दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारा झटका लगने का असर आजकल सोशल मीडिया पर देखा जा रहा है
ख़ास कर उत्तराखंड मै
यहा तो शोशल मीडिया ने मनो जैसे मुख्यमंत्री को बदलने की कसम ही खा ली हो!!
भाई क्या अब शोशल मीडिया बदलेगा क्या मुख्यमंत्री ??
या बनाएगा??
हर कोई कहने लगा है सोशल मीडिया पर कि देखो मुख्यमंत्री बदल रहै है !
अगर कोई ये कहे कि मिशन 2022 मैं फिर से सरकार बनाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र और हाई कमान को उत्तराखंड भाजपा मैं सरकार से लेकर संगठन मैं भरपूर जोश भरना होगा जिसके लिए
जल्द ही खाली मंत्रियों की कुर्सियों को तत्काल भरना होगा।
ओर जो मंत्री अब तक अच्छे नतीजे ना दे पाए हो अपने विभाग मैं उनको उस विभाग से मुक्त करना या फिर किसी नये चेहरे को मंत्री बनाना जरूरी हो
तो ये बात तो फिलहाल समझ मैं आती है ।
पर इस समय मुख्यमंत्री बदलना ओर फिर किस आधार पर?
ये बदलने वाली बात उत्तराखंड की जनता की समझ से बाहर है
अब भले ही कुछ लोग दिल्ली चुनावों के परिणाम की बात करे या उससे पहले हुए विधानसभाओ के चुनावों की तो
नतीजों ने ये तो साबित जरूर किया है कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो को विधानसभा चुनावों में आगे रख कर जीत की गारंटी नही मिल सकती ।
लिहाजा प्रदेश की सरकार ओर उनके मुख्यमंत्री की साफ छवि, ओर काम काज के आधार पर ही जनता 2022 मैं वोट देने मतदान केंद्रों तक पहुचेगी।
ये बात भी काफी हद तक समझी जा सकती है ।
पर आप ने हवा इस कदर उड़ा रखी है कि मुख्यमंत्री बदलने वाला है या बदला जा रहा है??
भाई क्यो आखिर क्या किया त्रिवेन्द्र ने
जिसे देखो मुख्यमंत्री बदलने वाला है ! निज़ाम बदला जाने वाला है!
ओर नए नाम भी खूब हवा में तेर रहे है या कह लो चर्चाओं में है। लेकिन कुछ सवाल खुद बोल रहे है कि
आखिर भाई क्या किया त्रिवेंद्र ने जो कह रहे हो कि मुख्यमंत्री बदलने वाला है ।


1- क्या मुख्यमंत्री पर अब तक कोई आरोप लगा है? क्या मुख्यमंत्री ने कोई भ्रष्टाचार किया है
2- क्या मुख्यमंत्री की टीम के किसी मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है यह किसी का नाम भी सुनाई दिया है??
3 – क्या मुख्यमंत्री की परफॉर्मेंस काम के लिहाज से कहीं नज़र नही आ रही है?
4 – क्या मुख्यमंत्री के इन तीन सालो के नेतृत्व मैं भाजपा को चुनाव मे करारी हार मिली है ?
फिर चाहे नगर निगम/ पालिका के चुनाव रहे हो , या जिला पंचयात के/ या फिर राज्य मे हुए दो उपचुनाव , ओर महत्वपूर्ण लोकसभा के चुनाव पाँचो सीट। फिर से भाजपा को उत्तराखंड की जनता ने दी ये सोच कर की प्रदेश मे त्रिवेन्द्र ठीक और केंद्र में नरेन्द्र ।
5- क्या आज उत्तराखंड मैं पिछले तीन सालों मैं आपको अवैध खनन का खेल या फिर शराब माफियाओं का बोलबाला और भू माफियाओं का मकड़जाल आपको देखने को मिल रहा है या सुनाई दे रहा है??
6- या आपको कही मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र हाई फाई स्टाइल मैं दिखाई दिए कही पर आपको लगा कि ये त्रिवेन्द्र मुख्यमंत्री बनने के बाद बदल गया है ??
ओर भी बहुत से बात है वजन वाली ओर ये सभी वो सवालों है जिनके जवाब आप भी दे सकते है
अब अब आप सोचे कि आखिर क्यो बदला जाए त्रिवेन्द्र को / या जो बदलने की ख़बर वायरल हो रही है
1 क्या इसलिए त्रिवेंद्र को बदला जाए कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने भ्रष्टाचार पर काफी हद तक लगाम लगाई है?
2 –
क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र को इसलिए बदला जाए कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र को चमचागिरी और चापलूसी पसंद नहीं है?

3 – क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को इसलिए बदला जाए कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत सीधे-साधे हैं स्टाइलिश कपड़े नहीं पहनते हैं, सादगी उनकी दिखाई देती है और चप्पल पहनकर मुंबई तक का सफर कर आते हैं??

4- क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को इसलिए बदला जाए कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत अपने फैसले पर अडिग रहते हैं ओर राज्य के विकास के लिए दुर्गामी सोच रखते है ?

5 – क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को इसलिए बदला जाए कि मुख्यमंत्री रावत मीडिया मैं कम बोलते है । काम करने मैं विस्वाश रखते बजाय बोलने के
6 – क्या इसलिए बदला जाये मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र को की उनका चेहरा बनावटी नही है? हर समय आपको चेहरे पर फर्जी मुस्कान नही दिखती?,
7 – क्या इसलिए मुख्यमंत्री को बदला जाए कि उन्होंने अपने सभी मंत्रियों को साफ कह रखा है कि जरा सा भी भ्रष्टाचार के साथ किसी का भी नाम जुड़ा तो सीधे कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार रहे ?
8 – क्या मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को इसलिए बदला जाए कि अफसरशाही आज बेलगाम नहीं जितना कि राज्य के अंदर अक्सर देखा गया है
9 – क्या मुख्यमंत्री को इसलिए बदला जाए कि आज सचिवालय के अंदर भ्रष्टाचार का शोर सुनाई नही दे रहा है
प्रदेश में दो साल बाद चुनाव होने हैं। ऐसे में बीजेपी को निजाम बदलना खुद के लिए क्या भारी नही पड़ सकता है??
चूंकि प्रदेश में बीजेपी ऐसा करती ही रही है लेकिन तब कारण कुछ और थे। या तो उसके निजाम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, या फिर उसने अपनी छवि के लिए निजाम बदला था। लेकिन इसके बावजूद भी चुनावी नतीजा भाजपा के पक्ष में कभी नहीं रहा
फिर भी क्या इसलिए ही त्रिवेंद्र को हटाया जाए।
बहराल हमको तो राज्य के राजनेता हो या बुद्धिजीवी वर्ग समाजसेवी ,अधिवक्ता, अर्थशास्त्री ,वैज्ञानिक ,अध्यापक यही कहता हुआ नजर आ रहा है कि भाई प्रदेश में यह बार-बार मुख्यमंत्री बदलना ठीक नहीं अगर ऐसा हो रहा है या होगा तो प्रदेश के साथ खिलवाड़ होगा प्रदेश की जनता ने
भाजपा पर विश्वास जताकर उसे प्रचंड बहुमत दिया है 57 सीटें दी हैं और ऐसे में यदि भाजपा फिर मुख्यमंत्री बदलती है तो आम जनता का उससे विश्वास आगामी चुनाव में उठ जाएगा और आगे परिणाम भी सुखद नहीं रहेगे
लिहाजा किसी भी मुख्यमंत्री को 5 साल तक काम करने देना चाहिए ताकि फिर मुख्यमंत्री के पास कोई बहाना ना हो
ओर जनता उनके या उनकी सरकार के काम काज का आकलन कर फिर
अगले 5 साल के लिए अपनी
सरकार चुने।
याद रहे क्योकि चुनाव के दौरान जनता ही माईबाप होती है
उनकी जो आज विपक्ष में है या फिर सत्ता मे ।
ओर वैसे भी ध्यान रहे जब से त्रिवेंद्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने है तब से ही आज तक त्रिवेंद्र को हटाया जा रहा है कल त्रिवेंद्र को हटाया जाएगा , मुख्यमंत्री बदलने वाले है या फिर त्रिवेन्द्र के राजनीतिक विरोधियों के द्वारा समय समय पर लगातार असफल षडयंत्र किये जाते रहे है
जो आज भी जारी है बहराल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र 5 साल पूरे रहेगे, या फिर 2022 के बाद फिर से भाजपा की सत्ता आने के बाद मुख्यमंत्री बने रहेगे , या कल भाजपा के रणनीतिकारों को , हाईकमाम को कुछ भी फैसला लेना हो या नही ये उनका काम
पर जब शोशल मीडिया मुख्यमंत्री बना रहा है ,हटा रहा है , बदल रहा है , इस तरह की ख़बर वायरल हो तो कह सकते है कि
उत्तराखंड मैं अब क्या सोशल मीडिया मुख्यमंत्री बनाएगा ओर हटाएगा ।


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