ख़बर दुःखद है आपको बता दे कि आठ माह की गर्भवती महिला ने ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे किनारे बच्चे को जन्म दिया। पर उन्के नवजात को सही उपचार नही मिल पाया और इस अभाव के चलते बच्चे ने कुछ ही देर में दम तोड़ दिया।
ख़बर विस्तार से बुधवार को चमोली जनपद के घाट ब्लाक के घुनी गांव निवासी मोहन सिंह अपनी 8 माह की गर्भवती पत्नी नंदी देवी को प्रसव के लिए गोपेश्वर से बस से बेस अस्पताल श्रीनगर के लिए रवाना हुए थे
लेकिन खबर है कि नगरासू के बाद से महिला को बहुत तेज दर्द होने लगा ओर इस दौरान उनके पति ने सब कुछ सभला पर तिलणी में महिला को ओर तेज़ दर्द इतना तेज हुआ ओर महिला चिल्लाने लगे। जिसके बाद बस चालक ने बस रोक दी और उन्हें उतरने को कहा फिर
इस दौरान परिचालक द्वारा दंपति से किराये को लेकर बदतमीजी भी की गई लेकिन बस में सवार किसी भी महिला व पुरुष यात्री ने इसका विरोध नहीं किया। लाचार मोहन सिंह ने दर्द से कहराती पत्नी को बस से उतार दिया।
फिर इसके बाद उसी समय मोहन सिंह ने 108 को भी फोन कर दिया। जैसे ही महिला सड़क किनारे बैठने को हुई, उसे तेज रक्तस्राव होने लगा और कुछ देर में नवजात ने जन्म लिया पर त्वरित उपचार के अभाव में नवजात ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
ख़बर के अनुसार इसके बाद महिला के पति ने निकट ही मृत नजवात को दफना दिया। हैरत यह है कि इस दौरान हाईवे से कई छोटे-बड़े वाहन गुजरते रहे। लेकिन किसी ने भी इन लोगों की तरफ देखना उचित नहीं समझा।
दोपहर करीब 11 बजे जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग से एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और महिला को अस्पताल लाई। यहां वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. डीवीएस रावत ने पीड़िता की जांच कर उचित उपचार किया। बताया कि स्थिति समान्य है। इधर, महिला के पति ने बताया कि वह बीते मंगलवार को अपनी पत्नी को लेकर जिला चिकित्सालय गोपेश्वर के चमोली मे ले गया था। जहा
डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड व अन्य जरूरी जांचे कीं। पूरे दिन उन्होंने स्थिति से अवगत नहीं कराया। लेकिन शाम 4 बजे के बाद कहा कि सामान्य डिलीवरी होना संभव नहीं है। बच्चे की धड़कन काफी कम है, हायर सेंटर ले जाओ।
वहीं अस्पताल से एम्बुलेंस की सुविधा मुहैया नहीं कराई गई। मजबूरी में मुझे अपनी पत्नी को बस से अस्पताल लाना पड़ा। लेकिन रास्ते में ही उसकी तबीयत खराब हो गई। दूसरी तरफ जिला चिकित्सालय गोपेश्वर के सीएमएस डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि नंदी देवी के परीक्षण के बाद उसे हायर सेंटर जाने की सलाह दी गई थी।
बहराल आपने पूरी ख़बर अगर पढ़ ली हो तो अब बोलता उतराखंड की सुनो
पहले तो उस बस चालक को बस खाली करवा कर बस मे मौजूद कुछ महिला के सहयोग से उनकी मदद करनी चईये थी फिर आगे जो होता अलग बात पर मानवता यहा मर गई। ये सबसे बडी बात । दूसरी बात पहाड़ के उस रास्ते से आने जाने वाले लोगो ने भी कोई इनकी सुध नही ली ये ओर बुरी ओर शर्मनाक बात।
तीसरी बात की सभी जानते है कि पहाड़ की महिलाओं का ये दर्द पूरी सरकार और बिपक्ष जानता है पर तब भी किसी के कान में कुछ असर नही होता मानो कान मे रुई डाल दी गई हो। दुख होता है इन दुःखद खबरो को जानकार सुनकर आंखों से आंसू भी आते है ।पर अफसोस इनके रहनुमा होने का दावा करने वाले सिर्फ अपने मतलब के लिए ही काम करते है उसके सिवा कुछ नही ओर हम भी दोषी है हम मानवता को भूल चुके है जो आज इनके साथ हुवा कल हमारे साथ भी हो सकता है को हम याद नही रखते! दुःखद है। अब ध्यान पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी दे या पूरे सभी सांसद या फिर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत या वो सभी 70 नेता जो आज विधानसभा में इनके किर्पा से ही पहुँचे है भाई इनके दर्द को समझो ।





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