या सकते है।
पहाड़ पुत्र बलूनी जी को बहुत बहुत सुभ कामनाये। आप इसी तरह राज्य के विकास के लिए आगे निरन्तर काम करते रहे।



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